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337 करोड़ के रिकॉर्ड चढ़ावे के साथ चर्चा में सांवलिया सेठ मंदिर का मैनेजमेंट मॉडल, जानिए कैसे होती है पाई-पाई की गिनती

Last Updated:July 01, 2026, 14:48 IST

Sanwaliya Seth Temple: चित्तौड़गढ़ के मंडफिया स्थित श्री सांवलिया जी मंदिर में इस साल (2025-26) रिकॉर्ड 337 करोड़ रुपए का चढ़ावा आया है, जिसने पिछले 34 साल के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. यहाँ का पारदर्शी और सुरक्षित काउंटिंग मॉडल हर तरफ चर्चा में है, जहाँ 200 बैंककर्मियों व मंदिर स्टाफ द्वारा सीसीटीवी की निगरानी में नोटों की गिनती होती है. भक्त भगवान को बिजनेस पार्टनर मानकर मुनाफे का हिस्सा देते हैं, जिसका उपयोग ट्रस्ट द्वारा 16 गांवों के विकास में किया जाता है.

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सांवलिया सेठ मंदिर में 337 करोड़ का चढ़ावा, मैनेजमेंट मॉडल बना चर्चा का विषयZoomSanwaliya Seth Management Model: चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर में चढ़ावे का बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

Sanwaliya Seth Temple Sets Record With Rs 337 Crore Donation: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में सांवलिया सेठ का एक ऐसा अनूठा दरबार है, जहां अरबों रुपए के चढ़ावे की पाई-पाई का हिसाब शीशे की तरह साफ है. मंडफिया स्थित श्री सांवलिया जी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि पिछले 34 सालों के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं. इस साल (2025-26) मंदिर में करीब 337 करोड़ रुपए का ऐतिहासिक चढ़ावा आया है.

आंकड़ों की बात करें तो सिर्फ 29 दिनों के भीतर 41.67 करोड़ रुपए की राशि दानपात्र से निकली है. वहीं, साल 2025 के अक्टूबर-नवंबर में दिवाली के मौके पर एक साथ 51 करोड़ रुपए से ज्यादा का रिकॉर्ड चढ़ावा आया था. इस मंदिर की लोकप्रियता और वैभव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 1991-92 में यहाँ का सालाना चढ़ावा महज 65 lakh रुपए था, जो आज 337 करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है.

गड़बड़ी की नो-गारंटी: 200 लोगों की फौज और सीसीटीवी का कड़ा पहराआखिर जहां हर साल चढ़ावा इतनी तेजी से बढ़ रहा हो, वहां गड़बड़ी की कोई गुंजाइश क्यों नहीं है? सांवलिया जी का मैनेजमेंट मॉडल पूरी दुनिया के लिए समझने लायक है. यहां हर महीने की चतुर्दशी को राजभोग आरती के ठीक बाद दानपात्र खोले जाते हैं. इस मैराथन काउंटिंग (नोटों की गिनती) के लिए 200 लोगों की एक विशेष फौज तैनात की जाती है, जिसमें कड़े सुरक्षा घेरे के बीच विभिन्न बैंकों के कर्मचारी और मंदिर प्रशासन के चुनिंदा लोग शामिल होते हैं. सबसे पहले नोटों और सिक्कों को हाथों से अलग किया जाता है, जिसके बाद हाई-टेक मशीनों से इनकी गिनती होती है. सोने-चांदी के गहनों का लाइव वजन किया जाता है. साल 1992 से 2025 तक यह काउंटिंग श्रद्धालुओं के सामने खुले चौक में होती थी, लेकिन अब पारदर्शिता को और पुख्ता करने तथा किसी भी मानवीय चूक या सुरक्षा चूक को रोकने के लिए इसे सत्संग भवन में पूरी तरह सेपरेट कर दिया गया है, जहां हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी रहती है.

बिजनेस के ‘लीगल पार्टनर’ हैं सांवलिया सेठ, स्टाम्प पेपर पर आता है मुनाफासांवलिया जी को लोग सिर्फ भगवान नहीं, बल्कि अपने बिजनेस का ऑफिशियल और लीगल पार्टनर मानते हैं. मन्नत पूरी होने पर देश-विदेश के बड़े-बड़े उद्योगपति और व्यापारी बाकायदा अपनी कंपनी के लेटरहेड और स्टाम्प पेपर पर लिखकर लाते हैं कि वे अपने कुल मुनाफे का कितना प्रतिशत भगवान को दे रहे हैं, और फिर उस तय हिस्से को सांवलिया सेठ के चरणों में सौंप देते हैं. यही वजह है कि यहां केवल कैश ही नहीं, बल्कि चेक, मनी ऑर्डर और भारी मात्रा में फॉरेन करेंसी (विदेशी मुद्रा) भी बरसती है. मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव बताते हैं कि भक्तों का यह अनूठा विश्वास ही है जो इस मंदिर को देश के सबसे अमीर और व्यवस्थित मंदिरों की सूची में शुमार करता है.

खजाने में बंद नहीं रहता पैसा, 16 गांवों के जनविकास में लग रही है पाई-पाईसांवलिया सेठ के खजाने में आने वाला यह पैसा सिर्फ बैंक खातों या लॉकरों में बंद नहीं रहता, बल्कि यह पैसा सीधे धरातल पर जनविकास के कार्यों में उतर रहा है. साल 1991 में राज्य सरकार द्वारा मंदिर के अधिग्रहण के बाद जो ट्रस्ट बनाया गया था, उसके नियम बेहद सख्त और लोक-कल्याणकारी हैं. मंडफिया सहित आसपास के 16 गांवों के संपूर्ण विकास का जिम्मा खुद मंदिर प्रशासन संभालता है. गांवों में आधुनिक सामुदायिक भवनों का निर्माण कराना हो, सड़कों पर चमचमाती हाई-मास्ट लाइटें लगानी हों या फिर जिला कलेक्टर के आदेश पर सरकारी परिसरों, महिलाओं और बच्चों के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाएं तैयार करनी हों—सांवलिया सेठ के खजाने की पाई-पाई सीधे समाज और जनता के विकास के काम आ रही है.

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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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