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सालभर से दबाव में है शेयर बाजार, फिर भी इस फंड ने दिया एफडी से दोगुना रिटर्न, मौका देख बदल लेता है रणनीति

नई दिल्‍ली. भारत के शेयर बाजार ने बार-बार दिखाया है कि सेक्टर लीडरशिप शायद ही कभी लंबे समय तक स्थिर रहती है. जो सेक्‍टर 6 महीने पहले अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, वह जल्दी ही अपनी गति खो सकता है, जबकि जिन सेक्टरों को नजरअंदाज किया गया था, वे अचानक लीडर के रूप में उभर आते हैं. अधिकांश निवेशकों के लिए इन बदलावों को जल्दी पहचानना और उन पर अनुशासन के साथ बिना भावनाओं के अमल करना कठिन चुनौती बन जाता है. लेकिन, एक ऐसा फंड है जो मौके की नजाकत को न सिर्फ जल्‍दी भांप लेता है, बल्कि उसके अनुसार अपनी रणनीति बदलकर जल्‍दी रिटर्न की तरफ मुड़ भी जाता है.

अगर आपके सामने भी मौजूदा दबाव के बीच ऐसी ही मुश्‍किल आ रही है तो निवेश विकल्‍प के रूप में ICICI प्रूडेंशियल के मल्टी सेक्टर पैसिव एफओएफ पर अमल कर सकते हैं. यह आर्थिक चक्रों, मूल्यांकनों और जोखिम-लाभ के अवसरों के आधार पर सेक्टर और मल्टी-सेक्टर ईटीएफ में अपना निवेश बांटता है और रिटर्न को हर हालत में बेहतर बनाए रखता है. तभी तो इस फंड ने तमाम चुनौतियों के बावजूद अपनी लॉन्चिंग से आज तक हर साल एफडी से करीब दोगुना रिटर्न दिया है.

मौका देख कैसे बदलता है निवेशफंड की हालिया पोर्टफोलियो रणनीति इसके अनुशासन को दिखाती है. दिसंबर 2025 और अप्रैल 2026 के बीच जब दुनियाभर के बाजारों पर दबाव दिख रहा था तो इस फंड ने मेटल में निवेश लगभग 10 फीसदी से घटाकर 6.59 फीसदी कर दिया. यह रणनीति सेक्टर में मजबूत तेजी का नतीजा था. कई निवेशक इस तेजी का फायदा उठाने के लिए उत्सुक हो सकते हैं. इसी अवधि में, निजी बैंकों में निवेश 19 फीसदी से बढ़ाकर 26.68 फीसदी कर दिया गया. बिजली क्षेत्र में निवेश शून्य से बढ़ाकर 8.39 फीसदी और फार्मा क्षेत्र में शून्य से बढ़ाकर 9.56 फीसदी कर दिया गया, क्योंकि मॉडल ने इन क्षेत्रों में बेहतर जोखिम-लाभ अनुपात की पहचान कर ली.

कहां है पोर्टफोलियो का ज्‍यादा निवेशअप्रैल 2026 तक, पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा प्राइवेट बैंक ईटीएफ में 26.68 फीसदी था. इसके बाद एफएमसी ईटीएफ (10.55%), फार्मा ईटीएफ (9.56%), निफ्टी ऑयल एंड गैस ईटीएफ (9.40%), आईटी ईटीएफ (8.58%) और पावर ईटीएफ (8.39%) का स्थान था. अन्य निवेशों में ऑटो, मेटल, बैंक और रियल्टी ईटीएफ के साथ-साथ अल्पकालिक डेट ऑप्‍शन भी शामिल थे. इस फंड का प्रबंधन शंकरन नरेन और धर्मेश कक्काड करते हैं, जो 2018 से इस स्कीम से जुड़े हुए हैं.

फंड का खर्च अनुपात भी काफी कमयह फंड रणनीति के अलावा व्यावहारिक कार्यान्वयन लाभ भी प्रदान करता है. निवेशक कई ईटीएफ खरीदने और बेचने के बोझ से बच जाते हैं, जिसमें डीमैट और ब्रोकरेज लागत भी शामिल हैं. इसका एक्सपेंस रेशियो लगभग 0.60% है, जिसमें अंतर्निहित ईटीएफ खर्च शामिल हैं और 15 दिनों के भीतर भुनाने पर 1% का एग्जिट लोड लगता है. प्रदर्शन के लिहाज से इस स्कीम ने 30 अप्रैल, 2026 तक अपनी शुरुआत से 13.35% की सीएजीआर की दर से रिटर्न दिया है. इसी अवधि में निफ्टी-500 टीआरआई ने 12.91% की दर से रिटर्न दिया है.

किस तरह के निवेशकों के लिए यह ऑप्‍शनयह फंड उन निवेशकों के लिए है, जो मानते हैं कि भारत के बाजार में रिटर्न कुछ चुनिंदा शेयरों के बजाय विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्व से अधिक आएगा. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मल्टी सेक्टर पैसिव एफओएफ बाजार में भाग लेने का एक बेहतर और अनुशासित तरीका प्रदान करता है. इसके लिए निवेशकों को लगातार यह अनुमान लगाने की आवश्यकता नहीं होती कि तेजी के लिए अगला क्षेत्र कौन सा होगा. मूल सिद्धांत सीधा-सादा है. भावनात्मक रूप से निवेश करने या बाहर निकलने के फैसलों पर निर्भर हुए बिना सेक्टर के अवसरों में भाग लें. शेयरों का चयन करने के बजाय यह फंड कई सेक्टर ईटीएफ में पैसिव रूप से निवेश करता है और मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों, आय रुझानों और बाजार संकेतों के आधार पर अपने निवेश को बदलता है. रिकवरी के दौरान, मेटल, बिजली या बैंकिंग जैसे साइक्लिकल सेक्टर अक्सर आगे रहते हैं, जबकि एफएमसीजी या फार्मा जैसे रक्षात्मक सेक्टर कमजोर पड़ जाते हैं. फंड इस पर खास निगाह रहता है.

(Disclaimer: यहां बताए गए म्‍यूचुअल फंंड हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्‍टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह की लाभ या हानि के लिए लिए जिम्मेदार नहीं होगा.)

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