Hyderabbad news | Fashion | हैदराबाद लाड बाजार में अफजल मियां की कारचोब विरासत जिंदा

Last Updated:June 16, 2026, 17:10 IST
Hyderabad Nawab Fashion Clothes : हैदराबाद के लाड बाजार में अफजल मियां कारचोब वाले की 1947 से ही दुकान चल रही है. यह दुकान नहीं बल्कि अपने आप में एक विरासत है. वे हाथों से ही कारचोब कढ़ाई करते हैं. इसमें वे जरी और लाम्पी के लिए मशहूर हैं. इस बदलते फैशन में वे आज भी डिजाइनर परिधानों पर काम कर रहे हैं जो विरासत को कायम रखने का काम है.
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हैदराबाद. आधुनिकता की तेज रफ्तार और रेडीमेड कपड़ों के इस दौर में, जहां फैशन हर दिन बदल रहा है, वहीं हैदराबाद के पुराने शहर की एक छोटी सी दुकान इतिहास को आज भी अपने भीतर समेटे खड़ी है. चारमीनार के पास लाड बाजार की ऐतिहासिक गलियों में स्थित अफजल मियां कारचोब वाले की दुकान आज भी नवाबों के दौर की पारंपरिक हाथ की कढ़ाई की विरासत को जीवित रखे हुए है. वर्ष 1947 में देश की आजादी के समय शुरू हुई यह दुकान लगभग 79 साल बाद भी अपनी पुरानी साख और बारीक कलाकारी के लिए जानी जाती है.
यह दुकान विशेष रूप से कारचोब कला के लिए मशहूर है. फारसी शब्द “कारचोब” का अर्थ होता है लकड़ी का ढांचा. इस कला में मखमल या रेशम के कपड़े को एक बड़े लकड़ी के फ्रेम पर, जिसे स्थानीय भाषा में “अड्डा” कहा जाता है, चारों ओर से कसकर बांध दिया जाता है. इसके बाद कुशल कारीगर सुई-धागे, जरी, सितारों और मोतियों की मदद से कपड़े पर उभरे हुए बेहद खूबसूरत और शाही डिजाइन तैयार करते हैं. एक समय था जब इस तकनीक का इस्तेमाल राजा-नवाबों की पोशाकों, शाही दरबार के पर्दों और म्यानों को सजाने के लिए किया जाता था.
पीढ़ियों से सहेजी जा रही विरासतदुकान के वर्तमान संचालकों का कहना है कि उनके पिता अफजल मियां ने इस विरासत की शुरुआत की थी, जिसे वे आज भी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं. आज जब बाजार मशीनों और कंप्यूटर आधारित कढ़ाई से भरा पड़ा है, तब भी इस दुकान में हर टांका हाथ से लगाया जाता है. यही वजह है कि यहां बनने वाली पारंपरिक हैदराबादी लाम्पी, किरन और जरी के बारीक काम की मांग आज भी देश के बड़े-बड़े फैशन डिजाइनरों के बीच बनी हुई है.
समय के साथ बदला अंदाजसमय के साथ इस दुकान ने खुद को आधुनिक फैशन के अनुरूप भी ढाल लिया है. अब यहां पारंपरिक लहंगों और शेरवानियों के साथ-साथ डिजाइनर ड्रेसेस, कुर्तियों और अन्य आधुनिक परिधानों पर भी कारचोब का नायाब काम किया जाता है. अफजल मियां कारचोब वाले की यह दुकान केवल एक व्यापारिक प्रतिष्ठान नहीं है, बल्कि हैदराबाद की तहजीब, कला और गंगा-जमुनी संस्कृति की एक अनमोल धरोहर है, जो आज भी अपनी सुई और धागे से इतिहास के सुनहरे पन्नों को जीवंत बनाए हुए है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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Hyderabad,Hyderabad,Telangana



