राजस्थान के इस हिल स्टेशन की नगरपालिका क्यों है इतनी अमीर? जानें कहां से आता है पैसा

Last Updated:October 16, 2026, 07:45 IST
Rajasthan Richest Municipality: राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू पर्यटन के साथ नगरपालिका अपनी होने वाली कमाई के लिए भी चर्चा में रहता है. माउंट आबू को राजस्थान का सबसे अमीर नगरपालिका भी माना जाता है. यहां पर्यटकों की आवाजाही से पालिका के खजाने में करोड़ों रुपये आते हैं. शहर के प्रवेश द्वार पर स्थित टोल नाका इसकी आय का प्रमुख स्रोत है, जहां सामान्य दिनों में भी हर महीने करीब 20 से 25 लाख रुपये की कमाई होती है, जबकि पर्यटन सीजन और लंबे वीकेंड पर यह आंकड़ा बढ़ जाता है. नक्की झील का बोटिंग ठेका भी नगरपालिका के लिए बड़ा राजस्व स्रोत है. कुछ वर्ष पहले झील का तीन साल का ठेका 7.61 करोड़ रुपये में दिया गया था. इसके अलावा होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट, विज्ञापन और पार्किंग से भी आय होती है. 42 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना बजट वाली इस नगरपालिका की स्थापना 1864 में हुई थी.
सिरोही के आबूराज (माउंट आबू) शहर की नगरपालिका राजस्थान की सबसे धनी और सबसे पुरानी नगरपालिका है. करीब 25 हज़ार की आबादी वाली इस नगरपालिका की आय करोड़ों में होती है, क्योंकि ये शहर प्रदेश का एक मात्र हिल स्टेशन भी है. शहर में प्रवेश करते ही पर्यटकों को टोल टैक्स देना होता है, जो नगरपालिका की आय का सबसे बड़ा स्रोत है. इसके अलावा इस शहर की नक्की लेक का बोटिंग ठेका, होटलों और पालिका की संपत्ति से होने वाली आय इस नगरपालिका को सबसे अमीर बनाती है.
इस नगरपालिका के शहर के प्रवेश द्वार पर लगे टोल नाके से पूरे साल में करोड़ों की आय होती है. गत जुलाई माह में ही इस टोल नाके पर 60 लाख की आय पालिका को हुई थी. वहीं गर्मियों और दीपावली सीजन में ये आंकड़ा और भी बढ़ जाता है. आम दिनों या ऑफ-सीजन में भी यह आंकड़ा प्रति माह 20 से 25 लाख रुपये के आसपास बना रहता है, जो इस निकाय की सतत आर्थिक मजबूती को दर्शाता है. हालांकि टोल नाके की कुल आय का कुछ हिस्सा वन विभाग को भी जाता है.
त्योहारों और लंबे वीकेंड्स के दौरान इस टोल नाके पर जो वाहनों की लंबी कतार नजर आती है, उसमें कुछ दिनों में ही 15 लाख तक की आय हो जाती है. वीकेंड्स पर एक दिन में सबसे ज्यादा 6.7 लाख की रिकॉर्ड कमाई दर्ज की जा चुकी है. इस तरह नगरपालिका को सालाना टोल नाके से 5 से 7 करोड़ रुपये की बंपर राशि मिल जाती है. इसी वजह से पालिका का सालाना बजट 42 करोड़ रुपये से भी अधिक का पारित होता है, जो राज्य की कई बड़ी नगर परिषदों के बराबर है.
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वहीं इस नगरपालिका का दूसरा सबसे बड़ा इनकम सोर्स नक्की लेक है. यहां का बोटिंग ठेका करोड़ों में खुलता है. कुछ वर्ष पहले ही इस लेक का 3 साल का ठेका 7.61 करोड़ में खुला था. जिसमें झील में बोटिंग और व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन शामिल होता है. यहां बोटिंग करने के लिए देश विदेश से लाखों पर्यटक आते हैं. नक्की झील से होने वाली करोड़ों की यह सालाना इनकम इस पर्वतीय नगर निकाय को आत्मनिर्भर बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होती है.
टोल टैक्स और बोटिंग के अलावा भी माउंट आबू नगरपालिका के पास कमाई के कई सोर्स हैं. यह शहर पर्यटन हब होने की वजह से यहां सैकड़ों होटलों, रिसॉर्ट्स और रेस्टोरेंट्स से मिलने वाला भारी-भरकम व्यावसायिक लाइसेंस शुल्क और अर्बन डेवलपमेंट टैक्स पालिका के खजाने को भरने का काम करता है. वहीं प्रमुख चौराहों और पार्किंग स्थलों पर बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड्स की ओर से लगाए जाने वाले विज्ञापनों और होर्डिंग्स से भी मोटी कमाई होती है.
सबसे धनी नगरपालिका होने के अलावा ये नगरपालिका सबसे पुरानी नगरपालिका भी है. इसकी स्थापना अंग्रेजों के शासन काल में वर्ष 1864 में हुई थी, क्योंकि 19वीं सदी के मध्य में महामारियों से बचाव और अंग्रेज़ों के पसंदीदा हिल स्टेशन होने के कारण यहां सबसे पहले स्थानीय प्रशासन ने शुरू किया गया था.
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October 16, 2026, 07:45 IST



