मोबाइल यूजर्स को बड़ी राहत, 24 घंटे मिलेगी कस्टमर केयर हेल्प, 15 दिन में होगा हर शिकायत पर फैसला

नई दिल्ली. देशभर के करोड़ों मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर आई है. अब टेलीकॉम कंपनियों के लिए ग्राहकों की शिकायतों को टालना या अनदेखा करना मुमकिन नहीं होगा. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण विनियम, 2026 जारी कर दिया है. नए नियमों के तहत अब ग्राहकों को सातों दिन 24 घंटे कस्टमर केयर सहायता मिलेगी. साथ ही उनकी शिकायत को कंपनियां लंबे समय तक लटकाकर नहीं रख पाएंगी. कंपनियां एआई का यूज तो कर पाएंगे लेकिन एआई बॉट्स आदि की निगरानी के लिए कर्मचारी रखने जरूरी होंगे.
इस नए बदलाव से टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही सीधे उनके टॉप मैनेजमेंट तक तय कर दी गई है. अगर कंपनियां तय समयसीमा तक ग्राहकों की शिकायतों का निपटारा नहीं करती है या मानकों का उल्लंघन करती हैं तो उनको आर्थिक दंड भरना होगा. ट्राई ने शिकायत केंद्रों की टाइमिंग को 16 घंटे से बढ़ाकर हफ्ते के सातों दिन, 24 घंटे कर दिया है.
एआई के साथ रखने होंगे कर्मचारी
कंपनियां ग्राहकों की शिकायतें सुनने के लिए AI चैटबॉट्स, ऑटोमेटेड सिस्टम और ग्राहक-केंद्रित तकनीकी टूल्स का इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन इन सभी की निगरानी के लिए उसे कर्मचारी भी रखने होंगे. रोजाना कम से कम 16 घंटे इंसानी प्रतिनिधि (Human Agents) की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी होगा, ताकि ऑटोमेशन के चक्कर में ग्राहक न उलझें.
मोबाइल ऐप से दर्ज होगी शिकायत
कॉल सेंटर के लंबे इंतजार और ईमेल के झंझट से ग्राहकों को मुक्ति दिलाने के लिए नियमों को डिजिटल फ्रेंडली बनाया गया है. अब उपभोक्ता अपने सर्विस प्रोवाइडर के आधिकारिक मोबाइल ऐप से सीधे शिकायत दर्ज करा सकेंगे, अपील दाखिल कर सकेंगे और सर्विस रिक्वेस्ट भेज सकेंगे. यह सुविधा पहले से चल रही वेबसाइट, पोर्टल और कॉल सेंटर के अलावा एक अतिरिक्त विकल्प होगा.
ये नियम उन सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) पर भी लागू होंगे, जिनके पास पिछले वित्त वर्ष के आखिरी दिन 10,000 से अधिक ग्राहक थे. पहले लागू 5 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले नियम को हटा दिया गया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा ब्रॉडबैंड यूजर्स इसके दायरे में आ सकें.
15 दिन में अपील और 15 दिन में अंतिम फैसला
शिकायत के निवारण के बाद अगर ग्राहक कंपनी के समाधान से संतुष्ट नहीं होता है तो वह 15 दिन के भीतर अपील कर सकता है. कंपनी के अपीलीय प्राधिकरण (Appellate Authority) को अपील मिलने के 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर अपना अंतिम फैसला देना होगा. अपीलीय प्राधिकरण में कंपनी प्रबंधन से जुड़े कम से कम 5 साल के अनुभवी नियमित अधिकारियों का होना अनिवार्य किया गया है.
रिपोर्ट सीधे कंपनी के CEO और बोर्ड तक पहुंचेगी
अब शिकायत का सिर्फ “क्लोज” होना काफी नहीं होगा, बल्कि उपभोक्ता का संतुष्ट होना भी जरूरी होगा. शिकायत या अपील का निपटारा होने पर कंपनी को 5 अंकों के पैमाने पर एक ऑनलाइन फीडबैक सर्वे कराना होगा. इसमें 5 का मतलब ‘पूरी तरह संतुष्ट’ और 1 का मतलब ‘पूरी तरह असंतुष्ट’ होगा. यह सर्वे रिपोर्ट कंपनियों को हर तिमाही अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि हर तिमाही में शिकायतों, अपीलों और फीडबैक सर्वे की पूरी रिपोर्ट सीधे कंपनी के सीईओ या निदेशक मंडल (Board of Directors) के सामने पेश करनी होगी.
दिव्यांगजनों के लिए स्पेशल हेल्पलाइन
दिव्यांग उपभोक्ताओं (PwDs) की सहूलियत के लिए हर सर्विस प्रोवाइडर को अपने शिकायत केंद्र में विशेष हेल्प डेस्क या हेल्पलाइन शुरू करनी होगी, जहां प्रशिक्षित कर्मचारी और सहायक तकनीक मौजूद रहेंगे. साथ ही कंपनियों के मोबाइल ऐप और पोर्टल को दिव्यांगजनों के लिए जारी सरकारी सुगम्यता मानकों के अनुरूप बनाना अनिवार्य होगा.



