सूदासरी में पहली बार ब्रीडिंग सेंटर से खुले आसमान में छोड़े जाएंगे गोडावण, GPS से 24 घंटे होगी निगरानी

Last Updated:October 03, 2026, 09:32 IST
Great Indian Bustard Released in Jaisalmer: राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण को अब कृत्रिम संरक्षण केंद्रों से निकालकर प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा. जैसलमेर के सूदासरी में पहली बार ब्रीडिंग सेंटर में पले गोडावण खुले आसमान में उड़ान भरेंगे. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे. पक्षियों की 24 घंटे निगरानी के लिए उनमें जीपीएस टैगिंग की गई है, जिससे हाईटेंशन लाइनों जैसे खतरों से उन्हें बचाया जा सके. इससे पहले इन गोडावणों को विशेष टनल में प्राकृतिक जीवनशैली का 2-3 महीने तक कड़ा अभ्यास कराया गया है.
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Godawan Conservation: सूदासरी में पहली बार खुले आसमान में उड़ान भरेंगे राज्य पक्षी गोडावण
Jaisalmer: राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) को बचाने की दिशा में एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है. अब गोडावण को बाड़ों और कृत्रिम संरक्षण केंद्रों की चारदीवारी से निकालकर खुले आसमान में आजादी की उड़ान भरने का सुनहरा मौका मिलने जा रहा है. जैसलमेर जिले के सूदासरी में पहली बार ब्रीडिंग सेंटर (प्रजनन केंद्र) में पले-बढ़े गोडावणों को उनके प्राकृतिक पर्यावास (नेचुरल हैबिटेट) में रिलीज किया जाएगा. यह पल न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के वन्यजीव और गोडावण संरक्षण अभियान के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय माना जा रहा है. देश के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव खुद इस महत्वपूर्ण और गौरवशाली अवसर के साक्षी बनेंगे.
वैज्ञानिकों, वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग की टीम की वर्षों की कड़ी मेहनत और अथक प्रयासों के बाद यह सफलता हाथ लगी है. पूरी तरह से स्वस्थ और प्राकृतिक माहौल के अनुकूल पाए गए गोडावण अब खुले प्राकृतिक वातावरण में अपनी नई जिंदगी की शानदार शुरुआत करेंगे. वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि थार के मरुस्थल की शान समझे जाने वाले इस पक्षी को विलुप्त होने से बचाने के लिए लंबे समय से कई प्रयास किए जा रहे थे.
जीपीएस टैगिंग से होगी 24 घंटे निगरानीइस पूरे अभियान की सबसे खास और तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण बात यह है कि खुले पर्यावास में छोड़े जाने वाले इन सभी गोडावणों के साथ आधुनिक जीपीएस (GPS) टैगिंग की जाएगी. इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए वैज्ञानिक और वन विभाग की टीमें 24 घंटे इन पक्षियों की हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजर रख सकेंगी. गोडावण कितनी दूरी तक उड़ान भर रहे हैं, वे कहां-कहां अपना भोजन तलाश रहे हैं और किन इलाकों को वे अपने सुरक्षित ठिकाने के रूप में चुन रहे हैं, इन तमाम अहम गतिविधियों की पल-पल मॉनिटरिंग की जाएगी.
टनल में मिला प्राकृतिक माहौल का प्रशिक्षणब्रीडिंग सेंटर से सीधे खुले आसमान में छोड़ने से पहले इन गोडावणों को एक विशेष प्रकार की ट्रेनिंग भी दी गई है. रिलीज से पहले इन पक्षियों को करीब दो से तीन महीने तक एक खास तौर पर बनाई गई विशेष टनल में रखा गया था, जहां उन्हें प्राकृतिक जीवनशैली का कड़ा अभ्यास कराया गया. यहां उन्होंने खुद से उड़ान भरने, प्राकृतिक वातावरण के साथ तालमेल बिठाने और सबसे जरूरी, अपने लिए खुद भोजन तलाशने का अभ्यास किया. जब वे पूरी तरह से स्वस्थ और प्राकृतिक पर्यावास में रहने के लिए तैयार पाए गए, तब जाकर इन्हें खुले आसमान में छोड़ने का अंतिम फैसला लिया गया है.
हाईटेंशन लाइनों के खतरे से बचावगोडावणों के अस्तित्व के सामने मौजूदा समय में सबसे बड़े खतरों में हाईटेंशन बिजली की लाइनें शामिल हैं, जिनसे टकराकर अक्सर इनकी मौत हो जाती है. ऐसे में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए उनकी उड़ान की दिशा और मूवमेंट पर विशेष नजर रखी जाएगी, ताकि खतरनाक इलाकों की पहचान कर संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके. सूदासरी की धरती रविवार को इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनने जा रही है. यह पहल थार के राज्य पक्षी के अस्तित्व को एक नई उम्मीद और नई उड़ान देने वाला अध्याय साबित होगा.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jaisalmer,Jaisalmer,Rajasthan
First Published :
October 03, 2026, 09:32 IST



