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Jaipur Cyber Crime | जयपुर SOG ने 5.30 करोड़ की ठगी का किया खुलासा

Last Updated:May 03, 2026, 09:28 IST

Jaipur Cyber Fraud Case: जयपुर SOG ने 5.30 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 17 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने गैलेक्सी माइनिंग कंपनी के चेयरमैन की फर्जी व्हाट्सएप DP लगाकर अकाउंटेंट को झांसे में लिया और करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लिए. जांच में 200 बैंक खातों और हवाला कनेक्शन का खुलासा हुआ है. यह गिरोह चाय की थड़ियों से अपना नेटवर्क चलाता था और ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने की फिराक में था.

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Jaipur Cyber Fraud Case: चेयरमैन की फर्जी DP लगाकर ठगे 5.30 करोड़, 17 गिरफ्तारZoomजयपुर SOG. 5.30 करोड़ की साइबर ठगी का पर्दाफाश. 17 गिरफ्तार

Jaipur Cyber Crime: राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और साइबर क्राइम शाखा ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है. जिसने देशभर में सक्रिय साइबर अपराधियों के होश उड़ा दिए हैं. पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह इतना शातिर था कि उसने ‘गैलेक्सी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड’ जैसी प्रतिष्ठित कंपनी के साथ 5.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया.

इस ठगी की शुरुआत सोशल इंजीनियरिंग के जरिए हुई. ठगों ने कंपनी के चेयरमैन की पहचान चुराई और उनके नाम व फोटो (DP) का इस्तेमाल कर एक फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया. गिरोह ने कंपनी के अकाउंटेंट दीपेंद्र सिंह को निशाना बनाया. आरोपियों ने चेयरमैन बनकर दीपेंद्र से बातचीत शुरू की और उनका भरोसा जीतने के लिए बिल्कुल पेशेवर अंदाज में मैसेज किए. जब अकाउंटेंट को पूरी तरह विश्वास हो गया, तब आरोपियों ने इमरजेंसी बिजनेस ट्रांजैक्शन का हवाला देते हुए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया. अकाउंटेंट ने इसे चेयरमैन का वास्तविक आदेश मानकर अलग-अलग खातों में 5.30 करोड़ रुपये भेज दिए.

200 खातों का मकड़जाल और हवाला कनेक्शनडीआईजी शांतनु कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह केवल एक साधारण ठगी नहीं थी. बल्कि एक जटिल वित्तीय अपराध था. जांच में सामने आया कि ठगी गई रकम को तुरंत करीब 200 अलग-अलग बैंक खातों में फैला दिया गया. ये खाते अक्सर ग्रामीण इलाकों के गरीब लोगों के होते थे. जिन्हें 5 से 10 हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाए जाते थे. इस पैसे को बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए ठिकाने लगाया जाना था. अंतिम चरण में इसे क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलकर विदेश भेजने की योजना थी.

राजस्थान के 5 जिलों में फैला नेटवर्कपुलिस की जांच में पता चला है कि इस गिरोह की जड़ें राजस्थान के कई जिलों में गहरी जमी थीं. कोटा में आरोपी सैलून और छोटे-मोटे काम की आड़ में लोगों को बहला-फुसलाकर बैंक खाते खुलवाते थे. बांसवाड़ा जिला हवाला और नकदी के लेनदेन का मुख्य केंद्र था. जोधपुर, पाली और बाड़मेर से खातों का प्रबंधन और क्रिप्टो ट्रेडिंग का काम देखा जाता था.

चाय की थड़ी से चलता था ‘क्राइम सिंडिकेट’हैरानी की बात यह है कि करोड़ों की ठगी करने वाले इस गिरोह का कोई आलीशान ऑफिस नहीं था. गिरोह के सदस्य स्थानीय चाय की थड़ियों पर मिलते थे. वहीं बैठकर ठगी की प्लानिंग होती थी. चेकबुक और एटीएम कार्ड का आदान-प्रदान किया जाता था और कमीशन बांटा जाता था. एडिशनल एसपी सुगन सिंह के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के तार मुंबई और दुबई से जुड़े हुए हैं. पुलिस का अनुमान है कि यह गिरोह अब तक 100 से अधिक बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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