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कहां गोल्ड सबसे महंगा, कहां सस्ता और किस देश में सोना दिखाना बुरा माना जाता है

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कहां गोल्ड सबसे महंगा, कहां सस्ता और किस देश में सोना दिखाना बुरा माना जाता है

Last Updated:May 13, 2026, 15:26 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है. इसके बाद केंद्र सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी भी बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी. इसके बाद भारत में सोने की कीमतें दुनिया में सबसे ज्यादा हो गई हैं. यानि भारत में गोल्ड दुनिया में सबसे महंगा है. क्या आपको मालूम है कि किस देश में सोना सबसे ज्यादा महंगा है और कहां सबसे सस्ता. ऐसे देश कौन से हैं, जहां लोग गोल्ड के ज्वैलरी पहनना पसंद नहीं करते.

संयुक्त अरब अमीरात में सोना सबसे सस्ता मिलता है. यहां सोने पर कोई वैट या आयात शुल्क नहीं लगता, जिससे कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे कम रहती हैं. इसके अलावा हांगकांग, स्विट्जरलैंड और सिंगापुर भी सस्ते सोने के लिए जाने जाते हैं. वैसे कहना चाहिए कि दुबई और हांगकांग में सोना सबसे सस्ता मिलता है. ( ai image)

भारत और चीन जैसे देशों में सोना सबसे महंगा बिकता है. इसका मुख्य कारण भारी आयात शुल्क, स्थानीय कर यानि जीएसटी और उच्च मांग है. दोनों ही देश अपने देश में सोने की जबरदस्त मांग को पूरा करने के लिए अंतराष्ट्रीय बाजार से सबसे ज्यादा गोल्ड खरीदते हैं. 13 मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 24कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,54,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है. (Nws18 AI Image)

भारत में सोने पर सबसे ज्यादा ड्यूटी लगती है. 13 मई 2026 को भारत सरकार ने सोने पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 15फीसदी कर दिया है. इससे पहले यह 6% थी. सोने की खरीद पर 3% जीएसटी भी लगता है, जिससे कुल टैक्स बोझ काफी अधिक हो जाता है. केवल यही नहीं इस पर मेकिंग चार्ज भी 10 फीसदी से लेकर 25 फीसदी तक लगता है. ( ai image)

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हांगकांग और दुबई में गोल्ड पर सेल्स टैक्स और वैट दोनों शून्य हैं. दुबई का गोल्ड सॉक सरकार द्वारा रेगुलेटेड है. इसके भाव इंटरनेशनल स्पॉट रेट के बेहद करीब होते हैं. स्विट्जरलैंड और सिंगापुर भी इनवेस्टमेंट गोल्ड पर पर कोई टैक्स नहीं लेते. इन्वेस्टमेंट गोल्ड का मतलब सोने के ऐसे फिजिकल या डिजिटल रूप से है, जिसे केवल मुनाफा कमाने या धन संचय के लिए खरीदा जाता है, ना कि आभूषणों की तरह पहनने के लिए. ये उच्चतम शुद्धता के होते हैं. ( ai image)

वैसे जापान, स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क जैसे देशों में सोने का कोई खास क्रेज नहीं दिखता. यहां शादियों में हीरे या प्लेटिनम को प्राथमिकता दी जाती है. जापान और स्कैंडेनेवियाई देशों में गोल्ड ज्वैलरी को लेकर कतई क्रेज नहीं दिखता. इसकी वजह है. स्कैंडेनेवियाई देशों में एक खास नियम है, वहां लोग ज्यादा प्रदर्शन नहीं करते. ( ai image)

उनकी लंबे समय से एक सामाजिक आचार संहिता है, जिसे जेंटेलोवेन कहते हैं. इसमें सामाजिक सोच है – “तुम कोई खास नहीं हो, तुम हमसे बेहतर नहीं हो.” यहां कानून लोगों को अपनी सामाजिक हैसियत दिखाने से रोकता है, दौलत और स्टेटस का प्रदर्शन करना यहां सामाजिक रूप से वर्जित माना जाता है. सीधे शब्दों में – भारत में सोना दिखाना इज्जत है, स्कैंडिनेविया में यही “बुरा” माना जाता है. वहां एक कहावत है – “अपनी कामयाबी का ढिंढोरा मत पीटो. दिखावा करना, शेखी बघारना बहुत खराब माना जाता है.” स्वीडन में सिल्वर ज्वैलरी का चलन ज़्यादा है. ( ai image)

जापान को “सोने की धरती” कहा गया है, लेकिन वहां आम लोगों में ज्वैलरी के रूप में गोल्ड खरीदने का क्रेज कम है. जापानी ज्वैलरी में अगाते, कोरल और आइवरी जैसे पत्थरों का इस्तेमाल होता आया है. पारंपरिक जापानी संस्कृति में गोल्ड की बजाय कर्व्ड मटीरियल्स को अहमियत दी जाती थी. सोना मंदिरों, मूर्तियों और राजघरानों तक सीमित था – आम आदमी के गले में नहीं.

जापान में 1960–70 के दशक में डि बियर्स की मार्केटिंग ने “डायमंड्स इन फारएवर” स्लोगन को इतनी गहराई से बैठाया कि शादी की अंगूठी गोल्ड की नहीं, हीरे की बन गई और यही ट्रेंड आज भी जारी है. जापान में ऐतिहासिक रूप से गोल्ड कभी आम आदमी की ज्वेलरी नहीं बना. ( ai image)

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