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भरतपुर गौशाला का चौंकाने वाला सच! मृत गायों की खाल और हड्डियों का खेल कैमरे में कैद, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

Last Updated:May 06, 2026, 14:34 IST

Bharatpur Gaushala News: भरतपुर की नगर निगम संचालित लोहागढ़ गौशाला से सामने आई तस्वीरों ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. न्यूज18 राजस्थान की टीम ने पांच दिनों तक की गई पड़ताल में खुलासा किया कि यहां मृत गायों को काटकर उनकी खाल और हड्डियों को अलग किया जा रहा है. जबकि नियमों के अनुसार मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कर उन्हें दफनाया जाना चाहिए. इसके बावजूद गौशाला में जो दृश्य सामने आए, वे किसी बूचड़खाने से कम नहीं लगे. रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि मृत गायों के अवशेषों का सौदा किया जा रहा है. इस घटना ने पशु संरक्षण व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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मृत गायों की खाल और हड्डियों का खेल कैमरे में कैद, सिस्टम पर उठे सवालZoomBharatpur Lohagarh gaushala controversy

भरतपुर. भरतपुर स्थित नगर निगम द्वारा संचालित लोहागढ़ गौशाला, जिसे गौवंश की सेवा और संरक्षण का केंद्र होना चाहिए था, आज एक ऐसी घिनौनी हकीकत का केंद्र बन गया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. ‘न्यूज़ 18 राजस्थान’ की टीम ने एक स्पेशल ऑपरेशन के तहत यहाँ की उस सच्चाई को कैमरे में कैद किया है.

जिसे देखने के बाद किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह तक कांप जाए. यह गौशाला अब एक सेवा केंद्र नहीं, बल्कि किसी बूचड़खाने (कसाईखाने) की तरह काम करती नजर आ रही है.

5 दिनों की कड़ी निगरानी‘न्यूज़ 18 राजस्थान’ की टीम ने इस गौशाला में चल रही संदिग्ध गतिविधियों को सामने लाने के लिए लगातार 5 दिनों तक कड़ी निगरानी रखी. इस दौरान जो तस्वीरें कैमरे में कैद हुईं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं. गौशाला के अंदर मृत गायों को सम्मानपूर्वक दफनाने के बजाय, उन्हें बेरहमी से काटकर उनके शरीर के अंगों को अलग किया जा रहा था. मिली रिपोर्ट के अनुसार, वहां मृत गायों की खाल उतारी जा रही थी और हड्डियों को शरीर से अलग करके ढेर लगाया जा रहा था. गौवंश के प्रति संवेदनशीलता का दावा करने वाले इस स्थान पर मृत जानवरों के अंगों का ऐसा ‘सौदा’ किया जा रहा है, जो किसी भी अच्छे समाज के लिए बहुत शर्मनाक है.

नियमों की धज्जियांसरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी गौशाला में यदि गौवंश की मृत्यु होती है, तो सबसे पहले उसका पोस्टमार्टम कराया जाना अनिवार्य है. इसके बाद, नियमों का सख्ती से पालन करते हुए शव को सम्मानपूर्वक दफन किया जाना चाहिए. लेकिन, लोहागढ़ गौशाला में इन सभी स्थापित नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है. यहां मृत गायों के शरीर के साथ जो बर्ताव किया जा रहा है, वह साफ दिखाता है कि गौसेवा की आड़ में यहां खाल और हड्डियों का एक अवैध व्यापार चल रहा है.

सिस्टम पर उठ रहे सवालयह घटना केवल एक गौशाला का मामला नहीं है, बल्कि नगर निगम के पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली और उनकी नैतिकता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है. नगर निगम द्वारा संचालित इस गौशाला में अगर ऐसा खौफनाक कृत्य इतने बड़े स्तर पर चल रहा है, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या यह सब प्रशासनिक मिली भगत के बिना संभव है? मृत गायों की खाल और हड्डियों का यह काला बाजार किसकी जेबें भर रहा है, यह एक गहन जांच का विषय है. इस खुलासे ने न केवल स्थानीय प्रशासन की विफलता को उजागर किया है, बल्कि गौसेवा के नाम पर हो रहे इस ‘व्यापार’ ने पूरे सिस्टम को बेनकाब कर दिया है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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