मैंने राहुल द्रविड़ का करियर बचाया… पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का सनसनीखेज खुलासा, बताया कैसे बनाई टीम में उनकी जगह

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मैंने द्रविड़ का करियर बचाया… पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का सनसनीखेज खुलासा
Last Updated:May 17, 2026, 13:38 IST
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली अपने एक हालिया इंटरव्यू को लेकर चर्चा में हैं. गांगुली ने अपने इस इंटरव्यू में भारतीय टीम से जुड़ी कई सारे अहम खुलासे किए. उसी में से एक है सौरव गांगुली के वनडे करियर के बारे में. गांगुली ने बताया कि राहुल द्रविड़ का वनडे करियर उन्होंने बचाया था.सौरव गांगुली के साथ राहुल द्रविड़
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम में राहुल द्रविड़ को दीवार कहा जाता था. द्रविड़ ने अपने दमदार खेल से टीम इंडिया को अनगिनत मैचों में जीत दिलाई. एक समय था जब राहुल द्रविड़ के बिना भारतीय टीम पूरी नहीं समझी जाती थी, लेकिन पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में बताया कि कैसे उन्होंने द्रविड़ के करियर को बचाया. गांगुली ने बताया कि चयनकर्ताओं ने राहुल द्रविड़ को वनडे टीम से निकालने का मन लिया था. उस समय में गांगुली टीम के कप्तान थे और वह चाहते थे कि द्रविड़ टीम में रहे.
इसमें कोई शक नहीं कि राहुल द्रविड़ दुनिया के महान क्रिकेटर हैं, लेकिन एक समय पर वनडे में उनकी बल्लेबाजी शैली से चयनकर्ता खुश नहीं थे. उन्हें लगता था कि द्रविड़ का स्ट्राइक रेट वनडे में फिट नहीं बैठता है और वह उनकी जगह किसी और खिलाड़ी को स्क्वाड में लाना चाहते थे, लेकिन सौरव गांगुली को द्रविड़ पर पूरा भरोसा था. ऐसे में उन्होंने द्रविड़ से विकेटकीपिंग करानी शुरू की.
विकेटकीपर के तौर पर टीम फिट हुए थे द्रविड़
राहुल द्रविड़ की बल्लेबाजी तकनीक और उनकी क्षमता पर किसी को शक नहीं था. खास तौर पर टेस्ट क्रिकेट में तो टीम इंडिया के लिए लंबे समय तक पिलर बनकर रहे, लेकिन करियर के शुरुआत में वह वनडे में संघर्ष करते हुए दिखे थे. इस दौर में एमड गिलक्रिस्ट, कुमार संगाकारा और मार्क बाउचर जैसे विकेटकीपर थे जो अपनी टीम के लिए अच्छी बल्लेबाजी भी करते थे. गांगुली ऐसे ही एक खिलाड़ी की तलाश में जो विकेटकीपिंग के साथ बल्लेबाजी में भी माहिर हो. ऐसे में गांगुली ने द्रविड़ के कीपिंग करानी शुरू की.
गांगुली ने अपने इंटरव्यू में बताया कि, “द्रविड़ के विकेटकीपिंग करने से टीम में संतुलन बन गया, जिससे मोहम्मद कैफ जैसे खिलाड़ियों को मौका मिला. द्रविड़ के विकेटकीपिंग करने से हमारे पास एक अतिरिक्त बैटिंग का विकल्प मिल गया था.” इसका फायदा ये हुआ कि टीम इंडिया साल 2003 वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंची. इसके बाद तो द्रविड़ ने लंबे समय तक टीम इंडिया के लिए विकेटकीपिंग की और वनडे में उनकी बल्लेबाजी भी मजबूत हो गई.
About the AuthorJitendra Kumar
जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें
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