राजस्थान में सिर्फ 3 जगह हैं ऐसे शिवलिंग, नवलगढ़ के 96 साल पुराने मंदिर में भी विराजे हैं भोलेनाथ

Last Updated:November 06, 2026, 10:10 IST
Nawalgarh Sphatik Shivling Temple: झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ स्थित श्री रूप स्मारक परिसर में 96 साल पुराना प्राचीन शिवालय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. वर्ष 1930 में निर्मित इस मंदिर में सफेद बिल्लौरी यानी स्फटिक पत्थर का पारदर्शी शिवलिंग स्थापित है. राजस्थान में ऐसे केवल तीन शिवलिंग हैं. मंदिर के गर्भगृह में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के साथ नवलगढ़ शासकों के चित्र और दीवारों पर आकर्षक भित्तिचित्र उकेरे गए हैं. यह शिवालय शेखावाटी की ऐतिहासिक विरासत, कला और धार्मिक महत्व को संजोए हुए है.
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झुंझुनूं: झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ शहर में रेलवे स्टेशन के पास स्थित श्री रूप स्मारक परिसर में एक ऐसा प्राचीन शिवालय स्थित है, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत और अनूठे शिवलिंग के कारण विशेष पहचान रखता है. करीब 96 साल पुराना यह शिवालय क्षेत्र के लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित बिल्लौरी (स्फटिक) पत्थर से बना पारदर्शी शिवलिंग है. सफेद रंग के स्फटिक से निर्मित यह शिवलिंग मंदिर का मुख्य आकर्षण है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
इस ऐतिहासिक शिवालय का निर्माण वर्ष 1930 में करवाया गया था. नवलगढ़ के शासक ठाकुर रूपसिंह के देहांत के बाद उनकी पावन स्मृति में उनके दत्तक पुत्र रावल मदनसिंह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था. उस दौर में निर्मित यह मंदिर आज भी अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व को पूरी तरह संजोए हुए है. वर्तमान समय की बात करें तो श्री रूप स्मारक परिसर में कई वर्षों से श्री रूप राजपूत छात्रावास का संचालन किया जा रहा है, जिससे इस परिसर की चहल-पहल और देखरेख बनी रहती है.
गर्भगृह की सुंदरता और भित्तिचित्रों की झलकमंदिर के गर्भगृह में स्फटिक शिवलिंग के साथ भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और नंदी जी की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. गर्भगृह के ऊपर बनी छतरी भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है. इस छतरी के चारों कोनों में शीशे से जड़ी भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, हनुमानजी और गरुड़ भगवान की प्रतिमाएं स्थापित हैं. इसके अलावा गर्भगृह में नवलगढ़ के पूर्व शासकों के चित्र भी लगाए गए हैं, जो इस मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं. शिवालय के गर्भगृह के चारों ओर बने बरामदे की दीवारें आकर्षक भित्तिचित्रों से सजी हुई हैं. इन भित्तिचित्रों में तत्कालीन शेखावाटी कला और उत्कृष्ट शिल्प की अद्भुत झलक दिखाई देती है. सावन के महीने में मंदिर में रुद्राभिषेक सहित कई विशेष पूजा-अर्चना के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
राजस्थान में केवल तीन स्थानों पर हैं ऐसे स्फटिक शिवलिंगराजपूत छात्रावास के वार्डन धन्नेसिंह शेखावत के अनुसार, पूरे राजस्थान में बिल्लौरी पत्थर से निर्मित ऐसे दुर्लभ शिवलिंग केवल तीन स्थानों पर ही स्थापित हैं.
पहला मंडावा गढ़ का प्रसिद्ध शिवालय.
दूसरा नाथद्वारा का ऐतिहासिक शिवालय.
तीसरा नवलगढ़ के श्री रूप स्मारक परिसर में स्थित यह प्राचीन शिवालय.
यही दुर्लभ विशेषता इस मंदिर को धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से बेहद विशिष्ट बनाती है. इस तरह नवलगढ़ का यह शिवालय केवल एक पूजा-अर्चना का स्थान मात्र नहीं है, बल्कि यह शेखावाटी की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, राजपरिवार की स्मृति और प्राचीन कला का एक अनमोल धरोहर है, जिसे लगभग एक सदी से सहेजकर रखा गया है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
November 06, 2026, 10:10 IST



