Karauli News: मरम्मत अधूरी खतरा बरकरार, करौली में जर्जर भवनों में शुरू हुआ नया शैक्षणिक सत्र, स्कूलों में लौटे बच्चे

Last Updated:June 29, 2026, 17:16 IST
गर्मी की छुट्टियों के बाद जिले के स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो गई, लेकिन कई सरकारी विद्यालयों में जर्जर भवन और अधूरी मरम्मत विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है. 737 विद्यालयों के लिए स्वीकृत मरम्मत कार्यों में से कई अब भी अधूरे हैं, जिससे छात्र-छात्राएं सीमित संसाधनों और जोखिम भरे माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं.
करौली. जिले में गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार से सरकारी और निजी विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो गई. पहले दिन अधिकांश विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही. वहीं, नए सत्र के साथ ही सरकारी विद्यालयों के जर्जर भवनों की समस्या एक बार फिर सामने आ गई है. मरम्मत कार्यों के लिए स्वीकृति मिलने के बावजूद कई विद्यालयों में आज भी काम अधूरा है, जिससे छात्र-छात्राओं को जोखिम भरे भवनों में पढ़ाई करनी पड़ रही है.
पिछले वर्ष बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हुए विद्यालय भवनों की मरम्मत के लिए आपदा प्रबंधन मद से जिले के 737 विद्यालयों को दो-दो लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी. इनमें 281 विद्यालयों में शिक्षा विभाग और 456 विद्यालयों में पंचायती राज विभाग के माध्यम से मरम्मत कार्य कराया जाना था. हालांकि एक वर्ष बीतने के बाद भी कई विद्यालयों में निर्माण और मरम्मत कार्य पूरे नहीं हो सके हैं.
बालिका विद्यालय की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक
जिला मुख्यालय के वजीरपुर दरवाजा क्षेत्र स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थिति गंभीर बनी हुई है. वर्षों पुराने भवन का एक हिस्सा दो वर्ष पहले तेज बारिश के दौरान ढह गया था, जिसकी अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है. दो क्षतिग्रस्त कमरों की छत पर भामाशाहों के सहयोग से टीनशेड लगाकर शिक्षण कार्य संचालित किया जा रहा है. बारिश के मौसम में सुरक्षा कारणों से भवन के एक हिस्से को बंद करना पड़ता है. कक्षों की कमी के चलते कई बार एक ही कमरे में तीन-तीन कक्षाओं की छात्राओं को बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है. विद्यालय में कक्षा 1 से 12 तक 300 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि नए सत्र में 62 से अधिक नए प्रवेश भी हो चुके हैं.
वैकल्पिक व्यवस्था से चल रही पढ़ाई
विद्यालय की प्रधानाचार्य मिथिलेश शर्मा ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए कई बार विभाग को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से में कक्षाएं नहीं लगाई जाती. वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नए भवन के कमरों और बरामदों में शिक्षण कार्य कराया जा रहा है. अध्यापिका अर्चना शर्मा ने कहा कि पर्याप्त कक्ष नहीं होने से छोटी कक्षाओं को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ता है, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है. जिला शिक्षा अधिकारी इंद्रेश तिवारी ने बताया कि क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनों को लेकर पहले ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ विद्यालयों में मरम्मत कार्य अभी अधूरा है और उसे शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही उन्होंने ग्रामीणों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील की, कि यदि कोई क्षतिग्रस्त विद्यालय सर्वे से छूट गया हो तो उसकी सूचना विभाग को दें, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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Karauli,Rajasthan



