कैंसर की लड़ाई में DU का बड़ा कदम! इस कॉलेज में हाइटेक लैब तैयार, छात्र भी कर सकेंगे रिसर्च

Last Updated:April 18, 2026, 06:08 IST
Delhi University College Cancer Research Lab: दिल्ली यूनिवर्सिटी के डीआर कॉलेज में एनडीसीआरएल के तहत नैनो आधारित कैंसर रिसर्च और बायो सेफ्टी लैब शुरू होने वाली है. अब यहां पीएचडी छात्रों को भी ट्रेनिंग का मौका मिलेगा, साथ ही नौकरी के अवसर बढ़ेंगे.
डीआर कॉलेज जो कि दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रमुख गर्ल्स कॉलेज है. यहां पर स्थित न्यूरोफार्माकोलॉजी, ड्रग डिलीवरी एंड कैंसर रिसर्च लेबोरेटरी (NDCRL) कैंसर के लिए नैनो-आधारित उपचारों पर भी अब रिसर्च शुरू कर दी गई है. इसके लिए नई लैब बनाई जा चुकी है. इस लैब में बायो सेफ्टी मशीन लाई गई है, जिस पर छात्र-छात्राओं को पूरी ट्रेनिंग दी जा रही है.
इस लैब की खासियत यह होगी कि इस लैब में कैंसर के साथ-साथ ऐसी बीमारियां जो संक्रमित या संक्रमण से जुड़ी हुई होती हैं, उनकी बारीकी से जांच की जाएगी. यहां पर बायो सेफ्टी केबिन के अंदर यह जांच की जाती है और पीएचडी की तैयारी कर रहे खासतौर पर छात्र-छात्राओं को इसमें रिसर्च करने के साथ ही ट्रेनिंग भी मिलेगी. जो भविष्य में उनके लिए नौकरी के अवसर खोल देगी.
इस बायो सेफ्टी मशीन की खासियत यह है कि इसी केबिन में छात्र-छात्राओं को कैंसर समेत विभिन्न बीमारियों की जांच कैसे की जाती है, यह बताया जाएगा. यह मशीन एक तरह की केबिन होती है. इसके अंदर ही सारी जांच होती है. इससे बाहर कोई भी इन्फेक्शन ना निकल पाए. उसकी पूरी व्यवस्था होती है और सबसे खास बात यह है कि इस मशीन पर छात्र-छात्राओं को ट्रेनिंग देने का काम शुरू किया जा चुका है.
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यही नहीं, इस नई रिसर्च लैब के खासियत यह है कि यहां पर जो भी रिसर्च की जाएगी. वह पब्लिश भी होगी और उसे पॉलिसी मेकर्स के पास भी भेजा जाएगा, जिस वजह से छात्र-छात्राओं को सीधे तौर पर पीएचडी करके सरकारी डिपार्टमेंट के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों समेत एम्स जैसे अस्पताल में ट्रेनिंग या इंटर्नशिप करने के साथ ही नौकरी करने की अवसर भी काफी हद तक खुल जाएंगे.
यही नहीं, इस लैब में कई और भी नई मशीन ऐसी हाईटेक लगाई गई हैं, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए किसी भी दूसरे कॉलेज में नहीं है. यह कैंसर की जांच करने वाली पहली लैब है. जो कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के किसी कॉलेज में स्थापित की गई है. इस लैब की वजह से तमाम रिसर्च हो सकेंगी और छात्र-छात्राओं के साथ ही प्रोफेसर्स के लिए भी यह लैब काफी फायदेमंद साबित होगी.
First Published :
April 18, 2026, 06:08 IST



