दूध की राह में अटका बकाया, अजमेर के स्कूलों में सूखी कटोरी, बच्चे पी रहे पाउडर वाला दूध, 6 महीने से सप्लाई बंद

Last Updated:April 29, 2026, 16:31 IST
Rajasthan school milk scheme : राजस्थान की पन्नाधाय बाल गोपाल दूध योजना में बकाया भुगतान के चलते अजमेर में स्कूली बच्चों को पिछले छह महीने से दूध नहीं मिल पा रहा है. करीब 75 करोड़ रुपये के बकाया के कारण सप्लाई बाधित है और बच्चे पाउडर दूध पर निर्भर हैं. राज्यभर में डेयरी का कुल बकाया 470 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिससे योजना की स्थिति सवालों में है.
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Pannadhay Bal Gopal Milk Scheme
जयपुर : राजस्थान सरकार की पन्नाधाय बाल गोपाल दूध योजना, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना है, इन दिनों बकाया भुगतान के कारण संकट में नजर आ रही है. अजमेर जिले में पिछले छह महीनों से स्कूली बच्चों को नियमित रूप से दूध नहीं मिल पा रहा है. इसकी मुख्य वजह अजमेर डेयरी का करीब 75 करोड़ रुपये का बकाया बताया जा रहा है, जिसका भुगतान अब तक नहीं हो सका है.
जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत पहले स्कूलों में लिक्विड दूध की सप्लाई की जाती थी, लेकिन अब बच्चों को पाउडर दूध दिया जा रहा है. अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने बताया कि सरकार ने पिछले करीब डेढ़ साल से भुगतान नहीं किया है, हालांकि बीच-बीच में आंशिक राशि मिली है. उन्होंने बताया कि डेयरी ने सरकार को कई बार भुगतान के लिए रिमाइंडर भेजे हैं, लेकिन अभी तक पूरी राशि का निपटारा नहीं हो सका है.
पाउडर दूध तैयार, आदेश का इंतजारचौधरी के अनुसार, पाउडर दूध की सप्लाई इसलिए की जा रही है क्योंकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है, जबकि लिक्विड दूध जल्दी खराब हो सकता है. उन्होंने बताया कि सरकार साल भर के लिए 1000 से 1200 मीट्रिक टन दूध पाउडर का ऑर्डर देती है, जिसे तीन-तीन महीने के इंस्टॉलमेंट में सप्लाई किया जाता है. फिलहाल अजमेर डेयरी के पास करीब 500 मीट्रिक टन पाउडर दूध तैयार रखा है, जो आदेश मिलते ही सप्लाई के लिए भेजा जा सकता है. वहीं, शिक्षा विभाग का कहना है कि उन्होंने अप्रैल से सितंबर तक की मांग राज्य सरकार को भेज दी है और जैसे ही सप्लाई के आदेश मिलेंगे, स्कूलों में दूध पहुंचना शुरू हो जाएगा.
बकाया में देरी, स्कूलों में पाउडर दूधमुख्य जिला शिक्षा अधिकारी गोविंद नारायण शर्मा ने बताया कि बकाया भुगतान की सटीक जानकारी उनके पास नहीं है, लेकिन भुगतान प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है. स्कूल स्तर पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल मनीष कसाना के अनुसार, फिलहाल बच्चों को पाउडर दूध ही दिया जा रहा है, जिसमें कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को 15 ग्राम और कक्षा 6 से 7 तक के बच्चों को 20 ग्राम दिया जाता है. राज्य के डेयरी एवं पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने स्वीकार किया है कि प्रदेश में कुल 470 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे शिक्षा विभाग से वसूला जाना है. उन्होंने यह भी कहा कि इतने बड़े बकाया के बावजूद दूध की सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं की गई है. वहीं, इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है.
दूध योजना पर सियासत, बच्चों पर असरकांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने सरकार पर आरोप लगाया है कि बच्चों के पोषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी लापरवाही बरती जा रही है. उन्होंने कहा कि फंड की कमी और विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है. कुल मिलाकर, योजना का उद्देश्य भले ही बच्चों को बेहतर पोषण देना हो, लेकिन बकाया भुगतान और प्रशासनिक देरी के कारण इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब देखना होगा कि सरकार इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी निकालती है, ताकि बच्चों को नियमित रूप से पोषण मिल सके.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 29, 2026, 16:31 IST



