अब बैंक खाता फ्रीज होने पर नहीं काटने पड़ेंगे बैंकों के चक्कर! घर बैठे ऑनलाइन होगा समाधान, जानें पूरा प्रोसेस

Last Updated:July 10, 2026, 14:33 IST
Bank Account Freeze: अगर किसी कारण से आपका बैंक खाता फ्रीज हो जाता है, तो अब आपको बैंक और सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नई डिजिटल व्यवस्था के तहत कई मामलों में शिकायत और आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर घर बैठे समाधान की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. खासकर साइबर फ्रॉड या संदिग्ध लेनदेन से जुड़े मामलों में शिकायत दर्ज करने, आवेदन की स्थिति जानने और संबंधित एजेंसियों से संपर्क करने की सुविधा पहले से अधिक आसान बनाई जा रही है. इससे लोगों का समय बचेगा और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी. हालांकि, कुछ मामलों में बैंक या जांच एजेंसी की ओर से अतिरिक्त दस्तावेज या व्यक्तिगत सत्यापन की आवश्यकता पड़ सकती है. इसलिए खाताधारकों को अपने बैंक और संबंधित प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करना चाहिए.
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जयपुर। साइबर ठगी और बैंक खाता फ्रीज होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं ऐसे में अब इन मामलों में राहत मिलती नजर आ रही है. दरअसल साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच आम लोगों को बड़ी राहत देने वाली नई व्यवस्था शुरू की गई है. अब अगर किसी व्यक्ति का बैंक खाता साइबर जांच के दौरान गलती से फ्रीज हो जाता है, तो उसे पुलिस थानों और बैंकों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. भारतीय साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के तहत दो नए मॉड्यूल शुरू किए हैं, जिनकी मदद से बैंक खाते अनफ्रीज कराने और ठगी गई रकम वापस पाने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी.
साइबर एक्सपर्ट अंकुर चंद्रकांत ने बताया कि साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान कई बार ठगों से जुड़े ट्रांजेक्शन की चेन में निर्दोष लोगों के खाते भी फ्रीज हो जाते हैं. ऐसे में आम नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. कई लोगों के जरूरी लेन-देन रुक जाते हैं और महीनों तक खाते चालू नहीं हो पाते. अब इस समस्या को कम करने के लिए जीआरएम यानी शिकायत निवारण मॉड्यूल शुरू किया गया है.
फ्रीज खाते को कैसे करें अनफ्रीज साइबर एक्सपर्ट अंकुर चंद्रकांत ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति का बैंक खाता डेबिट फ्रीज या होल्ड हो गया है, तो सबसे पहले उसे अपने बैंक में ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना होगा. इसके बाद बैंक अधिकारी खाताधारक की केवाईसी और ट्रांजेक्शन की जांच करेंगे. यदि प्राथमिक जांच में मामला सही पाया जाता है, तो बैंक खुद जीआरएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करेगा. शिकायत दर्ज होते ही एक यूनिक आईडी जनरेट होगी, जिससे पूरे मामले की ऑनलाइन ट्रैकिंग की जा सकेगी. इसके बाद पुलिस का जांच अधिकारी ट्रांजेक्शन ट्रेल की जांच करेगा. जरूरत पड़ने पर खाताधारक और बैंक अधिकारी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात भी की जाएगी. अगर जांच में खाताधारक निर्दोष पाया जाता है, तो अधिकारी तुरंत खाता अनफ्रीज करने का आदेश जारी कर देगा. इससे लोगों को थाने और साइबर सेल के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलेगी.
मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल शुरू किया गयासिर्फ खाता अनफ्रीज ही नहीं, बल्कि साइबर ठगी का पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया भी अब पहले से तेज होगी. इसके लिए एमआरएम यानी मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल शुरू किया गया है. पहले ठगी की रकम होल्ड होने के बावजूद पीड़ित को पैसा वापस मिलने में लंबा समय लग जाता था, लेकिन अब बैंक और जांच एजेंसियां सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ी रहेंगी. नई व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई व्यक्ति 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करेगा, ठगी की रकम को तुरंत ट्रैक कर संबंधित खातों में होल्ड किया जाएगा. जांच पूरी होने और असली पीड़ित की पहचान पुख्ता होने के बाद कोर्ट या सक्षम अधिकारी की मंजूरी मिलते ही पैसा सीधे पीड़ित के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से साइबर मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को जल्दी राहत मिल सकेगी. साथ ही निर्दोष खाताधारकों को बेवजह परेशान होने से भी बचाया जा सकेगा.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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