Rajasthan

टीम बाड़मेर की पहल से बदली बेटियों की तकदीर, 20 हजार से अधिक युवतियां बनी आत्मनिर्भर, रोजगार के नए रास्ते खुले

Last Updated:June 29, 2026, 23:34 IST

Team Barmer: टीम बाड़मेर की पहल ने सरहदी जिले में महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, मेहंदी, कुकिंग और हस्तशिल्प जैसे कौशल प्रशिक्षण के जरिए पिछले 8 वर्षों में 20 हजार से अधिक बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया गया है. पहले जहां सीमित अवसर थे, अब हजारों युवतियां अपने हुनर के दम पर स्वरोजगार कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं.

बाड़मेर. कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली बेटियां आज अपने हुनर के दम पर परिवार की आर्थिक ताकत बन रही हैं. सरहदी बाड़मेर में टीम बाड़मेर की पहल ने पिछले 8 वर्षों में 20 हजार से अधिक बेटियों को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है. सिलाई, ब्यूटी पार्लर, कुकिंग, मेहंदी और अन्य कौशल आधारित प्रशिक्षण से जुड़कर हजारों युवतियां आज अपना रोजगार चला रही हैं. टीम बाड़मेर ने महिलाओं और युवतियों को केवल प्रशिक्षण देने तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने और अवसर उपलब्ध कराने का भी काम किया है. बाड़मेर जिला मुख्यालय पर हर साल टीम बाड़मेर सैकड़ो बेटियों को सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, मेहंदी कला, कुकिंग, हस्तशिल्प और अन्य कौशल आधारित गतिविधियों का प्रशिक्षण दे रही है.

जहां पहले रोजगार के सीमित अवसर थे वहीं अब प्रशिक्षित युवतियां अपने हुनर के माध्यम से आमदनी कमा रही है. ईशा सोनी के मुताबिक इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है बल्कि परिवार और समाज में उनकी पहचान भी बढ़ी है. कई परिवारों की बेटियां आज अपने घर की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं. पिछले 8 वर्षों में इस अभियान के माध्यम से करीब 20 हजार बेटियों को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है.

पहले घर के काम थे सीमित, अब बने आत्मनिर्भर

वही भाविका जैन के मुताबिक पहले हम सिर्फ घर के काम तक सीमित थे लेकिन सिलाई कढ़ाई, मेहंदी, हस्तशिल्प जैसे प्रशिक्षण मिलने के बाद हमने अपने हुनर को रोजगार में बदला है. आज हम खुद कमाने के साथ परिवार की जिम्मेदारियों में भी भागीदारी निभा रहे हैं. महिला सशक्तिकरण की दिशा में टीम बाड़मेर की यह पहल आज जिले के लिए एक सफल मॉडल बन चुकी है. कई युवतियों ने घर से छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं जबकि अनेक महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं. रेगिस्तान की धरती पर शुरू हुआ यह अभियान अब हजारों परिवारों के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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