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NEET में रैंक 197, रोजाना की 7–8 घंटे सेल्फ स्टडी, बनाई ऐसी रणनीति, दादा का सपना हुआ साकार

Last Updated:May 03, 2025, 17:31 IST

NEET Success Story: फैमिली में दादा-पोती के बीच ऐसी बॉन्डिंग हो जाती है कि बच्चे उनके सपने को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत के साथ लग जाते हैं. ऐसी ही कहानी एक लड़की है, जो अपने दादा के सपने को पूरा करने के लिए न…और पढ़ेंNEET में रैंक 197, बनाई ऐसी रणनीति, दादा का सपना हुआ साकार

NEET Success Story: नीट यूजी में रैंक 197 हासिल की हैं.

हाइलाइट्स

NEET में 197वां रैंक हासिल की हैं.रोजाना 7-8 घंटे की सेल्फ स्टडी करती थीं.दादा के डॉक्टर बनने के सपने को किया साकार.

NEET Success Story: परिवार में दादा-पोता या दादा-पोती के बीच एक ऐसी बॉन्डिंग बन जाती है कि उनके न होने के बावजूद उनके सपनों को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत के साथ काम करते हैं और उसे पूरा भी करते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी एक लड़की है, जिनके दादा उन्हें डॉक्टर के रूप में देखना चाहते थे. यही सपना इनके पिता का भी था. उन्होंने नीट यूजी की परीक्षा में 197वां रैंक हासिल की है. इसके साथ उन्होंने 720 में से 700 अंक प्राप्त किए हैं. जिनके बारे हम बात कर रहे हैं, उनका नाम विजयलक्ष्मी (Vijayalakshmi) है.

NEET में हासिल की 197वां रैंकविजयलक्ष्मी झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाली हैं. उन्होंने रांची के जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली से स्कूलिंग की हैं. उन्होंने NEET-2021 की परीक्षा में राज्य में टॉप स्थान हासिल कर परिवार और पूरे राज्य को गौरवान्वित किया. इसके साथ ही वह ऑल इंडिया रैंक 197 प्राप्त की हैं. विजयलक्ष्मी के दादाजी हमेशा उन्हें एक डॉक्टर के रूप में देखना चाहते थे. हालांकि वे आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यही इच्छा विजयलक्ष्मी के लिए प्रेरणा बन गई.

रोजाना करती थी 7–8 घंटे सेल्फ स्टडीNEET यूजी में ऑल इंडिया रैंक 197 हासिल करने वाली विजयलक्ष्मी रोजाना 7–8 घंटे की सेल्फ स्टडी करती थी. वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और छोटे भाई को दिया. उनकी मां प्रभा कुमारी ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया, वहीं उनके पिता विजय कुमार गिरि, जो रेलवे में कार्यरत हैं, कभी खुद डॉक्टर बनना चाहते थे. विजयलक्ष्मी का मानना है कि उनका सपना अब उनकी बेटी ने पूरा किया है.

नीट क्रैक करने की यह थी रणनीतिविजयलक्ष्मी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह झारखंड लौटकर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं. उनका सपना है कि वह एक कार्डियोलॉजिस्ट बनें और दिल से जुड़ी बीमारियों का इलाज करें. वह नीट यूजी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सुझाव देते हैं कि उन्हें एनसीईआरटी की पुस्तकों को गहराई से पढ़ना चाहिए और रेगुलर सेल्फ स्टडी पर ध्यान देना चाहिए.

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