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Sand Bawdi I जालोर की रहस्यमयी सांड बावड़ी I rajasthan news I jalore news

Last Updated:June 29, 2026, 18:46 IST

Sand Bawdi: जालोर की ऐतिहासिक सांड बावड़ी सिर्फ एक प्राचीन जल संरचना नहीं, बल्कि आस्था और मान्यताओं से जुड़ी एक अनोखी धरोहर मानी जाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां का जल इतना पवित्र माना जाता था कि इसे नवजात शिशुओं को जन्मगुट्टी के रूप में पिलाया जाता था, जिससे उनके जीवन में सफलता और विशेष गुण आने की मान्यता थी. लोग इसे साहस, सत्य और समृद्धि का प्रतीक मानते थे.

जालोर. जिले में स्थित सांड बावड़ी एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जो सिर्फ पत्थरों से बनी संरचना नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और रहस्यों की एक जीवंत कहानी है. आज भी जब लोग इस बावड़ी के पास पहुंचते हैं, तो सिर्फ इसकी बनावट ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी मान्यताएं उन्हें हैरान कर देती हैं. इतिहासकार बंशीलाल सोनी ने लोकल 18 को जानकारी दी की कहा जाता है कि एक समय ऐसा था जब इस बावड़ी का पानी बेहद पवित्र और प्रभावशाली माना जाता था. यहां तक कि नवजात शिशुओं को जन्मगुट्टी के रूप में इस बावड़ी का जल पिलाया जाता था. मान्यता थी कि इस जल को ग्रहण करने वाला बच्चा जीवन में कुछ खास बनता है कोई वीर योद्धा, कोई सफल व्यापारी, कोई बड़ा उद्योगपति या फिर एक महान शिक्षाविद.

इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों का विश्वास था कि इस बावड़ी का पानी पीने वाला व्यक्ति कभी झुकता नहीं और हमेशा सत्य के मार्ग पर चलता है. यही वजह थी कि उस दौर में इस बावड़ी का पानी पीना सिर्फ एक सामान्य बात नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान का प्रतीक माना जाता था. हालांकि समय के साथ कई परंपराएं बदल गई, लेकिन सांड बावड़ी से जुड़ी ये मान्यताएं आज भी लोगों की जुबान पर जिंदा हैं. इतिहासकारों के अनुसार, यह बावड़ी न केवल जल संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि उस दौर की सामाजिक सोच और विश्वासों को भी दर्शाती है.

प्राचीन जल संरचनाओं में रखती है महत्वपूर्ण स्थान

सांड बावड़ी जालोर की प्राचीन जल संरचनाओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है. पुराने समय में पानी को सिर्फ जीवन का आधार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति के रूप में भी देखा जाता था. इस बावड़ी से जुड़ी मान्यताएं बताती हैं कि उस समय लोग जल को पवित्र मानते थे और उसे जीवन की सफलता से जोड़कर देखते थे. यह हमारे इतिहास और संस्कृति की एक अनमोल धरोहर है, जिसे संरक्षित रखना बेहद जरूरी है. आज भले ही विज्ञान और आधुनिकता ने इन मान्यताओं को एक अलग नजरिए से देखने की समझ दी हो, लेकिन सांड बावड़ी की यह कहानी आज भी लोगों के मन में एक अलग ही रोमांच और जिज्ञासा पैदा करती है. यह बावड़ी सिर्फ अतीत की याद नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है, जो कभी लोगों के जीवन का अहम हिस्सा हुआ करता था.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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