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MP के किसानों के लिए खुशखबरी! मुर्रा भैंस खरीदने पर सरकार दे रही सब्सिडी, जानें कैसे उठाएं योजना का लाभ

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किसानों के लिए खुशखबरी! मुर्रा भैंस खरीदने पर सरकार दे रही सब्सिडी, जानें

Last Updated:June 11, 2026, 14:28 IST

Mukhyamantri Dairy Plus Yojana: मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी सौगात साबित हो रही है. इस योजना के तहत मुर्रा नस्ल की भैंस खरीदने पर 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. पशुपालन विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है. योजना के अंतर्गत दो मुर्रा भैंसों की एक यूनिट स्थापित करने पर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है. (रिपोर्ट: राकेश पटेल/सीधी)

मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना किसानों और पशुपालकों के लिए आय बढ़ाने का सुनहरा अवसर बनकर सामने आई है. योजना के तहत मुर्रा नस्ल की भैंस खरीदने पर 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है. पशुपालन विभाग के माध्यम से संचालित इस योजना से किसान कम निवेश में डेयरी यूनिट स्थापित कर सकते हैं और नियमित आय का स्रोत विकसित कर सकते हैं.

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत दो मुर्रा भैंसों की एक यूनिट स्थापित करने पर सरकार करीब 3 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान कर रही है. सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 75 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है. इससे पशुपालकों का आर्थिक बोझ कम होता है और वे आसानी से डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. सरकार की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

मुर्रा नस्ल की भैंस अपनी उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है. विशेषज्ञों के अनुसार यह भैंस प्रतिदिन 10 से 15 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. इसके दूध में वसा और पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है, जिससे बाजार में इसकी मांग भी काफी रहती है. डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसान इस नस्ल को सबसे अधिक लाभदायक मानते हैं. यही कारण है कि सरकार भी इस नस्ल को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान उपलब्ध करा रही है.

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योजना का लाभ लेने वाले सामान्य वर्ग के किसानों को आवेदन के समय लगभग 1 लाख 47 हजार 500 रुपये जमा करने होंगे. इसके बाद उन्हें दो मुर्रा नस्ल की भैंसें उपलब्ध कराई जाएंगी. कुल लागत का शेष हिस्सा सरकार अनुदान के रूप में वहन करेगी. इससे किसानों को कम पूंजी में डेयरी यूनिट स्थापित करने का अवसर मिलता है. यह योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए लाभकारी है जो पशुपालन के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं.

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को विशेष लाभ दिया जा रहा है. इस वर्ग के लाभार्थियों को केवल 73 हजार 700 रुपये जमा करने होंगे, जबकि बाकी राशि सरकार सब्सिडी के रूप में देगी. 75 प्रतिशत तक अनुदान मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी आसानी से डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आय में स्थायी वृद्धि करना है.

योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को मुर्रा भैंस खरीदने के लिए हरियाणा भेजा जाता है. खास बात यह है कि यात्रा, ठहरने और भैंसों को वापस लाने का पूरा खर्च सरकार उठाती है. इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण नस्ल की भैंसें उपलब्ध कराना सुनिश्चित होता है. पशुपालन विभाग की निगरानी में खरीद प्रक्रिया पूरी की जाती है ताकि लाभार्थियों को स्वस्थ और अधिक दूध देने वाली भैंसें मिल सकें. यह व्यवस्था योजना को और अधिक भरोसेमंद बनाती है.

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होना जरूरी है. साथ ही उसके पास पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त स्थान और उनकी देखभाल करने की क्षमता होनी चाहिए। सरकार चाहती है कि योजना का लाभ ऐसे लोगों तक पहुंचे जो डेयरी व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला सकें. पात्र किसान और पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय, जनसेवा केंद्र या ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. इससे आवेदन प्रक्रिया काफी आसान और सुलभ हो गई है.

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना में आवेदन करने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे दस्तावेज आवश्यक हैं. योजना सीमित बजट के तहत ‘पहले आओ, पहले पाओ’ आधार पर संचालित की जा रही है. इसलिए पात्र किसानों को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी जा रही है. पशुपालन विभाग का मानना है कि यह योजना ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए रोजगार तथा आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम साबित हो सकती है.

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