Rajasthan

भगवान ब्रह्मा की पूजा सिर्फ पुष्कर में क्यों? जानें माता सावित्री के श्राप की पूरी कथा

Last Updated:September 24, 2026, 14:10 IST

Pushkar Brahma Temple: पुष्कर को भगवान ब्रह्मा की पूजा के प्रमुख स्थलों में गिना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान ब्रह्मा से जुड़ी यज्ञ की कथा और माता सावित्री के श्राप का संबंध पुष्कर से बताया जाता है. इसी पौराणिक कथा के चलते पुष्कर में ब्रह्मा जी का प्रसिद्ध मंदिर विशेष महत्व रखता है. इस कहानी में यज्ञ, सावित्री माता का क्रोध और पुष्कर को मिली विशेष मान्यता का वर्णन मिलता है.

ख़बरें फटाफट

अजमेर. राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित ब्रह्मा नगरी पुष्कर धार्मिक और पौराणिक आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां भगवान ब्रह्मा का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है जिसे लेकर एक प्राचीन पौराणिक कथा प्रचलित है. मान्यता है कि माता सावित्री के श्राप के कारण संसार में भगवान ब्रह्मा की पूजा और मंदिर निर्माण पर रोक लग गई थी लेकिन देवताओं की प्रार्थना के बाद इस श्राप से केवल पुष्कर धाम को विशेष छूट मिली. इसी मान्यता के कारण पुष्कर को भगवान ब्रह्मा की पूजा का प्रमुख और विशेष स्थान माना जाता है.

धार्मिक नगरी पुष्कर के पुजारी पौराणिक कथा का वर्णन करते हुए बताते है कि एक बार देवर्षि नारद भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और उन्हें पुष्कर में होने वाले महायज्ञ के बारे में बताया. पुजारी आगे बताते हैं कि कहा जाता है कि यज्ञ के लिए ऐसा शुभ मुहूर्त आया था जो दोबारा 10 हजार वर्षों तक नहीं आने वाला था. इसी कारण भगवान ब्रह्मा ने बिना देर किए यज्ञ शुरू करने का निर्णय लिया लेकिन यज्ञ कराने आए विद्वान ब्राह्मणों ने भगवान ब्रह्मा को कहा कि बिना पत्नी के यज्ञ पूसंपन्न नहीं हो सकता. समय के अभाव को देखते हुए विद्वानों की सलाह पर जंगल से गुर्जर जाति की गायत्री नामक कन्या को लाया गया और ब्रह्मा जी के साथ उनका विवाह कराकर यज्ञ प्रारंभ कर दिया गया.

सावित्री के क्रोध से मिला ब्रह्मा जी को श्रापइसी बीच माता सावित्री को जब पता चला कि भगवान ब्रह्मा ने दूसरी पत्नी के साथ यज्ञ शुरू कर दिया है तो वे अत्यंत क्रोधित हो उठीं. मान्यता है कि वे यज्ञ स्थल पर पहुंचीं और भगवान ब्रह्मा को श्राप दिया कि पूरे भूमंडल पर कहीं भी उनकी पूजा-अर्चना नहीं होगी और न ही उनका मंदिर बनाया जाएगा. माता सावित्री के इस श्राप से देवताओं और ऋषियों में चिंता फैल गई. सभी ने माता सावित्री से प्रार्थना कर श्राप को सीमित करने का आग्रह किया.

देवताओं की प्रार्थना के बाद सीमित हुआ श्रापदेवताओं की प्रार्थना के बाद माता सावित्री ने श्राप को सीमित करते हुए कहा कि पूरे संसार में भगवान ब्रह्मा की पूजा नहीं होगी लेकिन पुष्कर की पावन भूमि पर उनकी पूजा-अर्चना की जा सकेगी और मंदिर भी बनाया जा सकेगा. यही वजह बताई जाती है कि पुष्कर को भगवान ब्रह्मा की पूजा का विशेष और अद्वितीय स्थान प्राप्त है. वहीं माता सावित्री पुष्कर की ऊंची पहाड़ी पर जाकर विराजमान हुईं. आज इसी स्थान पर प्रसिद्ध सावित्री मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है.

About the AuthorJagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

और पढ़ेंLocation :

Ajmer,Rajasthan

First Published :

September 24, 2026, 14:10 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj