महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा यह रोग, 10 में से एक लेडी मरीज, प्रेग्नेंसी की प्लानिंग से पहले जरूर कराएं 3 टेस्ट

पटनाः थायरॉइड की समस्या आज महिलाओं में तेजी से सामने आ रही है. खासकर प्रेग्नेंसी की प्लानिंग बना रही महिलाओं और गर्भवती महिलाओं में इसकी जांच को डॉक्टर काफी अहम मानते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाओं के लिए थायरॉइड हॉर्मोन की जरूरत होती है. ऐसे में शरीर में इसकी कमी या अधिकता होने पर कई तरह की दिक्कतें सामने आ सकती हैं. पटना स्थित जय प्रभा मेदांता सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओबीस एंड गायनी विभाग की डायरेक्टर डॉ. मीना सामंत बताती हैं कि थायरॉइड की बीमारी महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है. उनके ओपीडी में जांच के दौरान करीब 10 प्रतिशत महिलाओं में थायरॉइड की कमी देखने को मिलती है.
आयोडीन की कमी को न करें नजरअंदाजडॉक्टर मीना सामंत ने बताया कि थायरॉइड हॉर्मोन बनने के लिए शरीर में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होना जरूरी है. इसके लिए आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहिए. हालांकि, थायरॉइड की समस्या सिर्फ आयोडीन की कमी से ही नहीं होती. कुछ मामलों में शरीर की इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्या या थायरॉइड ग्रंथि में सूजन के कारण भी हॉर्मोन की कमी हो सकती है. इसी वजह से गर्भवती महिलाओं, प्रेग्नेसी की प्लानिंग कर रही महिलाओं में डॉक्टर थायरॉइड की जांच करवाते हैं.
शरीर में ये बदलाव दिखें तो हो जाएं सावधानडॉ. मीना सामंत ने बताया कि थायरॉइड की समस्या के कुछ लक्षणों को शुरुआत में ही पहचानना जरूरी है. अगर बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही है, शरीर में सूजन आ रही है या हाथ-पैर कांप रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करवानी चाहिए. उनका कहना है कि अगर शरीर में थायरॉइड हॉर्मोन की कमी है तो इसकी पूर्ति करना जरूरी होता है, ताकि शरीर की सामान्य प्रक्रियाएं ठीक तरह से चलती रहें.
सुबह खाली पेट क्यों दी जाती है थायरॉक्सिन की गोली?थायरॉइड की कमी होने पर मरीजों को थायरॉक्सिन हॉर्मोन की दवा दी जाती है. डॉक्टर ने इसे समझाते हुए कहा कि जिस तरह डायबिटीज में इंसुलिन की कमी होने पर इंसुलिन दिया जाता है, उसी तरह थायरॉइड ग्रंथि के कम काम करने पर थायरॉइड हॉर्मोन की पूर्ति दवा के जरिए की जाती है. यह दवा सही तरीके से लेना भी जरूरी है. थायरॉक्सिन की गोली सुबह खाली पेट लेने की सलाह दी जाती है और इसे लेने के करीब आधे घंटे बाद कुछ खाना-पीना चाहिए, ताकि दवा का शरीर में एब्जॉर्बशन ठीक से हो सके.
क्या जिंदगीभर खानी पड़ती है दवा?थायरॉइड की दवा शुरू होने के बाद उसे नियमित रूप से लेना पड़ सकता है. हालांकि, इसकी जरूरत हर मरीज में एक जैसी नहीं होती. डॉक्टर समय-समय पर जांच के आधार पर दवा की मात्रा तय करते हैं.
डॉ. मीना सामंत बताती हैं कि शुरुआत में लगभग हर छह महीने पर जांच की जा सकती है. स्थिति कंट्रोल होने के बाद भी समय-समय पर थायरॉइड हॉर्मोन की जांच जरूरी रहती है. कुछ मामलों में थायरॉइड ग्रंथि में सूजन या इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्या ठीक होने के बाद हॉर्मोन का स्तर दोबारा सामान्य भी हो सकता है. ऐसी स्थिति में दवा की मात्रा कम करने की जरूरत पड़ सकती है.
गर्भावस्था में क्यों बढ़ सकती है दवा की जरूरत?गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड हॉर्मोन की जरूरत में बदलाव हो सकता है. डॉक्टर के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में मां से ही बच्चे को थायरॉइड हॉर्मोन मिलता है. ऐसे में कुछ महिलाओं में दवा की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी पड़ सकती है.
वहीं, डिलीवरी के बाद स्थिति बदल सकती है और कुछ महिलाओं में दवा की जरूरत कम हो सकती है या दवा की आवश्यकता ही न रहे. इसलिए प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच जरूरी है.
टीएसएच, फ्री टी4 और एंटी-टीपीओ जांच से मिलती है स्थिति की जानकारी
थायरॉइड की निगरानी के लिए टीएसएच और फ्री टी4 की जांच कराई जाती है. वहीं, कुछ मामलों में एंटी-टीपीओ जैसी जांच भी कराई जाती है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि कहीं थायरॉइड की समस्या शरीर की इम्यून सिस्टम से जुड़ी स्थिति के कारण तो नहीं है.
बिहार में हर 10 में 1 महिला में थायरॉइड की कमी?डॉ. मीना सामंत ने बताया कि मेदांता के उनके ओपीडी में जांच के दौरान करीब 10 प्रतिशत महिलाओं में थायरॉइड की कमी देखने को मिलती है. यानी जांच कराने वाली महिलाओं में लगभग हर 10 में से 1 महिला में थायरॉइड की कमी सामने आ रही है.



