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अभागन एक्ट्रेस, जिसने सही पति की मार, फिर हुआ प्यार तो मिला धोखा, जा फंसी ‘दलदल’ में

Last Updated:May 06, 2026, 15:11 IST

एक दौर था जब इस एक्ट्रेस की खूबसूरती और अदाओं के चर्चे हर तरफ थे. पहली ही फिल्म ने उसे स्टार बना दिया, लेकिन असली जिंदगी में उसकी किस्मत बेहद बेरहम निकली. शादीशुदा जिंदगी में मारपीट और तनाव झेलने के बाद उसने रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश की. उसे लगा था कि नया साथी सहारा बनेगा, मगर वही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा साबित हुआ. करियर ढलता गया, काम छिनता गया और हालात इतने खराब हो गए कि कभी आलीशान जिंदगी जीने वाली यह एक्ट्रेस बदहाली में पहुंच गई. चमकते पर्दे की यह कहानी आखिर में दर्द, अकेलेपन और गुमनामी में बदल गई.

नई दिल्ली. 60 के दशक की वो खूबसूरत एक्ट्रेस, जिसने पहली ही फिल्म से लोगों को अपना दीवाना बना दिया था. बड़े-बड़े सितारों के साथ काम किया, शानदार बंगले में रहती थी और एक फिल्म के लिए लाखों रुपये फीस लेती थी. लेकिन चमकती रोशनी के पीछे उसकी जिंदगी दर्द से भरी हुई थी. शादी के बाद उसे पति की मार और अपमान सहना पड़ा. जब रिश्ते टूटे तो उसे लगा कि शायद नया प्यार जिंदगी बदल देगा, मगर वहां भी उसे सिर्फ इस्तेमाल और धोखा मिला. धीरे-धीरे करियर खत्म हुआ, पैसे खत्म हुए और जिंदगी ऐसी दलदल में जा फंसी, जहां से निकलना नामुमकिन हो गया. कभी करोड़ों दिलों पर राज करने वाली यह अभिनेत्री आखिर में इतनी अकेली हो गई कि मौत के बाद भी उसके साथ कोई अपना नहीं था.

बॉलीवुड के सुनहरे दौर की एक ऐसी एक्ट्रेस, जिन्होंने रातोंरात स्टारडम हासिल किया. लेकिन कुछ ही सालों में आर्थिक संकट, घरेलू हिंसा, शोषण और अकेलेपन की जिंदगी जीते हुए मात्र 34 साल की उम्र में दुनिया से चली गईं. उनका नाम था विमलेश कौर वाधवान जो बॉलीवुड में विमी के नाम से पहचानी गईं. बी.आर. चोपड़ा की ब्लॉकबस्टर फिल्म हमराज (1967) से मशहूर हुई विमी की जिंदगी का अंत बेहद दर्दनाक और करुणामय रहा. इसलिए वह बॉलीवुड में अभागन एक्ट्रेस कहलाई.

विमी का जन्म जनवरी 1943 में जालंधर (पंजाब) में एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ था. उन्होंने मुंबई के सोफिया कॉलेज से मनोविज्ञान में ग्रेजुएशन पूरा किया और बिजनेसमैन शिव अग्रवाल से शादी कर ली. विमी पहले से शादीशुदा थीं और दो बच्चों की मां थीं, तभी बॉलीवुड में उन्होंने कदम रखा. 1967 में बी.आर. चोपड़ा के बैनर तले बनी फिल्म ‘हमराज’ में काम करने का मौका मिला. पहली ही फिल्म सुपरहिट रही और विमी रातों-रात स्टार बन गईं.

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1967 में रिलीज हुई यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई. फिल्म में सुनील दत्त और राज कपूर जैसे बड़े सितारे थे, लेकिन नई एक्ट्रेस विमी ने भी लोगों का ध्यान खींच लिया. वह रातोंरात स्टार बन गईं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौर में वह एक फिल्म के लिए करीब 3 लाख रुपये फीस लेने लगी थीं, जो उस समय बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी.

इसके बाद उन्होंने शशि कपूर सहित कई बड़े सितारों के साथ काम किया. लेकिन सफलता के साथ समस्याएं भी शुरू हो गईं. उनके ससुराल वालों ने पति शिव अग्रवाल को संपत्ति से बेदखल कर दिया क्योंकि उन्होंने विमी के फिल्मी करियर का साथ दिया था. अब पूरा परिवार विमी की कमाई पर निर्भर हो गया. विमी का करियर भी ज्यादा लंबा नहीं चला. एक के बाद एक फिल्में फ्लॉप होने लगीं और धीरे-धीरे उन्हें काम मिलना बंद हो गया. आर्थिक हालत बिगड़ती चली गई और उनकी सारी जमा पूंजी खत्म हो गई.

इसी दौरान उनकी निजी जिंदगी भी टूटने लगी. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि शादीशुदा जिंदगी में उन्हें शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. बाद में उनका तलाक हो गया. इसके बाद उन्होंने कोलकाता में टेक्सटाइल बिजनेस शुरू करने की कोशिश की, लेकिन वह भी असफल रहा. वे बेघर हो गईं.

इस दौरान उन्होंने फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर/ब्रोकर जॉली नामक व्यक्ति से प्यार हो गया. दोनों रिलेशनशिप में रहने लगे. विमी जिस को प्यार मान रही थी, उसी शख्स ने उसे दलदल में फंसाने का सारा प्लान तैयार किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉली ने उनका शोषण किया और उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेल दिया. विमी का करियर और इज्जत दोनों बर्बाद कर दी. शारीरिक और मानसिक यातनाओं से त्रस्त विमी शराब की आदी हो गईं. जिससे उनकी जिंदगी पूरी तरह बिखर गईं.

10 साल में ही यह एक्ट्रेस बदहाली के कगार पर पहुंच गई थी. साल 1977 में लीवर से जुड़ी बीमारी (सिरोसिस) के चलते विमी बेहद बीमार हो गईं. भयंकर आर्थिक तंगी के चलते उन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया. 22 अगस्त 1977 की वह तारीख थी जब विमी अकेले दम अस्पताल में तड़पकर रो पड़ीं और दुनिया छोड़ गईं. लेकिन दर्दनाक अंत यहीं नहीं था. उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि अंतिम संस्कार हो सके. शव को किसी तरह ‘ठेले’ पर लाद कर सेंटाक्रूज शमशान घाट पर छोड़ दिया गया.

विमी के दो बच्चे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका बेटा बाद में ओशो का अनुयायी बन गया, जबकि उनकी बेटी की जिंदगी को लेकर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई. ये कहानी उस अभागन हसीना की है, जिसकी एक समय में खूबसूरती और स्टारडम के चर्चे पूरे बॉलीवुड में थे, उसकी जिंदगी का अंत बेहद अकेलेपन और दर्द में हुआ. विमी की कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे दुखद दास्तानों में गिनी जाती है.

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