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बारिश भी नहीं रोक पाई रेलवे की रफ्तार, SQRS मशीन ने 3 घंटे में बदल डाला 516 मीटर ट्रैक

Last Updated:September 13, 2026, 08:47 IST

Kota Nagda Railway Track Renewal SQRS Machine: कोटा मंडल के सबसे व्यस्त कोटा-नागदा रेलखंड पर लूनी रिच्छा-विक्रमगढ़ आलोट स्टेशनों के बीच ट्रैक नवीनीकरण का काम अत्याधुनिक एसक्यूआरएस मशीन से तेजी से किया जा रहा है. भारी बारिश के बावजूद पिछले 15 दिनों में करीब 2.8 किलोमीटर ट्रैक को पूरी तरह से नया किया जा चुका है. रेलवे ने केवल तीन घंटे के ब्लॉक में 516 मीटर ट्रैक बदलने का शानदार रिकॉर्ड भी बनाया. थ्रू स्लीपर रिन्यूअल के तहत कंक्रीट स्लीपर लगाए जा रहे हैं. इससे ट्रेनों का संचालन सुरक्षित होगा और अधिक भार सहने की क्षमता में भारी वृद्धि होगी.

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Kota: रेलवे ने 3 घंटे में बदल डाला आधा किलोमीटर ट्रैक, जानिए कैसे हुआ ये कामZoomKota-Nagda Railway: सिर्फ 3 घंटे में बदल डाला 516 मीटर ट्रैक, SQRS मशीन ने तेज किया काम

Kota: कोटा मंडल के अत्यंत व्यस्त और महत्वपूर्ण कोटा-नागदा रेलखंड पर रेल संरक्षा और ट्रैक की मजबूती को बढ़ाने के लिए इन दिनों एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस रेलखंड पर स्थित लूनी रिच्छा और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशनों के बीच अत्याधुनिक और यंत्रीकृत तरीके से ट्रैक नवीनीकरण का महत्वपूर्ण कार्य लगातार जारी है. इस जटिल कार्य को समय पर और पूरी सटीकता के साथ पूरा करने के लिए रेलवे द्वारा सिंप्लेक्स क्विक रिलेइंग सिस्टम (एसक्यूआरएस) मशीन का विशेष रूप से उपयोग किया जा रहा है. इस मशीन की मदद से पुराने स्लीपरों को बहुत ही तेजी से बदलते हुए ट्रैक को पहले से कहीं अधिक मजबूत और बेहतर स्थिति में तैयार किया जा रहा है. रेलवे प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना और ट्रेनों की गति को बिना किसी बाधा के बनाए रखना है.

रेलवे द्वारा किए जा रहे इस कार्य में आधुनिक तकनीक का शानदार इस्तेमाल देखने को मिल रहा है. हाल ही में एसक्यूआरएस मशीन के माध्यम से रेलवे ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की. इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने केवल तीन घंटे के छोटे से यातायात ब्लॉक में 43 ट्रैक पैनल अर्थात 516 मीटर लंबे ट्रैक का पूरी तरह से नवीनीकरण कर दिया. यह अपने आप में एक बड़ा और सराहनीय कदम है. पिछले 15 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस आधुनिक मशीन से लगभग 2800 मीटर यानी 2.8 किलोमीटर लंबे ट्रैक का नवीनीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है. सबसे खास बात यह रही कि भारी वर्षा और खराब मौसम जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद रेलवे के समर्पित कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इस कार्य को निरंतर जारी रखा और विकास की रफ्तार को धीमा नहीं पड़ने दिया.

थ्रू स्लीपर रिन्यूअल से ट्रैक को मिलेगी नई जानइस पूरे प्रोजेक्ट के तहत विशेष रूप से ‘थ्रू स्लीपर रिन्यूअल’ का कार्य किया जा रहा है. इसके अंतर्गत काफी पुराने हो चुके स्लीपरों को हटाकर उनके स्थान पर निर्धारित उच्च मानकों के अनुरूप नए और अत्यधिक मजबूत कंक्रीट स्लीपरों को स्थापित किया जा रहा है. पुराने स्लीपर समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. लेकिन नए कंक्रीट स्लीपरों के उपयोग से ट्रैक की ज्यामितीय स्थिति और मजबूती को लंबे समय तक बनाए रखने में काफी मदद मिलती है. ट्रैक अलाइनमेंट सही रहने से ट्रेन के पटरी से उतरने का खतरा न के बराबर हो जाता है.

सुरक्षित रेल संचालन और भार सहने की क्षमता में वृद्धिकोटा-नागदा रेलखंड दिल्ली-मुंबई रूट का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां से हर दिन दर्जनों सुपरफास्ट यात्री गाड़ियां और भारी-भरकम मालगाड़ियां गुजरती हैं. ऐसे में ट्रैक का मजबूत होना बेहद जरूरी है. नए कंक्रीट स्लीपरों के लग जाने से ट्रैक की गुणवत्ता में भारी सुधार होगा. इससे अधिक यातायात और तेज गति से चलने वाली ट्रेनों के गतिशील भार के कारण ट्रैक पर पड़ने वाले भारी दबाव को बेहतर ढंग से सहने की क्षमता में जबरदस्त वृद्धि होगी. कोटा मंडल प्रशासन समय-समय पर इस तरह के तकनीकी बदलाव करता रहता है. ट्रैक के रखरखाव में आधुनिक मशीनों का बढ़ता उपयोग रेलवे की कार्यप्रणाली को न केवल तेज बना रहा है, बल्कि मानवीय श्रम और त्रुटि की संभावनाओं को भी कम कर रहा है. यह ट्रैक नवीनीकरण कार्य भविष्य में सुरक्षित और सुगम रेल संचालन की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Kota,Kota,Rajasthan

First Published :

September 13, 2026, 08:25 IST

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