Rajasthan

खुल गई हकीकत, कोटा में गर्मी और धुएं के बीच हो रही पढ़ाई; क्लास के बाहर जल रही किताबें!

Last Updated:April 28, 2026, 15:57 IST

Kota School Ground Report: कोटा के रामतलाई राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंखे, ग्रीन नेट, सुरक्षित कमरे और मिड डे मील की कमी, किताबें जलने से धुआं, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल. विद्यालय प्रशासन का कहना है कि मेंटेनेंस का काम चल रहा है, इसलिए अस्थायी रूप से बच्चों को इन कमरों में बैठाया गया है. हालांकि जांच के दौरान कई खाली कमरे भी मिले, जिनका उपयोग नहीं किया जा रहा था.

कोटा. शिक्षा नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले कोटा में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं. हाल ही में किए गए एक रियलिटी चेक में रामतलाई स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की बदहाल तस्वीर सामने आई है, जहां बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है.

स्कूल की कई कक्षाओं में पंखों के सिर्फ हुक लगे हुए हैं, लेकिन पंखे नहीं हैं. भीषण गर्मी में छात्र बिना पंखों के ही बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं. कुछ बच्चों को ऐसे कमरों में बैठाया गया है, जहां खाना बनाया जाता है और गैस सिलेंडर भी रखे हुए हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से बेहद चिंताजनक है.

व्यवस्थाओं पर उठे सवालविद्यालय प्रशासन का कहना है कि मेंटेनेंस का काम चल रहा है, इसलिए अस्थायी रूप से बच्चों को इन कमरों में बैठाया गया है. हालांकि जांच के दौरान कई खाली कमरे भी मिले, जिनका उपयोग नहीं किया जा रहा था. इससे स्कूल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

मिड-डे मील को लेकर भी अनियमितता सामने आई है. एक छात्र के अनुसार तय मेन्यू के मुताबिक भोजन नहीं दिया जा रहा. उदाहरण के तौर पर मंगलवार को दाल-चावल और रोटी की जगह केवल चावल ही परोसा गया.

गर्मी और धुएं के बीच पढ़ाईकई कक्षाओं में धूप और गर्म हवा से बचाव के लिए लगाए जाने वाले ग्रीन नेट भी नहीं हैं. कुछ छात्र जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते नजर आए, जबकि तेज गर्मी और लू जैसी स्थिति में उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है.

सबसे चिंताजनक बात यह रही कि कक्षाओं के पास ही किताबें जलती हुई मिलीं, जिनसे उठता धुआं बच्चों के बीच फैल रहा था. इससे छात्रों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

अब सवाल यह उठता है कि इन छात्रों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है. क्या प्रशासन इस ओर ठोस कदम उठाएगा या फिर यह स्थिति इसी तरह बनी रहेगी.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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First Published :

April 28, 2026, 15:57 IST

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