लिवर को मजबूत और शरीर को डिटॉक्स करता है भूमि आंवला, आयुर्वेद के अनुसार जानिए इसके 5 बड़े फायदे

Last Updated:September 22, 2026, 16:30 IST
बरसात के दिनों में खेतों और खाली मैदानों में उगने वाले जिस पौधे को अक्सर हम बेकार खरपतवार समझकर उखाड़ फेंकते हैं, वह असल में आयुर्वेद का एक छिपा हुआ खजाना है. बात हो रही है ‘भूमि आंवला’ की-एक ऐसा औषधीय पौधा जो लिवर की सेहत सुधारने, पाचन दुरुस्त करने और यहां तक कि हेपेटाइटिस बी जैसी गंभीर स्थिति में भी बेहद गुणकारी माना जाता है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, बलिया की चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, पारंपरिक चिकित्सा में यह पौधा लिवर और पीलिया के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
Bhui Amla Benefits: बारिश के मौसम में खेतों, खाली जमीन और घरों के आसपास उगने वाले कई पौधों को अक्सर खरपतवार समझकर हटा दिया जाता है. इन्हीं में से एक है भूमि आंवला. यह छोटा दिखने वाला पौधा पारंपरिक रूप से आयुर्वेद में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसे पीलिया, पाचन और लिवर से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी माना जाता है. हालांकि, किसी बीमारी के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी ने लोकल 18 की टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधे को ढूंढकर लाया गया है. उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन उसमें भी भूमि आंवला बेहद लाभकारी और गुणकारी है.
बारिश के मौसम में दिखाई देता है आसानी सेभूमि आंवला एक छोटा औषधीय पौधा है, जो बारिश के मौसम में आसानी से दिखाई देता है. इसकी छोटी-छोटी पत्तियों के नीचे गोल दाने जैसे फल लगते हैं, इसी वजह से इसे भूमि आंवला कहा जाता है. गांवों में इसे कई जगह भुई आंवला के नाम से भी जाना जाता है.
लिवर और पाचन तंत्र के लिए लाभआयुर्वेदिक परंपरा में भूमि आंवला का इस्तेमाल लिवर से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है. इसे शरीर में जमा गंदगी को बाहर निकालने और लिवर के सामान्य कामकाज को सहारा देने वाली औषधीय वनस्पति के रूप में बताया जाता है. हालांकि, हेपेटाइटिस, फैटी लिवर या किसी अन्य लिवर रोग में इसे डॉक्टर की दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. भूमि आंवला का पारंपरिक इस्तेमाल पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी किया जाता है. माना जाता है कि इसका सेवन पाचन क्रिया को बेहतर रखने में मदद कर सकता है. गैस, अपच और पेट से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याओं में भी इसका पारंपरिक रूप से प्रयोग मिलता है.
एंटीऑक्सीडेंट गुण और इस्तेमाल का तरीकाभूमि आंवला में कई तरह के प्राकृतिक पादप यौगिक पाए जाते हैं. इनमें एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि वाले तत्व भी बताए गए हैं. यही वजह है कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसे शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने और सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. भूमि आंवला का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरीके से किया जाता है. कुछ लोग इसके पूरे पौधे का काढ़ा बनाकर इस्तेमाल करते हैं, जबकि आयुर्वेदिक चिकित्सा में इससे तैयार औषधियां भी उपलब्ध हैं. इसकी मात्रा और सेवन की अवधि व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और समस्या के अनुसार अलग हो सकती है.
सेवन से पहले बरतें ये सावधानियांभूमि आंवला को देखकर खुद से तोड़कर अधिक मात्रा में सेवन करना सही नहीं है. गर्भवती महिलाएं, बच्चे, लंबे समय से दवा लेने वाले लोग या लिवर और किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोग इसका इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. खासकर पीलिया या हेपेटाइटिस बी जैसी बीमारी में केवल घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय उचित जांच और चिकित्सकीय उपचार जरूरी है. हालांकि, इसके कोई भी साइड इफेक्ट रजिस्टर्ड नहीं हैं.
About the AuthorRahul Goel
Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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Ballia,Uttar Pradesh
First Published :
September 22, 2026, 16:30 IST



