IIT कानपुर ने बना डाला हल्दी और शहद से स्टेंट, हार्ट मरीजों के लिए वरदान, काम पूरा करने के बाद शरीर में घुल जाएगा

Last Updated:August 17, 2026, 16:28 IST
IIT Kanpur Biodegradable Stent : हार्ट मरीजों की धमनियों में ब्लॉकेज होने पर स्टेंट डालना आम हो चुका है. आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने अब स्टेंट तैयार किया है जो एक समय के बाद शरीर में खुद घुल जाएगा. लोकल 18 से आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर संतोष कुमार मिश्रा बताते हैं कि इसे बनाने के लिए हल्दी और शहद का इस्तेमाल किया गया है. स्टेंट से जुड़ी तकनीक पर शोध काफी आगे बढ़ चुका है. कुछ अवयवों पर पेटेंट भी मिल चुके हैं, जबकि कुछ पर पेटेंट की प्रक्रिया अभी चल रही है. हार्ट मरीजों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं.
कानपुर. हार्ट मरीजों की धमनियों में ब्लॉकेज होने पर स्टेंट डालकर रक्त का प्रवाह सामान्य करने की प्रक्रिया लंबे समय से चिकित्सा क्षेत्र का अहम हिस्सा रही है. अब आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने स्टेंट की तकनीक में नया प्रयोग किया है. संस्थान के बायोसाइंस एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग में हल्दी और शहद की कोटिंग वाला स्टेंट तैयार किया गया है. यह स्टेंट बायोडिग्रेडेबल तकनीक पर आधारित है और एक समय के बाद शरीर में खुद घुल जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इस तकनीक का एनीमल ट्रायल भी शुरू करा दिया गया है.
किन लोगों ने बनाया
आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ प्रोफेसर संतोष कुमार मिश्रा और उनके सुपरविजन में शोध कर रहे पीएचडी स्कॉलर तमोजित सांतरा ने मिलकर इस स्टेंट को विकसित किया है. प्रो. मिश्रा के मुताबिक इस तरह की कोटिंग को स्टेंट तकनीक में इस्तेमाल करने पर काम किया गया है. हल्दी और शहद को इसके महत्वपूर्ण घटकों के रूप में इस्तेमाल किया गया है. वर्तमान में हार्ट मरीजों में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट अलग-अलग धातुओं और अन्य सामग्री से तैयार किए जाते हैं. नई तकनीक में ऐसा विकल्प विकसित करने की कोशिश की गई है, जो एक निश्चित अवधि के बाद शरीर में धीरे-धीरे घुल सके. इसका उद्देश्य यह है कि स्टेंट अपना जरूरी काम करने के बाद शरीर में स्थायी रूप से मौजूद न रहे.
दवा पहुंचाने में भी करेगा मदद
स्टेंट का मुख्य काम ब्लॉक हुई धमनी को खुला रखने और रक्त के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करना है. आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार स्टेंट भी इसी उद्देश्य से काम करेगा. इसके जरिए जरूरत के अनुसार दवा को प्रभावित हिस्से तक पहुंचाने की व्यवस्था भी रखी गई है. प्रो. संतोष कुमार मिश्रा के मुताबिक, स्टेंट से जुड़ी तकनीक पर शोध काफी आगे बढ़ चुका है. कुछ अवयवों पर पेटेंट भी मिल चुके हैं, जबकि कुछ अन्य पर पेटेंट की प्रक्रिया अभी चल रही है. शोध टीम का लक्ष्य ऐसी तकनीक तैयार करना है, जिसे आगे चलकर मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किया जा सके.
लंबे समय से हो रहा काम
आईआईटी कानपुर की टीम ने इस स्टेंट का एनीमल ट्रायल शुरू करा दिया है. यह चरण तकनीक की उपयोगिता और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके परिणामों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी. प्रो. मिश्रा बताते हैं कि इस तकनीक को विकसित करने का काम लंबे समय से चल रहा है. अब इसे बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी तैयारी की जा रही है. स्टेंट से जुड़े कुछ पेटेंट मिल चुके हैं और बाकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे भारतीय बाजार में लाने की दिशा में काम किया जाएगा. अगर तकनीक परीक्षण के सभी जरूरी चरणों में सफल रहती है और आगे आवश्यक स्वीकृतियां मिलती हैं, तो भविष्य में यह हार्ट मरीजों के लिए एक नया विकल्प बन सकती है.
About the AuthorPriyanshu Gupta
प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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Kanpur Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
August 17, 2026, 16:28 IST



