बिजली, पानी, अस्पताल, कॉलेज… कोटा में विकास की नींव रखने वाले ‘शाहजहां’ की अनसुनी कहानी

कोटा. राजस्थान की वीरभूमि पर कई ऐसे शासक हुए जिन्होंने अपने राज्य को नई पहचान दी, लेकिन कोटा रियासत के महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय का नाम उन शासकों में लिया जाता है जिन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व और जनहितकारी कार्यों से कोटा की तस्वीर बदल दी. यही वजह है कि उन्हें ‘आधुनिक कोटा का निर्माता’ कहा जाता है. यदि उनकी तुलना मुगल काल के शासकों से की जाए तो उन्हें कोटा रियासत का ‘शाहजहां’ भी कहा जाता है, क्योंकि उनके शासनकाल में जितने भव्य भवन, आधुनिक निर्माण और जनसुविधाओं के कार्य हुए, उन्होंने कोटा को नई पहचान दिलाई.
वर्ष 1873 में कोटा राज्य की कोटरा जागीर में जन्मे महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय ने 1889 में कोटा की गद्दी संभाली और 1940 तक शासन किया. वे केवल शासक नहीं थे, बल्कि जनता के सुख-दुख को समझने वाले संवेदनशील जननायक भी थे. उनके शासनकाल में कोटा ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, परिवहन और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास किया.
जनसुविधाओं से बदली कोटा की तस्वीरमहाराव उम्मेद सिंह द्वितीय ने उस समय आधुनिक सुविधाओं की नींव रखी, जब देश के कई हिस्से बुनियादी व्यवस्थाओं से भी दूर थे. कोटा में बिजली व्यवस्था शुरू करने के लिए नयापुरा में पावर हाउस स्थापित कराया गया. स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अकेलगढ़ में वाटर वर्क्स और फिल्टर प्लांट की स्थापना करवाई गई, जो आज भी संचालित है. समय के साथ इसमें आधुनिक तकनीक जुड़ती गई, लेकिन इसकी शुरुआत महाराव उम्मेद सिंह ने ही की थी.
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उन्होंने जनाना अस्पताल और विक्टोरिया हॉस्पिटल की स्थापना करवाई. गांवों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए. उस दौर में जब महिलाओं की शिक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था, तब उन्होंने कन्याओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महारानी गर्ल्स स्कूल की स्थापना करवाई. आज भी यह संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है.
शिक्षा और आधुनिक सोच को दिया बढ़ावामहाराव उम्मेद सिंह द्वितीय का मानना था कि किसी भी राज्य की प्रगति शिक्षा के बिना संभव नहीं है. इसी सोच के साथ उन्होंने हर्बर्ट कॉलेज की स्थापना करवाई, जिसे आज गवर्नमेंट कॉलेज के नाम से जाना जाता है. उन्होंने शिक्षा को केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि महिलाओं के लिए भी शिक्षण संस्थान शुरू करवाए.
उनके शासनकाल में कोटा शिक्षा और आधुनिक सोच की ओर तेजी से आगे बढ़ा. यही कारण है कि आज शिक्षा नगरी के रूप में पहचान रखने वाला कोटा कहीं न कहीं उनकी दूरदर्शी सोच का ही परिणाम माना जाता है.
स्थापत्य कला और विकास की मिसालमहाराव उम्मेद सिंह द्वितीय ने कोटा में कई भव्य भवनों और महलों का निर्माण करवाया. गढ़ परिसर में बने चंद्र महल, गुलाब महल और अलसी बंगला उस दौर की उत्कृष्ट शिल्पकला और आधुनिक सुविधाओं के प्रतीक माने जाते हैं. इसके अलावा उम्मेद क्लब, महात्मा गांधी स्कूल और कई अन्य भवन आज भी उनकी स्थापत्य दृष्टि की कहानी बयान करते हैं.
उनके शासनकाल में कोटा को रेल और डाक सेवाओं से भी जोड़ा गया. कोटा-मथुरा रेल संपर्क स्थापित हुआ. चंबल नदी पर पुलिया और सड़कों का निर्माण कराया गया. बारां तक टेलीग्राफ और टेलीफोन सुविधा शुरू की गई. बारां में ग्लास फैक्ट्री और कोटा में स्टोन मंडी की स्थापना कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए गए.
जनता के बीच रहने वाले शासकमहाराव उम्मेद सिंह द्वितीय का व्यक्तित्व बेहद अलग माना जाता था. वे अक्सर बिना किसी औपचारिकता के अपनी कार में निकलकर सीधे जनता के बीच पहुंच जाते थे. उनकी गाड़ी को कोई भी व्यक्ति रोककर अपनी समस्या बता सकता था.
बताया जाता है कि वे अपनी कार में खाद्य सामग्री और वस्त्र भी रखते थे, ताकि जरूरतमंद लोगों की तुरंत मदद की जा सके. यदि किसी व्यक्ति की समस्या का समाधान तुरंत संभव होता तो मौके पर ही कार्रवाई करते, अन्यथा अधिकारियों को निर्देश देकर समाधान करवाते थे. जनता को विश्वास था कि यदि वे सही हैं तो महाराव उन्हें न्याय जरूर दिलाएंगे.
स्वदेशी सोच और रोजगार पर जोरमहाराव उम्मेद सिंह द्वितीय स्वदेशी विचारधारा से भी प्रभावित थे. वे अधिकतर खादी के वस्त्र पहनते थे और राज्य के कार्यों में भी स्थानीय खादी के उपयोग को बढ़ावा देते थे. उन्होंने आदेश जारी किया था कि राज्य के शिक्षित और योग्य युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता दी जाए, ताकि बेरोजगारी कम हो सके.
जनता के दिलों में आज भी जिंदा हैं महारावमहाराव उम्मेद सिंह द्वितीय केवल राजगद्दी के शासक नहीं थे, बल्कि जनता के दिलों पर राज करने वाले जननायक थे. नयापुरा स्थित उम्मेद पार्क में जनता द्वारा स्थापित उनकी अष्टधातु की प्रतिमा आज भी लोगों की श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक बनी हुई है.
उनके बारे में कहा जाता है, एक तंत्र में प्रजातंत्र का जग के सम्मुख रखा आदर्श. यानी उन्होंने राजतंत्र में रहते हुए भी जनता को वही सम्मान और अपनापन दिया, जिसकी अपेक्षा किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में की जाती है. आधुनिक कोटा की जो तस्वीर आज दिखाई देती है, उसकी मजबूत नींव महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय ने ही रखी थी.



