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Barmer News | Success Story

Last Updated:June 27, 2026, 10:57 IST

Success Story Of Young Guy From Barmer : बाड़मेर के चवा गांव के 20 वर्षीय मोतीसिंह पोटलिया का चयन पुलिस कॉन्स्टेबल, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-1 और कृषि सुपरवाइजर में प्रथम स्थान के साथ हुआ. शहरों की कोचिंग और महंगे संसाधनों से कोसों दूर मोतीसिंह ने गांव में रहकर नियमित अध्ययन और सेल्फ स्टडी को अपनी ताकत बनाया है. महज 20 साल की उम्र में मोतीसिंह का चयन पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में हुआ.

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बाड़मेर. सरहदी बाड़मेर जिले के छोटे से गांव चवा के रहने वाले मोतीसिंह पोटलिया ने वह कर दिखाया है, जो कई युवाओं के लिए सिर्फ सपना होता है. महज 20 साल की उम्र में मोतीसिंह का चयन पुलिस कॉन्स्टेबल, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-1 और कृषि सुपरवाइजर जैसे चार सरकारी पदों पर हुआ है. खास बात यह है कि उन्होंने गांव में रहकर सेल्फ स्टडी के दम पर यह सफलता हासिल की है.

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है. बाड़मेर जिले के चवा गांव के युवा मोतीसिंह पोटलिया इसकी जीती-जागती मिसाल हैं. मोतीसिंह ने महज 20 साल की उम्र में एक साथ 4 सरकारी नौकरियों में सफलता पाई है. किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोतीसिंह के पिता जोगेंद्र सिंह पोटलिया जूनियर अकाउंटेंट हैं, जबकि माता केसी देवी गृहिणी हैं. साधारण पारिवारिक माहौल में पले-बढ़े मोतीसिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव चवा में ही प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी हाई स्कूल से उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की.

इन परीक्षाओं में पाई सफलता, लेकिन नहीं रुके कदमशहरों की कोचिंग और महंगे संसाधनों से कोसों दूर मोतीसिंह ने गांव में रहकर नियमित अध्ययन और सेल्फ स्टडी को अपनी ताकत बनाया है. महज 20 साल की उम्र में मोतीसिंह का चयन पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में हुआ. इसके बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में उन्होंने 2367वीं रैंक प्राप्त की. मोतीसिंह यहीं नहीं रुके और अपनी तैयारी जारी रखी.

कृषि सुपरवाइजर में किया राजस्थान टॉप, असिस्टेंट प्रोफेसर बनना है सपनातृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-1 भर्ती में उनकी 722वीं रैंक रही है, जबकि कृषि सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा में उन्होंने पूरे राजस्थान में प्रथम स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. मोतीसिंह का कहना है कि उनका सपना असिस्टेंट प्रोफेसर बनना है. हालांकि मोतीसिंह अब तृतीय श्रेणी अध्यापक पद पर जॉइन करेंगे, लेकिन कम उम्र में इतनी सफलता पाना हर युवा के लिए प्रेरणादायक है.

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, नियमित पढ़ाई से मिला मुकाममोतीसिंह का कहना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. नियमित पढ़ाई, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की असली चाबी है. वे बताते हैं कि गांवों के युवाओं में भी असीम प्रतिभा होती है. जरूरत सिर्फ सही दिशा और निरंतर प्रयास की है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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