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Kota Prasuta Death Case | 24 Medicines Banned After Deaths

Last Updated:May 10, 2026, 10:14 IST

Kota Hospital Maternity Death News: कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के बाद राजस्थान सरकार ने 24 दवाओं और मेडिकल आइटम्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के निर्देश पर अस्पताल से सैंपल लेकर जयपुर और कोलकाता की लैब में भेजे गए हैं. रोक लगाई गई दवाओं में अमिकासिन, सेफ्ट्रियाजोन इंजेक्शन और सिरिंज जैसे जरूरी सामान शामिल हैं. सरकार ने वैकल्पिक दवाओं की खरीद के निर्देश जारी किए हैं और अब सभी को लैब रिपोर्ट का इंतजार है ताकि मौतों के असली कारणों का खुलासा हो सके.

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Kota Prasuta Case: प्रसूता मौत मामले में 24 दवाओं और मेडिकल आइटम्स पर रोकZoomKota Maternity Death Case Update: प्रसूता मौत मामले में 24 दवाओं और मेडिकल आइटम्स पर रोक, राजस्थान सरकार का बड़ा एक्शन

कोटा: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और बिगड़ती तबीयत के मामले में राजस्थान सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है. राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल में इस्तेमाल हो रही 24 प्रकार की दवाओं और मेडिकल आइटम्स के प्रयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. चिकित्सा विभाग के इस बड़े फैसले के बाद पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है. ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है ताकि जब तक दवाओं की गुणवत्ता स्पष्ट न हो जाए, तब तक किसी अन्य मरीज की जान जोखिम में न डाली जाए.

जानकारी के अनुसार, जिन 24 दवाओं और आइटम्स पर रोक लगाई गई है, उनमें राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) द्वारा सप्लाई की गई 15 दवाएं और लोकल स्तर पर खरीदी गई 9 दवाएं शामिल हैं. ड्रग कंट्रोलर की टीम ने अस्पताल के पोस्ट-ऑपरेटिव गायनी वार्ड और ड्रग स्टोर से इन सभी दवाओं के सैंपल लिए हैं. इन नमूनों को गहन जांच के लिए जयपुर और कोलकाता की लैब में भेजा गया है. जांच रिपोर्ट आने तक इन विशिष्ट बैच की दवाओं का इस्तेमाल किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं किया जा सकेगा.

इन प्रमुख दवाओं पर लगी रोकजांच के दायरे में आई दवाओं में मुख्य रूप से वे शामिल हैं जो ऑपरेशन और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर में अनिवार्य रूप से इस्तेमाल होती हैं. इनमें अमिकासिन, ट्रानेक्सेमिक एसिड, फ्यूरोसेमाइड, डेक्सट्रोज 5% (D-5), मेट्रोनिडाजोल, रिंगर लैक्टेट और सेफ्ट्रियाजोन जैसे इंजेक्शन शामिल हैं. इसके अलावा, इलाज में उपयोग होने वाली 2 एमएल डिस्पोजेबल सिरिंज और स्टेरिलाइफ इन्फ्यूजन सेट को भी असुरक्षित मानते हुए फिलहाल रोक दिया गया है.

वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देशदवाओं पर रोक लगने के बाद मरीजों के इलाज में कोई बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने वैकल्पिक इंतजामों के निर्देश दिए हैं. अस्पतालों को कहा गया है कि वे इन दवाओं के स्थान पर सुरक्षित बैच की या अन्य कंपनियों की वैकल्पिक दवाओं की लोकल खरीद करें. फिलहाल सभी की नजरें लैब से आने वाली ड्रग जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि इसी रिपोर्ट से यह साफ होगा कि क्या प्रसूताओं की मौत की वजह घटिया गुणवत्ता वाली दवाएं थीं या कोई अन्य चिकित्सकीय लापरवाही.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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