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आखिर कौन हैं 75 वर्षीय खड़ेश्वर बाबा? जो 22 साल से नहीं बैठे और अब निकल पड़े 1000 किमी की कठिन की दंडवत यात्रा पर

Last Updated:June 26, 2026, 09:56 IST

Sikar Khadeshwar Baba 1000 KM Dandwat Yatra Vaishno Devi: सीकर जिले के दांतारामगढ़ के बाय गांव के 75 वर्षीय संत शंकर दास महाराज (खड़ेश्वर बाबा) मां वैष्णो देवी के लिए 1000 किमी की दंडवत यात्रा पर निकले हैं. बाबा पिछले 22 वर्षों से गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए लगातार खड़े रहकर तपस्या कर रहे हैं और कभी बैठते नहीं हैं. निर्जला एकादशी से शुरू हुई उनकी यह यात्रा राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और जम्मू होते हुए वैष्णो देवी पहुंचेगी. यह यात्रा विश्व शांति, मानव कल्याण और सनातन धर्म के प्रचार के उद्देश्य से की जा रही है.

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Sikar: राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र अपनी अनूठी संस्कृति, वीरों और चमत्कारी संतों की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है. इसी कड़ी में सीकर जिले से आस्था और कठिन साधना की एक ऐसी विहंगम कहानी सामने आई है, जो हर किसी को हैरान कर रही है. उम्र 75 वर्ष से अधिक हो चुकी है, लेकिन हौसला और संकल्प किसी युवा से भी कहीं अधिक मजबूत है. पिछले 22 वर्षों से कभी न बैठने (आसन ग्रहण न करने) का अनूठा संकल्प निभाने वाले एक संत अब करीब 1000 किलोमीटर लंबी अत्यंत कठिन दंडवत यात्रा पर निकल पड़े हैं. सीकर जिले की दांतारामगढ़ तहसील के बाय गांव के रहने वाले संत शंकर दास महाराज, जिन्हें क्षेत्र के श्रद्धालु ‘खड़ेश्वर बाबा’ के नाम से जानते हैं, अपनी इस अनोखी तपस्या और कठिन संकल्प के कारण इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं.

खड़ेश्वर बाबा ने हाल ही में संपन्न हुई निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर अपने बाय गांव स्थित आश्रम में मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस महायात्रा की शुरुआत की है. उनका यह सफर जम्मू-कश्मीर में स्थित सुप्रसिद्ध मां वैष्णो देवी धाम के लिए शुरू हुआ है. यह यात्रा कोई सामान्य पदयात्रा नहीं है, बल्कि बाबा पूरी दूरी जमीन पर लेटकर यानी दंडवत प्रणाम (कनक दंडवत) करते हुए तय करेंगे. वे अपनी इस यात्रा के दौरान अपने साथ लाल वस्त्र में बंधा हुआ एक पवित्र नारियल भी लेकर चल रहे हैं, जिसे वे वैष्णो देवी के मुख्य दरबार में पहुंचकर आदिशक्ति के चरणों में अर्पित करेंगे.

व्यक्तिगत सिद्धि नहीं, लोक कल्याण है उद्देश्यबाबा का कहना है कि उनकी यह कठिन यात्रा किसी व्यक्तिगत सिद्धि, चमत्कार दिखाने या प्रसिद्धि पाने के लिए नहीं है. वे यह यात्रा पूर्ण रूप से मानव कल्याण, विश्व शांति, गौ संरक्षण (गौ माता की रक्षा) और सनातन धर्म के प्रति आमजन में जागृति लाने के महान उद्देश्य से कर रहे हैं. इस लंबी यात्रा के मार्ग में जहां-जहां भी बाबा के रात्रि विश्राम और दिन के पड़ाव होंगे, वहां वे स्थानीय लोगों के साथ भजन-कीर्तन करेंगे और धार्मिक व सामाजिक संदेशों के माध्यम से समाज को कुरीतियों के खिलाफ जागरूक भी करेंगे.

कई राज्यों से होकर गुजरेगी कठिन साधनाखड़ेश्वर बाबा की यह दुर्गम और कठिन साधना यात्रा देश के कई राज्यों से होकर गुजरेगी. सीकर के बाय गांव से शुरू हुई यह यात्रा प्रसिद्ध आस्था धाम खाटूश्यामजी होते हुए हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए अंत में त्रिकुटा पर्वत पर स्थित वैष्णो देवी धाम पहुंचेगी. बाबा ने बताया कि वे सीधे कटरा नहीं जाएंगे, बल्कि मार्ग में आने वाले सभी प्रमुख और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर भी दर्शन व वंदन करते हुए आगे बढ़ेंगे. इस बेहद कठिन यात्रा को पूरी करने के लिए उन्होंने कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है. उनका मानना है कि यह संकल्प जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूरी श्रद्धा, भक्ति और अटूट धैर्य के साथ ही पूरा किया जा सकता है.

22 वर्षों की अनवरत खड़े रहने की तपस्याखड़ेश्वर बाबा की सबसे बड़ी और अनोखी पहचान उनकी पिछले 22 वर्षों की अनवरत खड़े रहने वाली कठोर तपस्या है. स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के अनुसार, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की अपनी मुख्य मांग को लेकर उन्होंने दो दशक से भी अधिक समय पहले बैठना और लेटना पूरी तरह छोड़ दिया था. तब से वे चौबीसों घंटे लगातार खड़े रहकर ही अपनी दैनिक क्रियाएं और प्रभु साधना कर रहे हैं. उनकी इसी अत्यंत कठिन और विस्मयकारी तपस्या के कारण लोग उन्हें श्रद्धा से खड़ेश्वर बाबा के नाम से पुकारते हैं. 75 वर्ष से अधिक की इस ढलती उम्र में उनका यह 1000 किलोमीटर की दंडवत यात्रा का संकल्प आधुनिक विज्ञान और आम लोगों को हैरान कर रहा है. रास्ते में बाबा की एक झलक पाने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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