वो 2 कालजयी कव्वाली, मोहम्मद रफी-किशोर कुमार की आवाज में हुईं अमर, आज भी गाती है पूरी दुनिया

Last Updated:April 28, 2026, 12:26 IST
Kishore kumar vs Mohammed Rafi Qawwali songs : किशोर कुमार कई मंचों पर यह बात दोहराते थे कि उन्हें ‘सरगम’ यानी ‘सा रे गा, मा…’ का ज्ञान नहीं है. उन्होंने कोई क्लासिकल ट्रेनिंग नहीं ली है. वो सिर्फ ट्यून को पकड़ लेते थे और फिर अपने अंदाज में गाना गाते थे. किशोर दा ‘सरगम’ गाने से भी इनकार कर देते थे. कव्वाली भी कम ही गाते थे. वहीं दूसरी ओर मोहम्मद रफी क्लासिकल सिंगर थे. किशोर दा ने अपने करियर में कुछ कव्वालियों को अपने ही रंग में अनोखे अंदाज में गाया. दिलचस्प बात यह है कि एक समय तो ऐसा भी आया जब एक ही साल में रिलीज दो अलग-अलग फिल्मों में मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने कव्वालियां गाईं. दोनों ही कव्वाली कालजयी साबित हुईं. आज भी पूरी दुनिया इन कव्वालियों को गाती है.
‘अरे द्वारपालो, कन्हैया से कह दो, कि मिलने सुदामा गरीब आ गया है’ भजन आपने भी कहीं ना कहीं जरूर सुना होगा. आप सभी जानते ही होंगे कि यह गाना 1973 की एक फिल्म ‘हंसते जख्म’ की कव्वाली ‘ये माना मेरी जान मोहब्बत सजा है’ की तर्ज पर बनाया गया है. यह इस कव्वाली की पॉप्युलैरिटी की एक बानगी है. दिलचस्प बात यह है कि 1973 में दो ऐसी फिल्में रिलीज हुईं जिनकी दो कव्वालियां कालजयी साबित हुई. दोनों फिल्मों की पहचान बन गईं. एक कव्वाली किशोर कुमार ने गाई थी तो दूसरी में मोहम्मद रफी की आवाज थी. वैसे तो किशोर कुमार कव्वाली कम ही गाते थे, फिर भी उनकी तीन कव्वाली बेहद लोकप्रिय हैं.
किशोर कुमार ने अपने करियर में हिंदी, बंगाली और अन्य भारतीय भाषाओं में 2,600 से अधिक गाने गाए हैं. हिंदी सिनेमा में लगभग 1,500 से अधिक फिल्मी रिकॉर्ड किए हैं जिसमें रोमांटिक और सैड सॉन्ग शामिल हैं. किशोर कुमार के फैंस पूरी दुनिय में हैं. आज भी उनके गानों का क्रेज बरकरार है. किशोर कुमार गाने तो खूब गाते थे लेकिन कव्वाली से परहेज करते थे. उन्होंने अपने पूरे करियर में<br />गिनी-चुनी कव्वालियां गाई हैं. जो भी कव्वाली गाईं, वो कालजयी साबित हुईं. आज भी इन कव्वालियों का क्रेज देखने को मिलता है.
‘दुश्मन’ फिल्म रिलीज होने के एक साल बाद ही 1973 में किशोर दा ने एक और कव्वाली गाई. यह कव्वाली उन्होंने ‘अनोखी अदा’ फिल्म में गाई थी. कव्वाली के बोल थे : ‘हाल क्या है दिलों का ना पूछो सनम.’ इस कालजयी कव्वाली की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी पूरे उत्तर भारत इस कव्वाली की तर्ज पर बने गाने महफिल, गीत-संगीत की महफिल में गाए जाते हैं. इस फेमस कव्वाली को मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था.
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‘अनोखी अदा’ फिल्म में जीतेंद्र-रेखा-विनोद खन्ना लीड रोल में थे. फिल्म का निर्देशन कुंदन कुमार ने किया था. कहानी मुश्ताक जलीली ने लिखी थी. डायलॉग केके शुक्ला ने स्क्रीनप्ले रफी अजमेरी-विश्वनाथ पांडे ने लिखा था. फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म का सदाबहार म्यूजिक ही इस मूवी की पहचान है.
यह इकलौती फिल्म है जिसमें विनोद खन्ना विलेन थे. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी. ‘अनोखी अदा’ नाम से एक फिल्म 1992 में बनाने का प्लान हुआ था जिसमें संजय दत्त-रवीना टंडन थे. यह फिल्म कभी नहीं बन पाई.
1973 में एक और फिल्म आई जिसमें मोहम्मद रफी ने कव्वाली गाई थी. यह कव्वाली भी बहुत मकबूल हुई. मोहम्मद रफी ने इसे ‘हंसते जख्म’ फिल्म के लिए रिकॉर्ड किया था. ‘हंसते जख्म’ फिल्म का म्यूजिक मदन मोहन ने कंपोज किया था. इस फिल्म में मोहम्मद रफी ने एक कव्वाली ‘ये माना मेरी जां, मुहब्बत सजा है’ गाई थी. इस कव्वाली का क्रेज आज तक बरकरार है.
‘हंसते जख्म’ फिल्म का डायरेक्शन-प्रोडक्शन चेतन आनंद ने किया था. चेतन आनंद बॉलीवुड सुपर स्टार देवानंद के बड़े भाई थे. फिल्म में नवीन निश्चल, प्रिया राजवंश और बलराज साहनी लीड रोल में थे. कहा जाता है कि जब नवीन निश्चल ने फिल्म साइन की थी तो उन्हें बताया गया कि मुमताज फिल्म की हीरोइन होंगी. जब नवीन सेट पर पहुंचे तो देखा कि प्रिया राजवंश वहां पर बैठी हुई हैं.
‘हंसते जख्म’ बॉक्स ऑफिस पर मेजर हिट रही. फिल्म का म्यूजिक बैकबोन था. इस फिल्म का रीमेक ‘मिट्टी और सोना’ नाम से 1989 में बनाया गया. यह फिल्म भी हिट रही थी. पाकिस्तान में आरोसा नाम से 1993 में इस फिल्म को बनाया गया. फिल्म गुलशन नंदा के एक उपन्यास पर बेस्ड थी.
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April 28, 2026, 12:26 IST



