5 दशक तक मंच पर किया राज, फिर एक फिल्म ने दिलाई देशभर में पहचान, जानते हैं कौन थीं सावित्री श्रीधरन?

नई दिल्ली. मलयालम सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने पर्दे पर भले कम वक्त बिताया, लेकिन अपने अभिनय की ऐसी छाप छोड़ी कि किरदार हमेशा याद रह गया. सावित्री श्रीधरन भी उन्हीं नामों में शामिल थीं. करीब पांच दशक तक उन्होंने रंगमंच पर अभिनय किया और कई प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किए. फिल्मों में आने के बाद एक किरदार ने उन्हें देशभर के दर्शकों तक पहुंचा दिया. उनकी अदाकारी को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला. लेकिन अब इस दिग्गज कलाकार की कहानी का एक भावुक अध्याय खत्म हो गया है. सावित्री श्रीधरन अब इस दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं.
मशहूर एक्ट्रेस और दिग्गज थिएटर आर्टिस्ट सावित्री श्रीधरन का 23 सितंबर को कोझिकोड स्थित उनके आवास पर निधन हो गया. वह 78 साल की थीं. लंबे समय तक रंगमंच से जुड़ी रहीं सावित्री को 2018 की फिल्म ‘सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया’ में जमीला के किरदार के लिए खास पहचान मिली थी.
पांच दशक तक रंगमंच से जुड़ी रहीं
सावित्री श्रीधरन की पहचान सिर्फ फिल्मों से नहीं थी. उन्होंने करीब पांच दशक तक थिएटर में काम किया. उनके रंगमंच के सफर की शुरुआत ‘करुथा वेलिचम’ से हुई थी. इसके बाद वह कई चर्चित नाटकों का हिस्सा बनीं. करीब दो दशक तक उन्होंने अमेचर थिएटर में काम किया और 1984 में केटी मोहम्मद के कालींगा थिएटर के नाटक ‘इथु भूमियानु’ के साथ प्रोफेशनल थिएटर में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने ‘काफिर’, ‘सृष्टि’, ‘दीपस्तंभम महाश्चर्यम’, ‘अचनुम बप्पायुम’, ‘साक्षात्कारम’, ‘कुचेलवृत्तम’ और ‘समन्वयम’ जैसे नाटकों में काम किया. थिएटर में उनके योगदान को कई राज्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.
फिल्मों में देर से मिली बड़ी पहचान
सावित्री ने फिल्मों में कदम जरूर पहले रख दिया था. उन्होंने 1991 में एमटी वासुदेवन नायर की फिल्म ‘कडवु’ से डेब्यू किया था. हालांकि, उनका ज्यादातर ध्यान रंगमंच पर ही रहा. इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक फिल्मों से दूरी बनाए रखी और बाद के सालों में दोबारा बड़े पर्दे पर नजर आईं.
उनके करियर का सबसे यादगार मोड़ ‘सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया’ बना. जकारिया मोहम्मद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने जमीला का किरदार निभाया था. इस भूमिका के लिए उन्हें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कैरेक्टर एक्ट्रेस का सम्मान मिला. साथ ही उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में स्पेशल मेंशन भी मिला.
इसके बाद सावित्री ‘डाकिनी’, ‘मेरा नाम शाजी’, ‘वायरस’, ‘इट्टीमानी: मेड इन चाइना’, ‘पड़ा’ और ‘पप्पन’ जैसी फिल्मों में दिखाई दीं. उनकी आखिरी फिल्म में ‘वयसेथ्रयायी मुप्पथी’ रही.
इंडस्ट्री में शोक
सावित्री के निधन पर ‘सुदानी फ्रॉम नाइजीरिया’ के निर्देशक जकारिया और एक्टर सौबिन शाहिर ने भी सोशल मीडिया पर दुख जताया. उनकी विदाई के साथ मलयालम थिएटर ने एक ऐसी कलाकार को खो दिया, जिसने लंबे समय तक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाए रखी.



