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लिक्विड बायोप्सी से शुरुआत में ही हो जाएगी कैंसर की पहचान, चीर-फाड़ की जरूरत नहीं, इलाज में होगी सहूलियत

Last Updated:August 24, 2026, 18:11 IST

Liquid Biopsy in Cancer: कैंसर पर विजय प्राप्त करने की सबसे बड़ी त्रासदी ये है कि कैंसर की पहचान शुरुआती दौर में नहीं हो पाती है. जबकि हकीकत यह है कि सालों पहले से कैंसर शरीर में पनप रहा होता है. जब लक्षण शरीर में दिखने लगते हैं तब ही इसके लिए बायोप्सी जैसी कठिन जांच कराई जाती है. लेकिन लिक्विड बायोप्सी ऐसी जांच साबित हो सकती है जिनमें कैंसर को शुरुआती चरण में पहचाना जा सकता है. लिक्विड बायोप्सी कितना सही और इससे कैंसर के इलाज में क्या फर्क पड़ेगा, इसके बारे में हमने मैक्स अस्पताल में कैंसर डिपार्टमेंट के सीनियर कंस्लटेंट डॉ. रवि शंकर से बात की.लिक्विड बायोप्सी से शुरुआत में ही हो जाएगी कैंसर की पहचान, चीर-फाड़ की जरूरत नZoomलिक्विड बायोप्सी क्या है.

Liquid Biopsy in Cancer: कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी की जाती है. बायोप्सी तब की जाती है जब अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन आदि जांच में ऐसा संदेह होता है कि वहां कैंसर की कोशिकाएं पनप रही है. बायोप्सी के लिए उस अंग तक सूई पहुंचाई जाती है या वहां से कोशिकाओं को खींच कर निकाला जाता है. यदि कैंसर शरीर के एकदम अंदरुनी अंगों में है और वहां सूई नहीं पहुंच सकती तो इसके लिए छोटी सर्जरी तक करनी पड़ती है. इन कठिन जांच से साबित होता है कि किसी को कैंसर है या नहीं. ये सब तब होता है जब बीमारी पूरी तरह से फैल चुकी होती है. लेकिन कुछ ऐसे भी टेस्ट पर प्रयोग चल रहे हैं जिनकी बदौलत कैंसर का शुरुआती दौर में पता लगाया जा सकता है. इन्हीं में से एक है लिक्विड बायोप्सी. आइए इसके बारे में मैक्स अस्पताल में ओरल कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. रवि शंकर से विस्तार से जानते हैं.

क्या है लिक्विड बायोप्सी

मैक्स अस्पताल में कैंसर डिपार्टमेंट के सीनियर कंस्लटेंट डॉ. रवि शंकर ने बताया कि लिक्विड बायोप्सी का मतलब है खून या अन्य तरल पदार्थो में से कैंसर का पता लगाना. यानी किसी व्यक्ति के शरीर से खून या अन्य तरल पदार्थ के सैंपल का विश्लेषण किया जाता है और यह पता लगाया जाता है कि इसमें सर्कुलेटिंग ट्यूमर सेल्स या उसके अवशेष हैं या नहीं. इसमें किसी तरह का चीरा नहीं लगाया जाता है. इसके सैंपल से कैंसर कोशिकाओं के डीएनए का पता लगाया जाता है. परंपरागत बायोप्सी में शरीर से मांस का टुकड़ा सुई या सर्जरी के जरिए निकाला जाता है, जो काफी दर्दनाक और जटिल प्रक्रिया होती है. लिक्विड बायोप्सी में सिर्फ ब्लड या शरीर का अन्य तरल पदार्थ लिया जाता है.

कैसे कैंसर कण का पता चलता है

डॉ. रवि शंकर ने बताया कि जब भी शरीर के किसी हिस्स में कैंसर कोशिकाएं पनपती है तो इन कोशिकाओं में से कुछ मर जाती हैं या इन कोशिकाओं के कण टूटते रहते हैं. ये कण या इनमें से मुक्त हुए डीएन खून में पहुंचकर सर्कुलेशन के साथ इधर से उधर करते रहे हैं. इसे मेडिकल भाषा में सर्कुलेटिंग ट्यूमर सेल्स – ctc या ct DNA भी कहा जाता है. चूंकि ये कण खून में तैरते रहते हैं, इसलिए जब मरीज के शरीर से खून का सैंपल लिया जाता है तो मशीन में इन कणों को पहचान लिया जाता है.

इस टेस्ट का किसे ज्यादा फायदा

डॉ. रवि शंकर ने बताया कि एडवांस लक्विड बायोप्सी टेस्ट उन मरीजों के लिए शानदार है जिनका इलाज चल रहा है या जिनका इलाज पूरा हो चुका है. मसलन किसी को पहले से कैंसर था और उसका इलाज पूरा हो गया है. अधिकांश कैंसर के मरीजों में दोबारा कैंसर होने की आशंका रहती है. इस स्थिति में एडवांस लिक्विड बायोप्सी की मदद से हम उनपर कड़ी नजर रख सकते हैं. कई बार सीटी स्कैन या बायोप्सी तक में दोबारा कैंसर का पता नहीं चलता. इसलिए इलाज दोबारा शुरू नहीं करते. लेकिन अगर लिक्विड बायोप्सी में CTCs आ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि शरीर के अंदर सूक्ष्म स्तर पर कैंसर की कुछ बची हुई कोशिकाएं अभी भी खून में मौजूद हैं, जो भविष्य में कैंसर के दोबारा लौटने का कारण बन सकती हैं. चूंकि खून में सीटीसी की मौजूदगी यह संकेत देती है कि शरीर में माइक्रोस्कोपिक स्तर पर कैंसर कोशिकाएं बची हुई हैं, इसलिए डॉक्टर कीमोथेरेपी के कुछ अतिरिक्त साइकिल या मेंटेनेंस थेरेपी देने का सुझाव देते हैं. इससे कैंसर के आगे बढ़ने का जोखिम क्षीण हो जाता है.

क्या इस टेस्ट को कोई भी करा सकता है

डॉ. रवि शंकर ने बताया कि कैंसर को कंफर्म करने के लिए लिक्विड बायोप्सी फिलहाल सर्वमान्य तरीका नहीं है. यह हमारे प्रोटोकॉल में नहीं है. लेकिन इस पर कई रिसर्च हो रही हैं. नए प्रमाण आ रहे हैं. इन सबमें इसके सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. इसलिए यदि भविष्य में सब कुछ ठीक रहा तो आगे से यह कैंसर को शुरुआती चरण में ही पहचानने का मजबूत आधार बन जाएगा. और यह कैंसर के इलाज में मील का पत्थर साबित हो जाएगा लेकिन सब कुछ आगे की रिसर्च पर निर्भर है. हो सकता है कि ऐसा हो भी जाए लेकिन यह भी हो सकता है कि यह टेस्ट वर्तमान टेस्ट की तरह ही सर्वमान्य न हो पाए.

About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

August 24, 2026, 18:11 IST

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