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वो गायक जिन्होंने सूफी गानों को दिलाई पहचान, विरासत में मिला संगीत, हिट फिल्मों में बने सलमान खान की आवाज

Last Updated:July 06, 2026, 04:03 IST

मशहूर प्लेबैक सिंगर शबाब साबरी ने सूफी और क्लासिकल संगीत को अपनी समृद्ध पारिवारिक विरासत से बॉलीवुड में एक नई ऊंचाई दी है. उस्ताद राशिद खान से संगीत की तालीम लेने के बाद शबाब को बॉलीवुड में बड़ा ब्रेक मिला. उन्हें सलमान खान की फिल्म ‘दबंग’ के सुपरहिट गाने ‘हमका पीनी है’ से इंडस्ट्री में बड़ा ब्रेक मिला जिसके बाद उन्होंने भाईजान के लिए कई सुपरहिट गाने गाए. शबाब साबरी अपने करियर को बुलंदियों पर पहुंचाने का श्रेय सलमान खान को ही देते हैं.
वो गायक जिन्होंने सूफी गानों को दिलाई पहचान, विरासत में मिला संगीतZoomशबाब साबरी का आज जन्मदिन है.

नई दिल्ली.  बॉलीवुड में सूफी और क्लासिकल म्यूजिक का तड़का जब भी लगता है, तो गाने सीधे दर्शकों के दिलों में उतर जाते हैं. हिंदी सिनेमा को ऐसे ही कई जादुई गाने देने वाले मशहूर प्लेबैक सिंगर शबाब साबरी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. अपनी बुलंद और मखमली आवाज से लाखों दिलों पर राज करने वाले शबाब साबरी का जन्म 6 जुलाई 1979 को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर सहारनपुर में हुआ था.

शबाब साबरी एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसकी रगों में संगीत बहता है. उनके पिता स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल साबरी और उनके चाचा उस्ताद अफजल साबरी देश के बेहद प्रतिष्ठित और सम्मानित सूफी और कव्वाली गायकों में गिने जाते थे. यह वही घराना है जिसने ‘भर दो झोली मेरी’ जैसी कालजयी और सदाबहार कव्वालियों को दुनिया भर के मंचों पर गाकर सूफी संगीत को एक नया मुकाम दिया था.

पिता से विरासत में मिला संगीत

शबाब साबरी को संगीत पिता और चाचा से विरासत में मिला था. संगीत के माहौल में पले-बढ़े होने के कारण शबाब का झुकाव बचपन से ही गायकी की तरफ था. हालांकि, शुरुआत में उनका परिवार संगीत की दुनिया के संघर्षों और अनिश्चितताओं को देखते हुए उन्हें इस चकाचौंध से दूर रखना चाहता था. लेकिन जब उन्होंने शबाब की अटूट लगन और सुरीली आवाज को देखा, तो उन्होंने शबाब को क्लासिकल संगीत की ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया.

14 साल की उम्र से शुरू किया था करियर

महज 14 साल की उम्र में शबाब साबरी ने रामपुर-सहसवान घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान से संगीत की बारीकियां सीखीं. इस कठिन प्रशिक्षण ने उनकी गायकी को ऐसा निखारा कि आगे चलकर यही उनकी सबसे बड़ी यूएसपी बनी. शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता के साथ देश-विदेश के कई लाइव शोज और कव्वाली कॉन्सर्ट्स में हिस्सा लिया और मंचीय प्रस्तुति का हुनर सीखा.

पिता के निधन के बाद किया मुंबई का रुख

पिता के असमय निधन के बाद शबाब साबरी का परिवार मुंबई आ गया. मुंबई की मायानगरी में शबाब के लिए सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी शास्त्रीय गायकी को फिल्मी गानों के सांचे में ढालना शुरू किया. साल 2010 में उनकी किस्मत ने तब करवट ली, जब मशहूर संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद ने उनकी प्रतिभा को पहचाना. उन्होंने शबाब को सलमान खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दबंग’ में ‘हमका पीनी है’ गाना गाने का मौका दिया. यह गाना रिलीज होते ही हर पार्टी और शादी की शान बन गया और शबाब रातों-रात बॉलीवुड में छा गए.

सलमान खान ने चमकाई किस्मत

शबाब साबरी हमेशा अभिनेता सलमान खान और संगीतकार साजिद-वाजिद को अपने करियर का गॉडफादर मानते हैं और उन्हें इस बड़ी सफलता का श्रेय देते हैं. इसके बाद शबाब ने सलमान खान की ही फिल्म ‘जय हो’ (2014) का बेहद रोमांटिक गाना ‘तेरे नैना मार ही डालेंगे’ और फिल्म ‘वीर’ (2010) का ठुमरी स्टाइल गाना ‘पवन उड़ावे बतिया’ गाकर अपनी वर्सेटैलिटी साबित की.

कई सुपरस्टार्स की बने आवाज

सलमान खान के अलावा शबाब साबरी ने कई और बड़े सितारों के लिए भी सुपरहिट गाने गाए. उन्होंने जॉन अब्राहम की फिल्म ‘वेलकम बैक’ (2015) का मशहूर गाना ‘नस नस में’ गाया, जिसे नसीरुद्दीन शाह और अनिल कपूर जैसे दिग्गज अभिनेताओं पर फिल्माया गया था. इसके साथ ही उन्होंने संगीतकार प्रीतम के साथ ‘दिल मेरा मुफ्त का’ (एजेंट विनोद) और हिमेश रेशमिया के संगीत निर्देशन में ‘जलते दिए’ (प्रेम रतन धन पायो) जैसे रूहानी गानों से लोगों को अपना दीवाना बनाया.

About the AuthorPranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें

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