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पिता ने बर्बाद किया परिवार, मां की किडनी फेल, अनाथ हुए तो जया बच्चन ने बदल दी इस एक्टर की किस्मत

Last Updated:April 19, 2026, 04:02 IST

बचपन से ही मुश्किलों ने इस एक्टर का दामन नहीं छोड़ा. पिता के असफल फैसलों ने घर की नींव हिला दी, वहीं मां की गंभीर बीमारी ने हालात और बिगाड़ दिए. कम उम्र में ही कमाने की जिम्मेदारी उठानी पड़ी और हर दिन एक नई चुनौती बनकर सामने आया. फिर वो दौर भी आया जब माता-पिता का साया सिर से उठ गया और जिंदगी बिल्कुल अकेली लगने लगी. लेकिन इन्हीं अंधेरों के बीच एक रोशनी भी मिली. फिल्म इंडस्ट्री की एक दिग्गज हस्ती जया बच्चन का साथ मिला, जिसने उनकी किस्मत को नई दिशा दी और संघर्षों से जूझते इस चेहरे को पहचान दिला दी.

नई दिल्ली. कभी एक ऐसा वक्त भी था, जब इस एक्टर की जिंदगी पूरी तरह बिखर चुकी थी. पिता के गलत फैसलों ने पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिय तो मां गंभीर बीमारी से जूझती रहीं. हालात इतने खराब थे कि हर हफ्ते इलाज के लिए कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था. छोटी उम्र में ही जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ा और फिर माता-पिता के निधन ने उन्हें पूरी तरह अकेला कर दिया. अकेलेपन और संघर्ष के उस दौर में उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को संभाला और जिंदगी से लड़ते रहे. किस्मत ने भी आखिरकार करवट ली, जब फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े नाम का साथ मिला. उसी एक मौके ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी और संघर्षों से भरी कहानी को सफलता की नई पहचान मिल गई.

‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’ का सर्किट का किरदार हो या ‘गोलमाल’ सीरीज के माधव, कॉमेडी के मामले में अरशद वारसी को टक्कर दे पाना बहुत मुश्किल है. इन दोनों ही किरदारों ने अरशद की जिंदगी बदल दी, लेकिन एक समय ऐसा था, जब अभिनेता ने सब कुछ खो दिया था और उनकी दुनिया पूरी तरीके से बदल गई थी. फोटो साभार-@arshad_warsi/Instagram

19 अप्रैल को मुंबई में जन्मे अरशद वारसी के लिए हिंदी सिनेमा में पैर जमाना आसान नहीं था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे एक्टिंग की दुनिया में कदम रखेंगे, लेकिन कहते हैं कि भाग्य में जहां जाना लिखा होता है, वहां के दरवाजे आपके लिए खुलते ही चले जाते हैं. फोटो साभार-@arshad_warsi/Instagram

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अभिनेता के साथ भी वैसा ही हुआ. माता-पिता की बीमारी और उनके असमय छोड़कर जाने की वजह से अरशद ने छोटी उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. अरशद ने खुद खुलासा करते हुए बताया था कि उनके पिता एक अच्छे बिजनेसमैन नहीं थे और उन्होंने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया था. अभिनेता के पिता ने सारा पैसा बिजनेस में डूबा दिया और बोन कैंसर से जूझने लगे, जबकि मां किडनी की बीमारी से ग्रसित थी. फोटो साभार-@arshad_warsi/Instagram

हर हफ्ते मां का डायलिसिस होता था और घर में सेविंग के नाम पर कुछ नहीं था. उन्होंने कहा था, ‘उस वक्त मैं कोरियोग्राफर था. गाने कोरियोग्राफ और प्ले करता था. मेरी सारी कमाई मां के एक हफ्ते के डायलिसिस पर खर्च हो जाती थी. हर हफ्ते यही प्रक्रिया दोबारा होनी थी. उस वक्त लगा कि क्या जिदंगी है, एक छोटे से घर में जिंदगी बिताना. फोटो साभार-@arshad_warsi/Instagram

माता-पिता के निधन ने अभिनेता को तोड़ दिया था, क्योंकि कोई आस-पास नहीं था, जो मदद कर सके. उसी पल ने अरशद वारसी को एक रात में बड़ा कर दिया था. अरशद वारसी ने बचपन में माता-पिता के साथ गहरा लगाव महसूस नहीं किया था क्योंकि वे बोर्डिंग स्कूल में पढ़े थे. अभिनेता इतना अकेला महसूस करते थे, खुद को चिट्ठियां लिखते थे और अपने दोस्तों से डाक के जरिए पोस्ट कराते थे. फोटो साभार-@arshad_warsi/Instagram

एक पुराने इंटरव्यू में अभिनेता ने बताया था कि मुझे वो लोग समझ नहीं आते, जो कहते हैं कि वे अपने माता-पिता के बिना नहीं रह सकते. कभी-कभी उनके माता-पिता उनकी छुट्टियां भूल जाते थे, जिसकी वजह से उन्हें स्कूल में ही छोड़ दिया जाता था जबकि बाकी बच्चे घर चले जाते थे. वे खुद को चिट्ठियां भी लिखते थे. मैं साल में सिर्फ दो बार घर जाता था. फोटो साभार-@arshad_warsi/Instagram

इतना सब झेलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और जया बच्चन की वजह से फिल्मों में एंट्री ली. अभिनेता की पहली फिल्म थी तेरे मेरे सपने. यह फिल्म अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल बैनर के तले बनी थी, जिसके बाद अभिनेता ‘बेताबी,’ ‘मेरे दो अनमोल रत्न,’ और ‘हीरो हिंदुस्तानी’ जैसी फिल्मों में दिखे, लेकिन सर्किट के किरदार ने सिनेमा में उन्हें जीवनदान दिया. फोटो साभार-@arshad_warsi/Instagram

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April 19, 2026, 04:02 IST

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