उदयपुर में हर साल मोहर्रम पर क्यों मिलाई जाती हैं छड़ियां? जानिए 132 साल पुरानी परंपरा की अनसुनी कहानी

Last Updated:June 26, 2026, 08:20 IST
Udaipur Chhari Milan Muharram Tradition Historical Story: उदयपुर के भड़भूजा घाटी में मोहर्रम की नौवीं तारीख पर 132 साल पुरानी ‘छड़ी मिलन’ की पारंपरिक रस्म निभाई गई, जो सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है. कुरैशी महासभा के अध्यक्ष रेहान कुरैशी के अनुसार, इसकी शुरुआत महाराणा भूपाल सिंह के काल में मेवाफरोश और नायक समाज के विवाद को सुलझाने के लिए हाजी अब्दुल बाकी द्वारा कराई गई थी. आज उनकी पांचवीं पीढ़ी इस परंपरा को निभा रही है. कर्बला के प्रतीक के रूप में पूजी जाने वाली छड़ी का यह मिलन उदयपुर की गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत रखता है.
ख़बरें फटाफट
Udaipur: राजस्थान का झीलों का शहर उदयपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं और कौमी एकता के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है. मोहर्रम की नौवीं तारीख पर उदयपुर शहर में एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहद खूबसूरत मिसाल देखने को मिली. शहर के भड़भूजा घाटी क्षेत्र में वर्षों पुरानी ऐतिहासिक ‘छड़ी मिलन’ की पारंपरिक रस्म पूरे धार्मिक सम्मान, अकीदत और आपसी भाईचारे के साथ संपन्न की गई. यह अनूठी परंपरा पिछले करीब 132 वर्षों से लगातार बिना रुके चली आ रही है और इसे विशेष रूप से केवल उदयपुर की ही अनूठी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है.
मोहर्रम के इस मुकद्दस अवसर पर उदयपुर शहर के अलग-अलग मोहल्लों और क्षेत्रों से अकीदतमंदों द्वारा खूबसूरत ताजिए निकाले गए. ये सभी ताजिए शहर के विभिन्न मार्गों से गश्त करते हुए और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए भड़भूजा घाटी पहुंचे. यहां पर मेवाफरोश समाज, नायक समाज सहित अन्य स्थानीय ताजिया कमेटियों की छड़ियों का पारंपरिक तरीके से मिलन कराया गया. इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण के दौरान भड़भूजा घाटी में भारी संख्या में मुस्लिम अकीदतमंदों के साथ-साथ हिंदू समाज और अन्य धर्मों के शहरवासी भी मौजूद रहे. छड़ी मिलन की इस रस्म के दौरान पूरे क्षेत्र में भाईचारे, आपसी सम्मान और सामाजिक एकता का अद्भुत संदेश हवाओं में तैरता नजर आया.
महाराणा भूपाल सिंह के काल में हुई थी शुरुआतइस ऐतिहासिक परंपरा की पृष्ठभूमि भी बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक है. कुरैशी महासभा के अध्यक्ष रेहान कुरैशी ने इस परंपरा के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसकी शुरुआत तत्कालीन मेवाड़ शासक महाराणा भूपाल सिंह के शासनकाल के दौरान हुई थी. उस दौर में मोहर्रम के मौके पर ताजिया पहले निकालने को लेकर मेवाफरोश समाज और नायक समाज के बीच अचानक कुछ विवाद उत्पन्न हो गया था. जब मामला काफी बढ़ गया और राजदरबार तक पहुंचा, तो दूरदर्शी महाराणा ने अपने बेहद भरोसेमंद निजी कंपाउंडर हाजी अब्दुल बाकी को दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने और समझौता कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी.
पांचवीं पीढ़ी आज भी निभा रही है जिम्मेदारीमहाराणा का आदेश पाकर हाजी अब्दुल बाकी ने दोनों समाजों के प्रबुद्ध लोगों को एक साथ बैठाया और उनकी गलतफहमियों को दूर करते हुए आपसी सहमति से दोनों समाजों की छड़ियों का मिलन करवाया. इस सफल समझौते के बाद से ही हर वर्ष मोहर्रम की नौवीं तारीख को यह रस्म पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाने लगी. समय बीतने के साथ यह परंपरा उदयपुर की कौमी एकता की एक अमिट पहचान बन गई और आज भी उसी पवित्र भावना और सम्मान के साथ जारी है. हाजी अब्दुल बाकी के इंतकाल के बाद भी उनका परिवार इस अनमोल विरासत को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ा रहा है. वर्तमान समय में उनकी पांचवीं पीढ़ी इस ऐतिहासिक परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाने और संपन्न कराने की जिम्मेदारी संभाल रही है.
क्या है छड़ी का धार्मिक महत्व?मोहर्रम के इतिहास और मजहबी मामलों के जानकारों के अनुसार, छड़ी को मूल रूप से उस ‘नेजे’ (भाले) का प्रतीक माना जाता है, जिस पर कर्बला की ऐतिहासिक जंग के बाद हजरत इमाम हुसैन का पाक सिर मुबारक रखा गया था. इसी महान ऐतिहासिक और मजहबी संदर्भ के कारण मोहर्रम के दिनों में छड़ी का एक विशेष और अत्यंत पवित्र धार्मिक महत्व है. वहीं दूसरी तरफ, झीलों की नगरी उदयपुर में यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ विभिन्न समाजों को एक सूत्र में पिरोने वाली सामाजिक समरसता और अटूट सांप्रदायिक सौहार्द का भी एक सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है. इस वर्ष भी यह पूरा कार्यक्रम बेहद शांतिपूर्ण और गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Udaipur,Udaipur,Rajasthan



