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हार्ट के मरीज भी रख सकते हैं रोजा, जौनपुर के डॉक्टर ने बताया उपाय

Last Updated:March 04, 2025, 23:59 IST

डॉ. हरेंद्र देव सिंह के अनुसार, कुछ मरीजों के लिए रोज़ा खतरनाक हो सकता है. जिन मरीजों को हाल ही में हार्ट अटैक आया हो, जिन्हें अनियंत्रित ब्लड प्रेशर की समस्या हो और जो…..X
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वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ हरेंद्र देव सिंह 

जौनपुर: रमज़ान का महीना मुस्लिम समुदाय के लिए आत्म-नियंत्रण, इबादत और आत्म-शुद्धि का समय होता है. इस दौरान दुनिया भर में करोड़ों मुस्लिम रोज़ा रखते हैं, जिसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ भी खाने-पीने की मनाही होती है. हालांकि, हृदय रोग से ग्रसित लोगों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है. इस विषय पर वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. हरेंद्र देव सिंह का कहना है कि अगर सही सावधानियां बरती जाएं और डॉक्टर की सलाह ली जाए तो हृदय रोगी भी रोजा रख सकते हैं. अगर लापरवाही बरती गई तो यह उनकी सेहत के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है. डॉ. हरेंद्र देव सिंह के अनुसार, जिन मरीजों को हाल ही में हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, बाईपास सर्जरी या अस्थिर रक्तचाप की समस्या हुई है उन्हें विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए.

रोजा रखने से पहले हृदय रोगियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?डॉ. हरेंद्र देव सिंह ने हृदय रोगियों के लिए उपवास के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि हृदय रोगियों को उपवास से पहले अपनी चिकित्सीय स्थिति का आकलन करवाना चाहिए. जिन मरीजों की स्थिति स्थिर है और जो डॉक्टर के अनुसार सुरक्षित हैं वे रोज़ा रख सकते हैं. जिन्हें हाल ही में हृदय संबंधी समस्या हुई है या जिन्हें दवाएं समय पर लेने की जरूरत होती है, उन्हें रोज़ा रखने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है.

हृदय रोगियों के लिए रोज़ा रखने के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?डॉक्टर से परामर्श लें और दवाओं का सही समय पर सेवन जरूर करें. रोज़ा रखने से पहले हृदय रोगियों को अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. डॉक्टर आपकी बीमारी की गंभीरता और दवाइयों के समय को ध्यान में रखते हुए उपवास रखने की अनुमति देंगे. कई हृदय रोगियों को दिन में तीन बार दवाएं लेनी पड़ती हैं. ऐसे मरीजों को अपने डॉक्टर से परामर्श कर दवाओं का समय बदलवाना चाहिए, ताकि वे सहरी और इफ्तार के समय दवाएं ले सकें. बीटा ब्लॉकर्स या डायरेक्ट एक्टिंग एंटीकोआगुलेंट्स (DAACs) लेने वाले मरीजों को खास सावधानी बरतनी चाहिए.

पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं-संतुलित आहार लेंडिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) हृदय रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है. इसलिए सहरी और इफ्तार के बीच कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं और कैफीन युक्त पेय जैसे चाय, कॉफी, या सोडा से बचें. सहरी और इफ्तार में कम वसा वाला, हाई प्रोटीन और फाइबर युक्त आहार लें. अधिक तला-भुना खाना, ज्यादा नमक या ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थों से परहेज करें. ये सब रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकते हैं.

हल्का व्यायाम, नींद पूरी और लक्षणों पर रखें नजररोजा रखने के दौरान भारी व्यायाम करने से बचें, खासकर धूप में निकलने से परहेज करें. हल्की वॉक या घर पर आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज फायदेमंद हो सकती हैं. रोज़े के दौरान पर्याप्त आराम लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी से ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट प्रभावित हो सकता है. अगर उपवास के दौरान सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, चक्कर आना, कमजोरी, तेज धड़कन या अधिक थकान महसूस हो, तो तुरंत रोज़ा तोड़ दें और डॉक्टर से संपर्क करें.

किन हृदय रोगियों को रोज़ा नहीं रखना चाहिए?डॉ. हरेंद्र देव सिंह के अनुसार, उन मरीजों के लिए रोज़ा खतरनाक हो सकता है जिन मरीजों को हाल ही में हार्ट अटैक आया हो. उन लोगों को भी दिक्कत हो सकती है जिन्हें अनियंत्रित ब्लड प्रेशर की समस्या है जो क्रॉनिक हार्ट फेलियर से पीड़ित हैं या जिनका हाल ही में ऑपरेशन हुआ हो उन्हें रोज़ा नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा, डायबिटीज के साथ हृदय रोगियों को भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक बिना खाना खाए रहने से ब्लड शुगर कम या ज्यादा हो सकता है, जिससे हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

डॉ. हरेंद्र देव सिंह का कहना है कि हृदय रोगियों के लिए रोज़ा रखना संभव है, बशर्ते वे डॉक्टर की सलाह से उचित सावधानी बरतें. उपवास के दौरान सही आहार, पर्याप्त पानी, और दवाओं का सही तरीके से सेवन करने से रोज़ा सुरक्षित रह सकता है. लेकिन अगर किसी मरीज को गंभीर हृदय रोग है तो उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर ही उपवास रखने का निर्णय लेना चाहिए. स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी लापरवाही न करें, क्योंकि आपकी जिंदगी अनमोल है.


Location :

Jaunpur,Uttar Pradesh

First Published :

March 04, 2025, 23:59 IST

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