5 दिन में 5 मिनट भी नहीं आता पानी, 600 रुपए का टैंकर मंगाकर बुझानी पड़ रही प्यास, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

Last Updated:October 05, 2026, 13:27 IST
Alwar Water Crisis: अलवर के मालाखेड़ा क्षेत्र के बड़ेर गांव में पेयजल संकट गहरा गया है. करीब 4 हजार की आबादी नियमित पानी की आपूर्ति नहीं होने से परेशान है. ग्रामीणों का आरोप है कि 5 दिन में 5 मिनट भी पर्याप्त पानी नहीं मिलता, जिसके चलते 600 रुपए का निजी टैंकर मंगाना पड़ रहा है. महिलाओं को पानी के लिए घंटों लाइन लगानी पड़ती है. ग्रामीणों ने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.
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अलवर के मालाखेड़ा क्षेत्र के बड़ेर गांव में पेयजल संकट गहरा गया
अलवर: अलवर जिले के मालाखेड़ा उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मुख्यालय बड़ेर में इन दिनों गंभीर पेयजल संकट गहराता जा रहा है. यहां की लगभग चार हजार की आबादी इन दिनों पानी की एक-एक बूंद के लिए बुरी तरह तरस रही है. भीषण गर्मी और जल संकट के कारण स्थानीय लोगों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है. ग्रामीणों का साफ तौर पर आरोप है कि जलदाय विभाग की लापरवाह कार्यशैली के कारण क्षेत्र में नियमित रूप से जलापूर्ति नहीं हो पा रही है. मजबूरी में लोगों को अपनी जेब ढीली करके निजी स्तर पर छह सौ रुपए का महंगा पानी का टैंकर मंगवाकर अपने घरों और सार्वजनिक टंकियों को भरवाना पड़ रहा है. पानी की इस विकट समस्या से आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
ग्रामीणों के अनुसार गांव की स्थिति यह हो गई है कि पांच दिन बीत जाने के बाद भी बमुश्किल पांच मिनट के लिए भी नियमित पानी नहीं मिल पाता है. हालांकि, स्थिति यह है कि जलदाय विभाग की ओर से गांव के भीतर ही ट्यूबवेल का संचालन किया जा रहा है और पानी की आपूर्ति के लिए उच्च जलाशय यानी टंकी का निर्माण भी कराया गया है. इसके बावजूद विभाग की लापरवाही के कारण उस टंकी में नियमित रूप से पानी नहीं चढ़ पा रहा है. खासकर पहाड़ी क्षेत्र के आसपास और ऊंचाई पर बसे घरों में तो यह संकट और भी ज्यादा विकराल रूप धारण कर चुका है. सामान्य तौर पर जिन परिवारों को रोजाना लगभग सौ लीटर पानी की दैनिक आवश्यकता होती है, उन्हें पर्याप्त पानी तो बहुत दूर की बात है, कई बार बमुश्किल दस लीटर पानी भी नसीब नहीं हो पाता है.
मंदिर के समीप बनी टंकी और निजी टैंकरों का सहारापानी के इस भारी हाहाकार के बीच राहत पाने के लिए ग्रामीणों और समाजसेवियों को खुद ही आगे आना पड़ रहा है. स्थानीय मंदिर के समीप बनी पानी की टंकी में अब समाजसेवियों के सहयोग से छह सौ रुपए का भुगतान कर निजी टैंकर मंगाकर पानी डलवाया जा रहा है. वर्तमान में इसी व्यवस्था के सहारे गांव की छत्तीस बिरादरी के लोग अपनी पीने की बुनियादी जरूरत को पूरा करने के लिए मजबूर हैं.
महिलाओं का संघर्ष और लंबी कतारेंगांव में जल संकट इस हद तक गंभीर हो चुका है कि महिलाओं की दिनचर्या बदल गई है. पानी की एक-एक बाल्टी जुटाने के लिए महिलाओं को सुबह से लेकर शाम तक मंदिर के पास बनी पानी की टंकी के बाहर लंबी-लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. पानी के लिए यह संघर्ष ग्रामीण महिलाओं के जीवन का रोजमर्रा का कड़वा सच बन गया है.
अनदेखी से आक्रोश और चेतावनीग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से इस गंभीर समस्या को झेल रहे हैं, लेकिन बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन और विभाग की तरफ से इसका कोई भी स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है. गीता देवी कोली, गायत्री, सीमा, गीता, शीशपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, शेर सिंह, मदन सिंह, बंसी जाटव, रामसहाय जाटव और ताराचंद सहित तमाम अन्य ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से कड़े शब्दों में जल्द से जल्द नियमित जलापूर्ति बहाल करने की पुरजोर मांग की है.
आंदोलन की राह पर ग्रामीणविभाग की इस कार्यप्रणाली और समस्याओं की अनदेखी से तंग आकर अब ग्रामीणों ने चेतावनी का स्वर अपना लिया है. ग्रामीणों ने साफ रूप से कह दिया है कि यदि जल्द से जल्द गांव की पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और जलापूर्ति नियमित नहीं हुई, तो वे मजबूर होकर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Alwar,Rajasthan
First Published :
October 05, 2026, 13:27 IST



