‘रक्षक बनकर आए थे, गुंडे कैसे बन गए?’ जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस पर फूटा अरुणोदय सिंह का गुस्सा

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पोते और बॉलीवुड के एक्टर अरुणोदय सिंह एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं. ‘सिकंदर’, ‘ये साली जिंदगी’, ‘जिस्म 2’ और ‘मैं तेरा हीरो’ जैसी चर्चित फिल्मों में एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीतने वाले अरुणोदय सिंह इन दिनों चर्चा में हैं. अरुणोदय किसी फिल्म के लिए नहीं, बल्कि देश के सामाजिक-राजनीतिक हालातों और विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों के आचरण पर तीखा वार किया है. जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के बाद अरुणोदय सिंह पांच मिनट से ज्यादा का वीडियो शेयर किया है, जो अब वायरल हो रहा है. उनके शब्दों में गुस्सा भी है, दर्द भी और व्यवस्था को लेकर गहरी नाराजगी भी. उन्होंने उन लोगों को भी कटघरे में खड़ा किया, जो सत्ता के दबाव में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं.
सोशल मीडिया पर अरुणोदय सिंह ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर उन लोगों से सवाल किए हैं जो लाठी और हथियारों के बल पर नागरिकों, छात्रों और खासकर महिला प्रदर्शनकारियों को दबाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने अपने वीडियो में पुलिसकर्मियों से सवाल किया कि आखिर वे किसी ताकतवर व्यक्ति के आदेश पर ऐसा काम कैसे कर सकते हैं, जिसे वे खुद गलत मान सकते हैं.
पुलिस और सुरक्षा बलों के आचरण पर उठाए सवाल
वीडियो की शुरुआत करते हुए अरुणोदय सिंह ने सीधे तौर पर पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों से सवाल किया. उन्होंने पूछा कि वे किस तरह से लगातार इस तरह का क्रूर आचरण कर सकते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि कोई व्यक्ति केवल इसलिए कैसे हिंसक बन सकता है क्योंकि सत्ता में बैठा कोई ‘मालिक’ या ताकतवर शख्स उसे ऐसा करने का आदेश देता है? उन्होंने सवाल किया कि क्या सिर्फ किसी बड़े अधिकारी या ताकतवर व्यक्ति का आदेश मिलना ही किसी को अपनी इंसानियत भुलाने के लिए काफी है?
‘रक्षकों को गुंडों में बदल रहे हैं’
अरुणोदय ने अपने वीडियो में पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि कोई व्यक्ति किसी सत्ता में बैठे शख्स के कहने पर इतना क्रूर कैसे हो सकता है. उन्होंने सवाल किया कि क्या सिर्फ किसी बड़े अधिकारी या ताकतवर व्यक्ति का आदेश मिलना ही किसी को अपनी इंसानियत भुलाने के लिए काफी है? उन्होंने कहा कि असली ताकतवर लोग, कभी अपने हाथ गंदे नहीं करते और न ही उनके जूते जमीन पर कीचड़ में उतरते हैं. ऐसा करने वाले हमेशा सुरक्षा बल ही होते हैं. अरुणोदय सिंह ने दर्द जताते हुए कहा कि ये सत्ताई लोग लगातार ‘रक्षकों को गुंडों में बदल रहे हैं’ और सुरक्षा बल बिना सोचे-समझे इस खतरनाक खेल का हिस्सा बन रहे हैं.प्रदर्शनकारियों के साहस को सराहा
एक्टर ने प्रदर्शनकारियों के साहस की तारीफ करते हुए कहा कि जो अपनी जान की परवाह किए बिना, पुलिस के हथियारों और लाठी-डंडों के सामने डटकर खड़े हैं. वे एक बेहतर और आजाद दुनिया की मांग कर रहे हैं. ऐसे लोग उन्हें निशब्द कर देते हैं. लेकिन वे उनके इरादों और संघर्ष को पूरी तरह समझते हैं और यह बात उन्हें सोचने पर मजबूर करती है. यहां देखें वीडियो
तमाशबीनों पर भी उठाए सवाल
अरुणोदय सिंह ने अपने वीडियो में सिर्फ पुलिस को ही निशाने पर नहीं लिया, बल्कि समाज के उन लोगों की मानसिकता पर भी सवाल उठाए, जो डर के कारण चुप रहना पसंद करते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग व्यवस्था के खिलाफ बोलने से इसलिए बचते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी आवाज से कोई बदलाव नहीं आएगा. वे चाहते हैं कि उनका जीवन बिना किसी परेशानी के गुजरता रहे और सत्ता में बैठे लोगों का ध्यान उनकी ओर न जाए. एक्टर ने ऐसे लोगों के डर और बेबसी को स्वीकार किया, लेकिन अपनी चिंता भी जाहिर की. उन्होंने उन लोगों का भी जिक्र किया, जिन्हें दूसरों के संघर्ष से कोई फर्क नहीं पड़ता. जब किसी दूसरे परिवार, दोस्त या समुदाय पर संकट आता है, तो वे उसे अपना मामला नहीं मानते. अरुणोदय ने आगे कहा कि इन सभी लोगों की मानसिकता को वह किसी हद तक समझ सकते हैं, लेकिन उन पुलिसकर्मियों की भूमिका उन्हें समझ नहीं आती, जो अपने सामने हो रही कार्रवाई में शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के भी परिवार हैं, बच्चे हैं, सपने हैं और भावनाएं हैं. वे भी एक ऐसे देश में रहना चाहते हैं, जहां लोग खुशहाल जिंदगी जी सकें.
