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Last Updated:January 04, 2026, 19:01 IST

Agriculture Tips: फसलों की अच्छी पैदावार के लिए सिंचाई का सही समय बेहद जरूरी है. गलत समय पर पानी देने से फसल को नुकसान और उत्पादन में कमी आ सकती है. प्रगतिशील किसानों के अनुसार सुबह जल्दी या शाम के समय सिंचाई करना सबसे बेहतर होता है, जिससे पानी का वाष्पीकरण कम होता है और मिट्टी लंबे समय तक नमी बनाए रखती है. सही सिंचाई समय अपनाकर किसान लागत घटा सकते हैं और बेहतर उत्पादन पा सकते हैं.bhilwara

भीलवाड़ा:  आमतौर पर देखा जाता है कि ठंड के मौसम में फसलों को पानी की आवश्यकता कम मानी जाती है लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. सर्दियों में तापमान कम होने के कारण मिट्टी में नमी अधिक समय तक बनी रहती है, फिर भी फसल की बढ़वार के लिए सिंचाई जरूरी होती है. यदि किसान इस मौसम में सिंचाई को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं, तो फसलों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं. सही समय पर पानी नहीं मिलने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है इसलिए ठंड में भी संतुलित सिंचाई आवश्यक मानी जाती है. लेकिन कई बार लोगों को जानकारी नहीं होती है की फसलों को के समय पानी देना चाहिए और कितना पानी देना चाहिए जिसके वजह से किसानों को नुकसान हो जाता है.

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कृषि विभाग के कृषि अधिकारी का कजोड़ मल गुर्जर ने बताया कि किसानों को एसएमएस के माध्यम से सलाह दी जाती है कि वे फसलों की अवस्था को ध्यान में रखते हुए ही सिंचाई करें. अंकुरण, कल्ले निकलने, फूल आने और दाना बनने की अवस्था में नमी का विशेष महत्व होता है. इन चरणों में पानी की कमी होने पर फसल का विकास रुक सकता है, इसलिए किसानों को चाहिए कि वे मौसम, मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई करें. वैज्ञानिक तरीके से की गई सिंचाई से फसल को नुकसान नहीं होता और पानी की सही मात्रा भी पूरी हो जाती है.

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ठंड के मौसम में जरूरत से ज्यादा सिंचाई करना भी फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. अधिक पानी देने से खेतों में जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे फसल की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. इससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और पीलापन आने लगता है. साथ ही अधिक नमी के कारण फंगल रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है. ऐसे में में किसानों को यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि कम और अधिक दोनों तरह की सिंचाई से बचना जरूरी है.

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रबी मौसम की प्रमुख फसलें जैसे गेहूं, चना, सरसों और जौ के लिए ठंड में समय पर सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण होती है. खासतौर पर पाले की संभावना वाले दिनों में हल्की सिंचाई करना फसलों के लिए लाभकारी माना जाता है. इससे खेत का तापमान संतुलित रहता है और फसल पाले के प्रभाव से बच जाती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पाले से बचाव के लिए रात से पहले हल्की सिंचाई एक कारगर उपाय है. यह तरीका फसल की सुरक्षा के साथ उत्पादन बनाए रखने में भी सहायक होता है.

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एसएमएस एडवाइजरी में किसानों को यह भी सलाह दी जाती है कि सिंचाई का समय सही चुनें. सुबह या दोपहर के समय की गई सिंचाई अधिक लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि इस समय तापमान अनुकूल रहता है. देर शाम या रात में पानी देने से ठंड का प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे फसल को नुकसान होने की संभावना रहती है. इसके अलावा ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाकर किसान कम पानी में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं और जल संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं.

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कृषि विभाग का उद्देश्य एसएमएस के माध्यम से किसानों को जागरूक करना है कि ठंड के मौसम में सिंचाई को लेकर लापरवाही न बरतें. सही समय, सही मात्रा और सही विधि से की गई सिंचाई फसलों के लिए बेहद फायदेमंद होती है. इससे न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि उत्पादन और गुणवत्ता में भी सुधार होता है. सिंचाई से पानी की बचत होती है और किसानों की लागत कम होती है, जिससे अंततः उनकी आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है.

First Published :

January 04, 2026, 19:01 IST

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सुबह या शाम? जानिए किस टाइम सिंचाई करने से बढ़ेगी पैदावार और घटेगी लागत

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