राजस्थान के मेले-त्योहार अब होंगे हाईटेक और ग्लैमरस, 5 करोड़ के प्लान से बदलेगी तस्वीर, रखा गया है ये शर्त

Last Updated:May 07, 2026, 10:41 IST
Rajasthan Tourism Department: राजस्थान पर्यटन विभाग प्रदेश के पारंपरिक मेलों और उत्सवों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने की तैयारी में जुट गया है. इसके लिए विभाग ने करीब 5 करोड़ रुपए की ई-बिड जारी की है, ताकि प्रोफेशनल इवेंट एजेंसियों के जरिए आयोजनों को आधुनिक और हाईटेक अंदाज में प्रस्तुत किया जा सके. कुंभलगढ़ महोत्सव, डेजर्ट फेस्टिवल, पुष्कर मेला और ब्रज होली जैसे बड़े आयोजनों को नई थीम और ग्लैमर के साथ आयोजित करने की योजना है. विभाग का मानना है कि इससे पर्यटन, स्थानीय कलाकारों और हस्तशिल्प उद्योग को बड़ा फायदा मिलेगा.
पर्यटन विभाग का मानना है कि राजस्थान के मेले और उत्सव दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं, लेकिन उन्हें आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने की जरूरत है. इसी सोच के साथ अब आयोजनों को केवल परंपरागत रूप में नहीं बल्कि ब्रांडिंग और प्रोफेशनल मैनेजमेंट के साथ आयोजित किया जाएगा. विभाग चाहता है कि राजस्थान के सांस्कृतिक आयोजन राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन कैलेंडर में भी खास पहचान बना सके.
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना सफल रहती है तो राजस्थान के पारंपरिक मेले और त्योहार वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना सकते हैं. अब तक इन आयोजनों को लोक संस्कृति का प्रतीक माना जाता था, लेकिन आने वाले समय में ये आधुनिक इवेंट मैनेजमेंट और सांस्कृतिक भव्यता का बेहतरीन उदाहरण भी बन सकते हैं. विभाग की इस पहल से राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को नया मंच मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
राजस्थान के मेलों और त्योहारों की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है. आने वाले समय में प्रदेश के पारंपरिक आयोजन सिर्फ लोकगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनमें इंटरनेशनल इवेंट्स जैसा ग्लैमर और हाईटेक अंदाज भी देखने को मिलेगा. पर्यटन विभाग ने प्रदेश की लोक संस्कृति को नई पहचान देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत विभाग ने आगामी एक साल के आयोजनों के लिए करीब 5 करोड़ रुपए की ई-बिड जारी की है, ताकि बड़े स्तर की प्रोफेशनल इवेंट एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जा सके.
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पर्यटन विभाग का मानना है कि इस बदलाव से राजस्थान की लोक संस्कृति को नई पहचान मिलेगी. विदेशी पर्यटक जहां पारंपरिक संस्कृति देखने आते हैं, वहीं अब उन्हें आधुनिक तकनीक और शानदार प्रस्तुतियों का अनुभव भी मिलेगा. इससे राज्य के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को भी फायदा होगा. विभाग को उम्मीद है कि बड़े स्तर पर ब्रांडिंग होने से प्रदेश में पर्यटकों की संख्या और पर्यटन से होने वाली आय दोनों में इजाफा होगा.
इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के कई बड़े और चर्चित आयोजनों को शामिल किया गया है. इनमें राजसमंद का कुंभलगढ़ महोत्सव, जोधपुर का मारवाड़ उत्सव, जैसलमेर का डेजर्ट फेस्टिवल, भरतपुर की ब्रज होली, अजमेर का पुष्कर मेला और जयपुर का 300वां स्थापना दिवस समारोह प्रमुख हैं. इन आयोजनों को नए अंदाज में पेश करने की तैयारी की जा रही है ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को यादगार अनुभव मिल सके.
इस बार एजेंसियों के चयन के लिए नियम भी काफी सख्त रखे गए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल वही कंपनियां आवेदन कर सकेंगी, जिनका पिछले तीन साल का औसत टर्नओवर कम से कम 2 करोड़ रुपए रहा हो. आवेदन की अंतिम तारीख 26 मई तय की गई है. इसके अलावा उन एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें नेशनल या इंटरनेशनल लेवल के बड़े इवेंट आयोजित करने का अनुभव हो. विभाग का उद्देश्य केवल सजावट करवाना नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था को एक प्रोफेशनल इवेंट की तरह तैयार करना है.
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