3000 गायों का इलाज, 13 लाख की एंबुलेंस और 25 साल की सेवा, फिर लम्पी पर क्यों सवाल?

Last Updated:September 27, 2026, 08:39 IST
Khairthal: खैरथल में राकेश शर्मा और उनकी 25 लोगों की टीम 24 घंटे गौ सेवा में जुटी है. 13 लाख की एंबुलेंस से अब तक 3 हजार से अधिक घायल गायों का इलाज हो चुका है. गौ सेवकों ने शहर में लम्पी वायरस के लक्षण वाली गायों की बात कहते हुए सरकारी अस्पताल में दवाइयों की भारी कमी का आरोप लगाया है. वहीं, पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीसी यादव का दावा है कि जिले में लम्पी बीमारी समाप्ति की ओर है और अलवर से दवाइयां मंगाई जा रही हैं. सुविधाओं के अभाव के बावजूद ट्रस्ट की टीम लगातार निस्वार्थ सेवा कर रही है.
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Khairthal: खैरथल शहर में गौ सेवा की एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिल रही है. यहां के निवासी राकेश शर्मा पिछले 25 वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के बेसहारा, घायल और बीमार गायों की सेवा में जुटे हैं. सड़कों पर घूमने वाले गोवंश को नया जीवन देने के लिए उन्होंने करीब ढाई साल पहले श्री गोबिंदम गौ शाला ट्रस्ट की स्थापना की थी. इस ट्रस्ट से धीरे-धीरे शहर के करीब 25 व्यापारी और अन्य गौ सेवक जुड़ गए. अब यह पूरी टीम 24 घंटे और सातों दिन घायल गायों के इलाज के लिए तत्पर रहती है.
राकेश शर्मा और उनकी टीम ने गौ सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जन सहयोग से लगभग 13 लाख रुपये की लागत वाली एक अत्याधुनिक एंबुलेंस तैयार करवाई है. जब भी टीम को किसी बीमार या दुर्घटनाग्रस्त गाय की सूचना मिलती है, तो वे तुरंत इस एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचते हैं. प्राथमिक उपचार के बाद गाय को सुरक्षित स्थान या उपचार केंद्र तक लाया जाता है. गंभीर रूप से घायल या टूटी हड्डियों वाली गायों को बेहतर इलाज के लिए श्री गोकुल धाम संस्था, झज्जर भेजा जाता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उनका ऑपरेशन और इलाज करते हैं. संस्था का दावा है कि अब तक यह टीम 3 हजार से अधिक गायों को जीवनदान दे चुकी है.
लम्पी वायरस को लेकर चिंता और आरोपगौ सेवा के इस पुनीत कार्य के बीच खैरथल में लम्पी वायरस को लेकर नई चिंताएं सामने आ रही हैं. गौ सेवकों का कहना है कि शहर में खुले में घूमने वाले कई पशुओं के शरीर पर मोटी गांठे और घाव नजर आ रहे हैं, जो लम्पी बीमारी के साफ लक्षण हैं. पशु चिकित्सालय के लम्पी यार्ड में भी कई गायें भर्ती हैं. श्री गोबिंदम गौ शाला ट्रस्ट के सदस्यों ने सरकारी पशु चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि खैरथल में जिला स्तर का ए श्रेणी अस्पताल होने के बावजूद लम्पी के इलाज के लिए पर्याप्त दवाइयां और पट्टियां तक उपलब्ध नहीं हैं. मजबूरन गौ सेवकों को बाजार से खुद के पैसों से दवा खरीदकर लानी पड़ती है.
पशुपालन विभाग का तर्क: समाप्ति पर है बीमारीइन आरोपों के जवाब में पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीसी यादव ने स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने बताया कि जिले में लम्पी बीमारी करीब एक महीने पहले आई थी, लेकिन अब यह समाप्ति की ओर है. उनके आंकड़ों के अनुसार, कुल 496 पशुओं में लक्षण मिले थे, जिनमें से 487 पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं. यादव ने यह भी स्वीकार किया कि खैरथल-तिजारा जिले में अपना ड्रग डिपो न होने के कारण पुराने अलवर जिले से दवाइयां मंगवानी पड़ती हैं, जिससे सीमित आपूर्ति की समस्या आती है. उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने जानवरों को खुले में न छोड़ें और सर्दी बढ़ने के साथ इसके मामले और कम हो जाएंगे.
प्रशासनिक उदासीनता के बावजूद हौसला बुलंदइस सेवा कार्य में पूरा खर्च जन सहयोग और टीम के सदस्यों के आपसी योगदान से जुटाया जाता है. किसी भी आपात स्थिति में टीम के सदस्य तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और अपनी दिनचर्या छोड़कर गौ सेवा में लग जाते हैं. लम्पी बीमारी के पहले दौर में भी इस संस्था ने उल्लेखनीय कार्य किया था. दवाइयों की किल्लत और प्रशासनिक उदासीनता के बावजूद इन गौ सेवकों का उत्साह कम नहीं हुआ है. वे लगातार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अस्पताल में प्राथमिक उपचार की दवाइयां हमेशा उपलब्ध रहनी चाहिए.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Khairthal,Alwar,Rajasthan
First Published :
September 27, 2026, 08:39 IST



