S-400 बेचने चला था तुर्की, रूस नहीं इजरायल ने अटका दी डील, UAE को क्यों नहीं खरीदने दे रहा?

Last Updated:September 24, 2026, 11:13 IST
S-400 Turkey US: तुर्की के लिए आज के समय सबसे बड़ा सिरदर्द उसका रूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 है. हाल ये है कि तुर्की अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं कर रहा. साथ ही वह इसे बेचना भी चाहता है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि UAE को यह हथियार बेचाजा सकता है.लेकिन अब एक हैरान करने वाली खबर आई है. इस खबर में दावा किया जा रहा है कि तुर्की नहीं चाहता कि UAE इस मिसाइल सिस्टम को खरीदे.रूस का S400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम.
Turkey S-400 News: भारत के हवाई सीमाओं की सुरक्षा करने के लिए रूस का S-400 सिस्टम हैं. यही सिस्टम तुर्की के पास भी है. अब तुर्की के S-400 को लेकर फिर हलचल तेज हो गई है. तुर्की में अमेरिका के राजदूत टॉम बराक ने साफ किया है कि रूस से खरीदे गए S-400 सिस्टम और तुर्की पर लगे अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों को लेकर बातचीत अभी जारी है. यानी जिस सौदे को कुछ समय पहले लगभग तय माना जा रहा था, उसमें अब भी पेंच बाकी है. इसी बीच तुर्की मीडिया में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तुर्की के S-400 को लेकर असली अड़ंगा रूस या अमेरिका नहीं, बल्कि इजरायल की ओर से लगाया जा रहा है. रिपोर्ट का दावा है कि इजरायल की ओर से UAE पर दबाव बनाया जा रहा है.
S-400 पर आखिर क्या पेच फंसा है?
तुर्की ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था. इस वजह से अमेरिका ने तुर्की को F-35 फाइटर जेट कार्यक्रम से बाहर कर दिया और CAATSA के तहत प्रतिबंध लगाए. CAATSA यानी ‘काउंटरिंग अमेरिकास एडवर्सरीस थ्रू सैंक्शनस एक्ट’ अमेरिका का 2017 में बनाया गया कानून है. इसके तहत उन देशों या संस्थाओं पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं जो रूस, ईरान या उत्तर कोरिया के साथ बड़े रक्षा या दूसरे अहम सौदे करते हैं. तुर्की पर ये प्रतिबंध रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के बाद लगाए गए थे.
F-35 फाइटर जेट.
अब अमेरिका और तुर्की इस पूरे विवाद को खत्म करने का रास्ता तलाश रहे हैं. अमेरिकी राजदूत टॉम बराक ने कहा है कि S-400 मामले को सुलझाने में समय लगेगा और दोनों देशों की टीमें इस पर लगातार काम कर रही हैं. उनके मुताबिक मामला सिर्फ तुर्की के पाले में नहीं है, बल्कि कई स्तरों पर बातचीत चल रही है.
S-400 बेचने की आई थी खबर
करीब ढाई महीने पहले तुर्की के अखबार हुरियत में एक लेख आया था. इसमें कहा गया था कि तुर्की ने S-400 सिस्टम किसी खाड़ी देश को बेचने का फैसला कर लिया है. इसके बाद मीडिया रिपोर्टों में उस खाड़ी देश का नाम UAE बताया गया.
रूस ने नहीं, इजरायल ने लगाया अड़ंगा
तुर्की के मीडिया आउटलेट हेबर-7 के मुताबिक, बातचीत से जुड़े एक सूत्र का दावा है कि रूस और तुर्की के बीच S-400 को लेकर रास्ता निकाला जा चुका है. यानी अड़चन रूस की तरफ से नहीं हैं. इसके बजाय दावा है कि असली दबाव UAE की ओर से तुर्की पर किया जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर UAE S-400 खरीदता है तो इजरायल इससे खुश नहीं होगा. उसने इस डील को रोकने के लिए अबू धाबी पर दबाव बनाया है.
इजरायल को UAE के S-400 से क्या दिक्कत?
दावे के मुताबिक, इजरायल की चिंता सिर्फ S-400 सिस्टम तक सीमित नहीं है. इसके पीछे तुर्की के F-35 कार्यक्रम में दोबारा लौटने का सवाल भी जुड़ा हुआ है. दरअसल तुर्की और इजरायल में कोई दोस्ती जैसा संबंध नहीं है. इसके अलावा तुर्की एक मुस्लिम बाहुल्य देश है, जिसका झुकाव खाड़ी के देशों की ओर रहता है और वह खुद को मुस्लिम देशों का लीडर बनाने की कोशिश करता है. अगर तुर्की और अमेरिका के बीच S-400 विवाद खत्म हो जाता है तो अमेरिका CAATSA प्रतिबंध हटा लेगा. इसके कारण तुर्की के F-35 प्रोग्राम में लौटने का रास्ता खुल सकता है. तुर्की नहीं चाहता कि F-35 प्रोग्राम में वह लौटे और उसके एयरफोर्स को एक स्टील्थ विमान मिले.
अमेरिका भी चाहता है S-400 का मामला खत्म हो
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका की तरफ से भी इस विवाद को खत्म करने के संकेत मिल रहे हैं. टॉम बराक ने कहा है कि तुर्की और अमेरिका के रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत हैं और दोनों देशों की रक्षा साझेदारी अहम है. उन्होंने यह भी कहा कि S-400 विवाद को हल किया जाएगा. इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका और तुर्की ऐसे फॉर्मूले की तलाश में हैं, जिसमें S-400 का मुद्दा भी सुलझ जाए और तुर्की के साथ रक्षा सहयोग भी आगे बढ़ सके.
About the AuthorYogendra Mishra
Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…
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September 24, 2026, 11:10 IST



