पानी की मांग पर किसानों का बड़ा ऐलान, खाजूवाला से अनूपगढ़ तक चक्काजाम, बाजार-मंडियां बंद

श्रीगंगानगर. सिंचाई पानी की मांग को लेकर बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्र में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ सहित कई इलाकों में किसान आज चक्काजाम कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे. खाजूवाला में राजीव सर्किल पर किसानों की ओर से चक्काजाम प्रस्तावित है. आंदोलन को ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के साथ व्यापारियों और मेडिकल संचालकों का भी समर्थन मिल रहा है. किसानों के समर्थन में खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की मंडियां बंद रखी जाएंगी. मंडियां बंद रहने से बाजारों में भी इसका असर दिखाई दे रहा है और कई स्थानों पर सन्नाटा नजर आ रहा है. मेडिकल जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़े संचालकों ने भी आंदोलन के समर्थन में अपने प्रतिष्ठान बंद रखने का फैसला किया है.
दरअसल, नई मंडी घड़साना में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन पिछले 15 दिनों से लगातार जारी है. किसान रबी की फसल के लिए स्थायी रेगुलेशन की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि सिंचाई पानी की उपलब्धता को लेकर ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे फसलों की बुवाई और सिंचाई का पूरा चक्र प्रभावित न हो. इसी मांग को लेकर किसान लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलन के दौरान किसान संगठनों और प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जिस पर किसान आंदोलन समाप्त करने के लिए सहमत हों.
प्रतिनिधिमंडल से वार्ता में नहीं बन सकी अंतिम सहमति
बुधवार को भी राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल और किसानों के बीच वार्ता हुई. किसानों की ओर से अपनी मांगें प्रतिनिधिमंडल के सामने रखी गईं, लेकिन बातचीत से कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आज चक्काजाम का आह्वान किया. किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा. चक्काजाम के ऐलान के बाद प्रशासन और पुलिस ने भी संबंधित इलाकों में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां की हैं.
हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता को पद से हटाया गया
आंदोलन के बीच सरकार की ओर से सिंचाई विभाग में प्रशासनिक बदलाव भी किया गया है. सरकार ने देर शाम हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को पद से हटा दिया. उनकी जगह अरुण कुमार सिडाना को नया मुख्य अभियंता लगाया गया है. सिंचाई पानी को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच हुए इस प्रशासनिक बदलाव को किसानों की मांगों के संदर्भ में देखा जा रहा है. हालांकि, किसानों ने स्पष्ट किया है कि केवल अधिकारी बदलने से आंदोलन समाप्त नहीं होगा. उनका कहना है कि मूल मांगों पर निर्णय होने के बाद ही आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी.
छह महीने का रेगुलेशन लागू करने की मांग
किसानों की प्रमुख मांगों में अनूपगढ़ शाखा का पानी रिजर्व रखा जाना शामिल है. किसान चाहते हैं कि अनूपगढ़ शाखा के लिए सिंचाई पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. इसके साथ ही चार में से दो ग्रुप के आधार पर छह महीने का रेगुलेशन लागू करने की मांग भी की जा रही है. किसानों का तर्क है कि रेगुलेशन की स्थायी व्यवस्था होने से रबी की फसल के लिए सिंचाई पानी की योजना पहले से तय की जा सकेगी. इसी मांग को लेकर क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से किसान आंदोलन स्थल तक पहुंच रहे हैं.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी किसानों का सवाल
किसानों ने केवल रबी की फसल के सिंचाई पानी का मुद्दा ही नहीं उठाया है, बल्कि खरीफ फसलों से जुड़े नुकसान और राहत का मुद्दा भी आंदोलन में शामिल किया है. किसानों की मांग है कि खरीफ फसलों की विशेष गिरदावरी कराई जाए. इसके आधार पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY का लाभ पात्र किसानों को दिलाया जाए और फसल नुकसान के अनुसार मुआवजा भी दिया जाए. किसानों का कहना है कि फसल उत्पादन पर मौसम और सिंचाई व्यवस्था का सीधा असर पड़ता है, इसलिए नुकसान की स्थिति में गिरदावरी और बीमा संबंधी प्रक्रिया समय पर पूरी की जानी चाहिए.
व्यापारियों ने भी किसानों को दिया अपना समर्थन
आंदोलन का असर अब किसान संगठनों तक सीमित नहीं रहा है. व्यापारियों ने भी किसानों के समर्थन में प्रतिष्ठान बंद रखने का निर्णय लिया है. खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की मंडियों के बंद रहने से कृषि उपज की खरीद-बिक्री और बाजार गतिविधियां प्रभावित होंगी. इसके अलावा मेडिकल संचालकों की ओर से भी आंदोलन के समर्थन में प्रतिष्ठान बंद रखने की बात सामने आई है. इससे आंदोलन को स्थानीय स्तर पर अलग-अलग वर्गों का समर्थन मिलने की तस्वीर सामने आ रही है. आज प्रस्तावित चक्काजाम को देखते हुए प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर हैं. खाजूवाला के राजीव सर्किल सहित उन स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, जहां किसान एकत्र होकर सड़क जाम कर सकते हैं. प्रशासन की कोशिश यातायात व्यवस्था बनाए रखने के साथ किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने की है. दूसरी ओर किसान संगठनों की ओर से मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है.
आज चीफ इंजीनियर से हो सकती है वार्ता
इसी बीच किसानों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के बीच आगे की बातचीत की संभावना भी बनी हुई है. किसानों की आज चीफ इंजीनियर अमरजीत मेहरडा के साथ वार्ता संभव बताई जा रही है. अब इस बातचीत में अनूपगढ़ शाखा के पानी का रिजर्व, छह महीने के रेगुलेशन, रबी की फसल के लिए स्थायी सिंचाई व्यवस्था और खरीफ फसलों की विशेष गिरदावरी समेत अन्य मांगों पर क्या सहमति बनती है, इस पर किसानों और प्रशासन दोनों की नजर है. फिलहाल वार्ता से ठोस समाधान नहीं निकलने की स्थिति में चक्काजाम और आंदोलन के जरिए किसान अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं.



