ब्लू सिटी का रंग फीका न पड़े, बिना सरकारी मदद के जोधपुर की विरासत बचाने में जुटे युवा, चूने-नील से रंगेंगे मकान

Last Updated:October 26, 2026, 20:12 IST
Jodhpur Blue City: जोधपुर की ब्लू सिटी पहचान को बचाने के लिए स्थानीय युवा आगे आए हैं. पारंपरिक चूने और नील से पुराने मकानों को नीला रंग देने की मुहिम शुरू की गई है. युवाओं ने प्रशासन से स्पेशल फंड जारी करने की मांग की है, ताकि ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के साथ स्थानीय कारीगरों को रोजगार भी मिल सके.
जोधपुर. राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को समेटे जोधपुर को दुनिया भर में ‘ब्लू सिटी’ के नाम से जाना जाता है. भीतरी शहर की नीले रंग से सजी गलियां और पारंपरिक शैली में बने मकान देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं. बदलते समय के साथ इस ऐतिहासिक पहचान को बरकरार रखना चुनौती बनता जा रहा है. ऐसे में अब स्थानीय युवाओं और रहवासियों ने शहर की विरासत बचाने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है. पुराने शहर के मकानों को पारंपरिक चूने और नील से नीला रंग देने की पहल के जरिए युवा जोधपुर की पहचान को फिर से जीवंत करने में जुटे हैं.
ब्लू सिटी की पुरानी पहचान को कायम रखने की इस मुहिम में रवि पुरोहित, सूरज व्यास, विवेक बोड़ा, रमेश पुरोहित, कालू भा, भुवनेश व्यास, मोनिका व्यास (पार्षद), विकास रागवानी (पार्षद) और संजय जी दईया (पार्षद) सहित कई लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. ये युवा बिना किसी सरकारी सहायता का इंतजार किए अपने स्तर पर आर्थिक सहयोग कर पुराने शहर के मकानों को पारंपरिक नीले रंग में रंगवाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं. उनका उद्देश्य केवल घरों की सुंदरता बढ़ाना नहीं, बल्कि जोधपुर की सदियों पुरानी स्थापत्य शैली, चूने और नील की परंपरा तथा सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है.
नवचौकिया की नीली गलियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्रअभियान से जुड़े दीपक सोनी ने बताया कि भीतरी शहर, विशेषकर नवचौकिया क्षेत्र की नीली गलियां जोधपुर की विशिष्ट पहचान हैं. इन्हें देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, शहर की यही पारंपरिक रंगत जोधपुर को दूसरे पर्यटन स्थलों से अलग पहचान देती है. ऐसे में जरूरी है कि पुराने मकानों और ऐतिहासिक इलाकों की मूल शैली को संरक्षित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ब्लू सिटी की पहचान को बचाने और इस मुहिम को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए विशेष बजट यानी स्पेशल फंड जारी किया जाए, ताकि संरक्षण का काम केवल व्यक्तिगत प्रयासों तक सीमित न रहे.
स्पेशल फंड से विरासत संरक्षण के साथ रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावादीपक सोनी ने सुझाव दिया कि विशेष फंड का उपयोग भीतरी शहर के सरकारी मंदिरों, अस्पतालों और उन आम नागरिकों के मकानों को पारंपरिक चूने और नील से रंगवाने में किया जाए, जो अपने घरों को नीला रंग देने के इच्छुक हैं. इससे स्थानीय कारीगरों, रंगाई-पुताई से जुड़े श्रमिकों और अन्य लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे. युवाओं का मानना है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साझा प्रयासों से जोधपुर की ऐतिहासिक पहचान को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. यह पहल केवल मकानों को नीला रंग देने तक सीमित नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और ब्लू सिटी की पहचान को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकती है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
October 26, 2026, 20:12 IST