आपकी बेटी के साथ ऐसा हो तो?
वीडियो में अरुणोदय ने पुलिसकर्मियों को उनके परिवारों का हवाला देते हुए आत्ममंथन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रदर्शनकारियों के परिवारों को डर और हिंसा का सामना करना पड़ सकता है, उसी तरह पुलिसकर्मियों के अपने परिवार भी ऐसे हालात का शिकार हो सकते हैं. एक्टर ने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी की बेटी के साथ दुर्व्यवहार हो सकता है, किसी के बेटे को सवाल पूछने या मजाक करने के कारण गायब किया जा सकता है, किसी की मां को उसके धर्म या विचारों के कारण निशाना बनाया जा सकता है और किसी के पिता को न्याय की मांग करने पर पीटा जा सकता है. अरुणोदय का कहना था कि ऐसी परिस्थितियों में चुप रहना, तमाशा देखते रहना या खुद हिंसा में शामिल होना किसी समस्या का समाधान नहीं है. उन्होंने पुलिसकर्मियों से पूछा कि अगर वे दूसरों के परिवारों के साथ ऐसा होते देखेंगे या उसमें हिस्सा लेंगे तो क्या उन्हें यह महसूस नहीं होगा कि यही सब उनके अपने परिवार के साथ भी हो सकता है?
‘आप मना कर सकते हैं, आपको आदेश मानना जरूरी नहीं’
अरुणोदय सिंह के वीडियो का सबसे अहम हिस्सा पुलिसकर्मियों से की गई उनकी अपील है. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें प्रदर्शनकारियों पर हमला करने या उनकी आवाज दबाने का आदेश दिया जाता है, तो वे उसे मानने से इनकार भी कर सकते हैं. एक्टर ने कहा कि पुलिसकर्मियों के पास हथियार हैं और वे चाहें तो उनका इस्तेमाल नागरिकों की रक्षा करने के लिए कर सकते हैं. उन्होंने अपील की कि पुलिस के जवान एक साथ खड़े होकर यह कहें कि वे बच्चों को नहीं पीटेंगे, महिलाओं की रक्षा करेंगे और उन लोगों की सुरक्षा करेंगे, जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं. उन्होंने आगे दो टूक कहा कि आम लोग लड़ना नहीं चाहते और न ही डर के माहौल में जीना चाहते हैं. उनकी मांग एक ऐसे देश की है, जहां सभी लोग सम्मान और सुरक्षा के साथ रह सकें. अरुणोदय ने पुलिसकर्मियों से कहा कि उन्हें यह तय करना होगा कि वे अपनी ताकत का इस्तेमाल किसके लिए कर रहे हैं.
‘आपको उनकी दुनिया में जगह नहीं मिलेगी’
अरुणोदय ने अपने वीडियो के आखिर में सत्ता में बैठे ताकतवर लोगों और उनके आदेशों का पालन करने वालों के संबंध पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पुलिसकर्मियों को आगाह किया कि जिन लोगों के आदेश पर वे दूसरों के खिलाफ खड़े होते हैं, वे जरूरी नहीं कि मुश्किल समय में उनका साथ दें. एक्टर ने कहा कि पुलिसकर्मियों को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि सत्ता के करीब रहने से वे भी उसी ताकतवर वर्ग का हिस्सा बन जाएंगे. क्योंकि उन्हें अंत में उसी समाज के साथ रहना है, जिसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी उन्होंने ली है. उन्होंने जोर देकर कहा कि वे गलत तरफ खड़े हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि उनकी असली जगह आम लोगों के साथ है.



