सीकर में बच्चों के इलाज की बड़ी तैयारी, 15 करोड़ में यहां बनेगा 100 बेड का शिशु रोग विभाग

Last Updated:September 18, 2026, 07:32 IST
Health Infrastructure Development: सीकर के कल्याण अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए 100 बेड का डेडीकेटेड शिशु रोग विभाग विकसित किया जाएगा. करीब 15 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस विभाग में जनाना अस्पताल में संचालित शिशु रोग विभाग को शिफ्ट करने की योजना है. इसके साथ जिला मुख्यालय पर अर्ली डिटेक्शन सेंटर भी शुरू किया जाएगा, जहां बच्चों में जन्मजात और विकास संबंधी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान की जाएगी. सेंटर पर बच्चों के शारीरिक विकास, सुनने-बोलने और देखने की क्षमता समेत अन्य जरूरी पहलुओं की जांच की जाएगी. समस्या सामने आने पर बच्चों को संबंधित विशेषज्ञ के पास भेजकर उपचार और थैरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी. इससे सीकर और आसपास के परिवारों को बच्चों के इलाज के लिए जयपुर या दूसरे बड़े शहरों का रुख कम करना पड़ सकता है.
राजस्थान में हर विभाग में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती प्रदान के लिए कार्य जारी है. इसी कड़ी में राजस्थान सरकार ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने की कावायद तेज कर दी है. सीकर के कल्याण अस्पताल में अब बच्चों के इलाज के लिए स्पेशल शिशु रोग विभाग विकसित किया जाएगा. जनाना अस्पताल में संचालित शिशु रोग विभाग को कल्याण अस्पताल के नए भवन में शिफ्ट करने की योजना है. यहां 100 बैड का डेडीकेटेड शिशु रोग विभाग बनाया जाएगा. इससे नवजात और बच्चों को जांच, उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं जिला मुख्यालय पर ही उपलब्ध हो सकेंगी.
नए विभाग के साथ जिला मुख्यालय पर अर्ली डिटेक्शन सेंटर भी शुरू किया जाएगा. इस सेंटर का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात और विकास से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान करना होगा. अधिकारियों के अनुसार बीमारी या विकास संबंधी परेशानी की समय रहते पहचान होने पर बच्चे को आवश्यक उपचार, थैरेपी और विशेषज्ञ की सलाह जल्द उपलब्ध कराई जा सकेगी. इससे उपचार में देरी की संभावना कम होगी.
अर्ली डिटेक्शन सेंटर में बच्चों के विकास से जुड़े कई जरूरी पहलुओं की जांच की जा सकेगी. जन्म के बाद बच्चे की शारीरिक गतिविधियां, विकासात्मक स्थिति, सुनने-बोलने की क्षमता और देखने की क्षमता सहित अन्य जरूरी संकेतों पर ध्यान दिया जाएगा. यदि किसी बच्चे में सामान्य विकास से जुड़ी समस्या या जन्मजात परेशानी के संकेत मिलते हैं तो उसे संबंधित विशेषज्ञ के पास आगे की जांच और उपचार के लिए भेजा जा सकेगा.
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मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल डॉ. अशोक कुमार के अनुसार अर्ली डिटेक्शन सेंटर का मुख्य फोकस बच्चों में विकास संबंधी देरी और जन्मजात या शुरुआती अवस्था में सामने आने वाली समस्याओं की पहचान करना रहेगा. कई बार परिवार को यह पता ही नहीं चल पाता कि बच्चे का विकास उम्र के अनुसार हो रहा है या नहीं. ऐसे में विशेषज्ञों की निगरानी में शुरुआती जांच होने से समस्या को समय पर समझने में मदद मिल सकती है.
वर्तमान में बच्चों में उम्र के अनुसार बोलने, चलने, सुनने या देखने में परेशानी तथा शारीरिक और मानसिक विकास में देरी जैसी समस्याओं की जांच और उपचार के लिए कई परिवारों को जयपुर या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है. दूर के अस्पतालों में जाने से समय और खर्च दोनों बढ़ते हैं. कई मामलों में समस्या की पहचान भी देर से हो पाती है, जिससे उपचार और थैरेपी शुरू करने में देरी हो सकती है.
जनाना अस्पताल में शिशु रोगियों की बढ़ती संख्या के कारण मरीजों और परिजनों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है. कल्याण अस्पताल में 15 करोड़ की लागत से 100 बैड का अलग शिशु रोग विभाग बनने के बाद बच्चों के लिए अधिक व्यवस्थित उपचार व्यवस्था उपलब्ध होगा. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां जेके लोन अस्पताल जयपुर की तर्ज पर बच्चों के इलाज की सुविधाएं विकसित करने का प्रयास किया जाएगा.
जिला मुख्यालय पर डेडीकेटेड शिशु रोग विभाग और अर्ली डिटेक्शन सेंटर शुरू होने से सीकर सहित आसपास के क्षेत्रों के परिवारों को भी फायदा मिल सकता है. नवजात और बच्चों की जांच से लेकर उपचार, विशेषज्ञ की सलाह और जरूरत पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था एक ही चिकित्सा प्रणाली से बेहतर तरीके से संचालित की जा सकेगी. साथ ही सरकारी व्यवस्था में मरीजों को निशुल्क उपचार मिलने से निजी अस्पतालों पर होने वाला बड़ा खर्च भी कम हो सकता है.
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September 18, 2026, 07:32 IST



