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गांव-गांव घूमता ‘हर्बल चूर्ण वाला’, करता हैं पशुओं की बीमारियों का देसी इलाज, सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

Last Updated:December 04, 2025, 11:32 IST

Dasua: मुजफ्फरनगर का एक युवा गांव-गांव घूमकर जड़ी-बूटियों से बना हर्बल चूर्ण बेच रहा है. जिसे वह पशुओं की बीमारियों में उपयोगी बताता है. ग्रामीणों में इसे लेकर उत्सुकता बढ़ रही है. जबकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे देसी नुस्खे इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें.

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Dasua: ग्रामीण इलाकों में पशुओं में कब्ज. दस्त. आंखों में पानी आना और चारा कम खाने जैसी समस्याएं आम हैं. अक्सर समय पर इलाज और पशु चिकित्सक की कमी के कारण पशुपालक परेशान रहते हैं. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का नौजवान इन दिनों राजस्थान और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गांव-गांव जाकर जड़ी-बूटियों से बना चूर्ण बेच रहा है. जिसे वह पशुओं की कई बीमारियों में कारगर बताता है. यह देसी पहल ग्रामीण पशुपालकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.

युवक का नाम नौशाद बताया जा रहा है. नौशाद ने अपनी पिकअप गाड़ी को चलता-फिरता हर्बल फार्मेसी बना दिया है. उसकी पिकअप गाड़ी में कई तरह की देसी जड़ी-बूटियां रखी होती हैं. जिनमें सिर बड़ा. त्रिफला. आंवला. केसू. मरोड़ फली. कलकूड. अड़ानी. दिनसदर. नौसादर. समुद्रझाग. बूसलूमा और परफधवा आदि शामिल हैं.

इन जड़ी-बूटियों को वह मौके पर ही मशीन से पीसकर चूर्ण तैयार करता है. उसने अपनी गाड़ी में एक इंजन फिट कर रखा है. जो पिसाई मशीन को चलाता है. यह आत्मनिर्भर तरीका लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है. ग्रामीण उसकी पिकअप के आसपास इकठ्ठा होकर मौके पर ही तैयार चूर्ण खरीदते दिखाई देते हैं.

किस कीमत पर बिक रहा चूर्णयुवक नौशाद के अनुसार. यह चूर्ण लगभग ₹200 से ज्यादा की कीमत पर बेचा जाता है. चूर्ण की मात्रा और जड़ी-बूटियों के मिश्रण के आधार पर दाम तय होता है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह दाम लोगों को स्वीकार्य नजर आ रहा है और उसकी बिक्री भी लगातार बढ़ रही है. ग्रामीण पशुपालक इसे एक किफायती और तुरंत मिलने वाला विकल्प मान रहे हैं.

दावा—कब्ज. दस्त. गैस और आंखों की समस्या में लाभ.नौशाद का कहना है कि—

यह चूर्ण पशुओं की कब्ज में तुरंत राहत देता है.

दस्त रोकने में उपयोगी है.
आंखों में पानी गिरना कम करता है.
भूख न लगना और गैस बनना जैसी दिक्कतें भी कम होती हैं.
यह पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है.

पशुपालक इसे पशु के चारे या गुड़ में मिलाकर आसानी से खिला सकते हैं. जिससे उपचार की प्रक्रिया सरल हो जाती है.

ग्रामीणों में बढ़ रही चर्चा और उत्सुकतानौशाद की इस पहल को लेकर गांवों में उत्सुकता बढ़ी है. कई पशुपालकों का दावा है कि उन्हें इससे कुछ हद तक राहत मिली है. जिसके चलते इसकी मांग बढ़ रही है. वहीं कुछ पशुपालक इसे एक “देसी नुस्खा” कहकर आजमाने की बात कर रहे हैं. यह दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक और देसी उपचारों पर लोगों का विश्वास अभी भी कायम है.

विशेषज्ञों की सलाह—बिना पुष्टि के कोई दवा न खिलाएंहालांकि. पशु चिकित्सकों का कहना है कि. देसी उपचार कुछ स्थितियों में लाभकारी हो सकता है. क्योंकि कई जड़ी-बूटियों में औषधीय गुण होते हैं. लेकिन पशुओं की लगातार गंभीर समस्याओं में पशु चिकित्सक की सलाह जरूरी है. किसी भी अज्ञात या अप्रमाणित दवा को खिलाने से पहले उसकी पुष्टि कर लेना सुरक्षित होता है.

Location :

Dausa,Dausa,Rajasthan

First Published :

December 04, 2025, 11:32 IST

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