राजस्थान इस बार झेल रहा है बीते 10 बरसों का सबसे भयानक सूखा, पढ़ें क्या हैं हालात

जयपुर. राजस्थान इस साल कमजोर मानसून के चलते पिछले 10 बरसों का सबसे भयानक सूखा झेल रहा है. इस साल राजस्थान में सामान्य के मुकाबले 17.40 फीसदी कम बारिश हुई है. इस साल प्रदेशभर में औसतन 350.83 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि यहां सामान्य बारिश का औसत 424.71 मिमी है. इस बार राजस्थान में बारिश बीते साल के मुकाबले लगभग आधी ही हुई है. पिछले मानसून में प्रदेश में बारिश का आंकड़ा 680.13 मिमी रहा था. पिछले साल कई इलाके में अतिवृष्टि की श्रेणी में थे. लेकिन इस बार कई इलाके सूखे की चपेट में है.
मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान के 11 जिले सूखे की चपेट में हैं. इन जिलों में औसत के मुकाबले 25 फीसदी बारिश की कमी रही है. पश्चिमी राजस्थान के तीन जिलों पाली, जैसलमेर और जालोर में बारिश की कमी का आंकड़ा 50 फीसदी से भी ज्यादा है. पाली में इस साल सामान्य से 58.57 फीसदी कम बारिश हुई है. वहीं जैसलमेर में यह आंकड़ा 54.24 फीसदी और जालोर में 50.72 फीसदी रहा है.
राजस्थान ही नहीं इसके पड़ोसी राज्यों में बारिश कम हुई है
इस बार कमजोर मानसून के चलते प्रदेश के कई जिले पूरे मानसून अच्छी बारिश की बाट जोहते ही रह गए. बांसवाड़ा, हनुमानगढ़, उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, बालोतरा, भीलवाड़ा, जोधपुर, श्रीगंगानगर, डूंगरपुर और कोटपूतली-बहरोड़ जैसे जिले 20 से 40 फीसदी तक कम बारिश हुई है. ये हालात सिर्फ राजस्थान नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों गुजरात, पंजाब, मध्यप्रदेश और हरियाणा में भी हैं. पंजाब में इस मानसून में सामान्य से 41 फीसदी, हरियाणा में 23 फीसदी, गुजरात में 10 फीसदी और मध्यप्रदेश में 4 फीसदी बारिश कम हुई है.
बाजरा, मूंग, ग्वार और कई दालों की फसलें चौपट हो गईराजस्थान में इस बार 2015 के बाद सूखे की सबसे ज्यादा ज्यादा भयावह स्थिति है. 2015 में कुल बारिश तो 9 फीसदी ज्यादा थी लेकिन 19 जिलों की कई तहसीलें सूखी रह गई थीं. लेकिन 23 जिलों में सामान्य से 60 फीसदी तक ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी. इस साल कुल बारिश भी कम है तो वहीं कई इलाकों में सूखे की स्थितियां विकट हैं. बारिश की कमी के कारण बाजरा, मूंग, ग्वार और कई दालों की फसलें चौपट हो गई हैं.
बीते 10 साल का सबसे बड़ा अकाल सामने है
बीते दिनों पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कई जिलों में अकाल के हालात पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से जल्द ही राहत वाले कदम उठाने की मांग की थी. गहलोत सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा था कि राजस्थान में बीते 10 साल का सबसे बड़ा अकाल सामने है. गहलोत ने अभावग्रस्त गांवों का आंकड़ा सामने रखते हुए कहा कि जोधपुर जिले में तकरीबन 2000 गांवों, बाड़मेर के 2460, बालोतरा के 1216 और जैसलमेर के 961 गांव सूखे की चपेट में हैं.
चारा 1200 रुपए प्रति मन तक पहुंच गयागहलोत ने कहा कि पशुओं के चारे का संकट बढ़ता जा रहा है. कमोबेश यही स्थिति पूरे मारवाड़ सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों की भी है. जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा में चारे की कीमतें बढ़ती जा रही हैं. बताया जा रहा है कि चारा 1200 रुपए प्रति मन तक पहुंच गया है और पशुपालकों के लिए इसे लेना उनके बूते से बाहर होता जा रहा है. इससे पशुओं के लिए संकट बढ़ रहा है. सरकार को तुरंत हरकत में आकर प्रदेशभर के लिए एक व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना बनाकर स्वीकृतियां जारी करनी चाहिए.



