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तेलंगाना के श्याम बने दिव्यांगों के मसीहा | Shyam Telangana Artificial Limbs Success Story

Last Updated:January 10, 2026, 12:41 IST

Telangana: तेलंगाना के निर्मल जिले के रहने वाले श्याम दिव्यांगों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं. कभी दिहाड़ी मजदूरी करने वाले श्याम ने विदेश में कृत्रिम अंग बनाने की विशेष ट्रेनिंग ली और अब वे लागत मूल्य पर गरीबों को हाथ-पैर लगा रहे हैं. वे डब्ल्यूएचओ मानकों के अनुरूप हल्के और मजबूत अंग तैयार करते हैं. अब तक 121 से अधिक दिव्यांगों को नई जिंदगी दे चुके श्याम का लक्ष्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि जरूरतमंदों की सेवा करना है. उनकी इस पहल से कई लोग अब दोबारा खेतों और दफ्तरों में काम करने के सक्षम हो गए हैं.

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Telangana: कहते हैं कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो. तो इंसान अपनी मेहनत से समाज की तस्वीर बदल सकता है. कुछ ऐसी ही मिसाल पेश कर रहे हैं तेलंगाना के निर्मल जिले के रहने वाले श्याम. श्याम आज उन सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन चुके हैं. जिन्होंने किसी हादसे या बीमारी में अपने हाथ या पैर खो दिए थे. उनके द्वारा तैयार किए गए कृत्रिम अंग आज कई परिवारों के अंधेरे जीवन में रोशनी भरने का काम कर रहे हैं.

एक समय था जब श्याम रोटरी और लायंस क्लब में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते थे. वे रोजाना मात्र 300 रुपये कमाकर अपना गुजारा करते थे. लेकिन उनके मन में कुछ बड़ा और सार्थक करने की इच्छा हमेशा प्रबल रही. उन्होंने कृत्रिम अंग (Artificial Limbs) बनाने का हुनर सीखने का फैसला किया और इसे ही अपना जीवन का मिशन बना लिया. आज वे एक स्किल्ड टेक्नीशियन के रूप में पहचाने जाते हैं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग और विशेषज्ञता

श्याम ने अपनी इस कला को और निखारने के लिए तमिलनाडु के एक ट्रस्ट के माध्यम से प्रशिक्षण लिया. इतना ही नहीं. उन्होंने श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की बारीकियां सीखीं. आज वह डब्ल्यूएचओ (WHO) के मानकों के आधार पर अत्यंत हल्के और मजबूत कृत्रिम अंग तैयार कर रहे हैं. उनकी तकनीकी समझ और अनुभव के कारण उनके बनाए अंगों की गुणवत्ता विदेशों में मिलने वाले महंगे विकल्पों के समान है.

सिर्फ लागत मूल्य पर सेवा का संकल्प

बाजार में जहाँ कृत्रिम अंगों की कीमत हजारों और लाखों में होती है. वहीं श्याम केवल अंगों को बनाने में आने वाला वास्तविक खर्च ही लेते हैं. उनका मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं. बल्कि गरीब दिव्यांगों को अपने पैरों पर खड़ा करना है. अब तक वे 121 से अधिक लोगों को कृत्रिम अंग लगाकर उन्हें फिर से चलने-फिरने के काबिल बना चुके हैं. इस नेक काम में उनकी पत्नी भी कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ देती हैं.

सराहना और सामाजिक प्रभाव

श्याम खुद अलग-अलग कैंपों में जाते हैं और दिव्यांगों की जरूरत के हिसाब से नाप लेते हैं. उनके द्वारा लगाए गए अंगों की मदद से आज कई लोग खेतों में काम कर रहे हैं और सम्मान के साथ अपनी आजीविका कमा रहे हैं. स्थानीय प्रशासन और लोग श्याम के इस निस्वार्थ जज्बे की काफी सराहना कर रहे हैं. एक दिहाड़ी मजदूर से एक लाइफ चेंजर बनने तक का उनका यह सफर समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

First Published :

January 10, 2026, 12:41 IST

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दिहाड़ी मजदूर से लाइफ चेंजर तक: पढ़िए श्याम की कहानी जिसने 121 जिंदगियां बदली

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