कहीं आप भी तो नहीं पी रहे थे ये ‘जहरीला’ दूध… 2015 में पकड़ाया था ये बड़ा गिरोह, अब हुआ जेल!

Last Updated:May 06, 2026, 21:13 IST
Dholpur Me Nakali Doodh Giroh: धौलपुर में नकली दूध गिरोह के 9 आरोपियों को कोर्ट ने दोषी मानकर 10-10 साल की सजा और 5-5 लाख जुर्माना दिया, फॉर्मोलिन व डिटर्जेंट से दूध जैसा मिश्रण बनता था. यह पूरा मामला साल 2015 का बताया जा रहा है, जब अजीत ढाबे के पीछे एक जगह पर छापेमारी की गई थी. उसी दौरान इस गिरोह का खुलासा हुआ था. जांच में सामने आया कि ये लोग दूध नहीं, बल्कि एक खतरनाक मिश्रण तैयार कर रहे थे.
धौलपुर में नकली दूध बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़
धौलपुर. धौलपुर से आई यह खबर मिलावट के उस काले सच को सामने लाती है, जिससे लोग रोज अनजान में जूझते रहते हैं. मामला नकली दूध बनाने वाले एक गिरोह से जुड़ा है, जिस पर अब अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है. लंबे समय से चल रहे इस केस में 9 आरोपियों को दोषी मानते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है. इसके साथ ही हर आरोपी पर 5-5 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद इलाके में इसकी काफी चर्चा है.
यह पूरा मामला साल 2015 का बताया जा रहा है, जब अजीत ढाबे के पीछे एक जगह पर छापेमारी की गई थी. उसी दौरान इस गिरोह का खुलासा हुआ था. जांच में सामने आया कि ये लोग दूध नहीं, बल्कि एक खतरनाक मिश्रण तैयार कर रहे थे. इसमें केमिकल फॉर्मोलिन और डिटर्जेंट जैसे पदार्थ मिलाकर नकली दूध बनाया जाता था, जिसे बाद में बाजार में सप्लाई किया जाता था. यानी जो चीज लोग रोज पीते हैं, वही उनके लिए जहर बन रही थी.
छापेमारी में खुला खेल, केमिकल से बन रहा था ‘दूध’छापेमारी के दौरान जो चीजें मिलीं, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया था. मौके पर ऐसे केमिकल बरामद हुए, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर खाने-पीने की चीजों में नहीं किया जाता. फॉर्मोलिन, जो एक तरह का केमिकल है, और डिटर्जेंट मिलाकर दूध जैसा दिखने वाला तरल तैयार किया जा रहा था. इस मिश्रण को असली दूध की तरह बेच दिया जाता था.
इसका असर कितना खतरनाक हो सकता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये चीज सीधे लोगों के शरीर में जा रही थी. छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई इस नकली दूध का शिकार बन सकता था. यही वजह रही कि अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर माना.
अदालत का सख्त रुख, मिलावटखोरों के लिए चेतावनीकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि यह सिर्फ एक धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे मानव स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. इसलिए सजा भी उसी हिसाब से दी गई है. 10 साल की सजा और लाखों का जुर्माना, दोनों मिलाकर यह फैसला एक बड़ा संदेश देता है.
इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि मिलावट करने वालों के बीच डर का माहौल बनेगा. आम लोगों के लिए भी यह एक राहत की बात है कि ऐसे मामलों में अब सख्ती दिख रही है. हालांकि सवाल अभी भी वही है कि बाजार में मिलने वाली चीजों की पूरी तरह जांच कैसे हो, ताकि कोई भी इस तरह की मिलावट से बच सके.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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